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सीएम बोले कर्मचारी योगा कर झुकना सीखें
अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 12 Nov 2013 12:03 AM IST
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उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन के प्रांतीय अधिवेशन में मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा सोमवार को कर्मचारियों को नसीहत दे गए। कर्मचारी मुख्यमंत्री से अपनी 41 मांगों में से कुछ के पूरा होने की उम्मीद लगाए हुए थे, लेकिन मुख्यमंत्री ने मांगों की सूची से नजरें फेरते हुए उन्हें योगा करने की सलाह दे डाली।
धैर्य और संयम का परिचय दें
सीएम ने कहा कि कर्मचारी योगा कर झुकना सीखें और धैर्य और संयम का परिचय दें। उन्होंने मांगों की लंबी-चौड़ी फेहरिस्त पर कहा कि केवल अहम मुद्दों की सुनवाई ही संभव है। हरिद्वार बाईपास रोड पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों से कहा कि वे छात्र जीवन से निकल चुके हैँ और इस उम्र में अब धीरज और संयम बरतें। मांगों के लिए महिलाएं पानी की टंकी पर चढ़ गई हैं ऐसे में वार्ता कैसे होगी। हालांकि मुख्यमंत्री ने ये भी कहा कि अधिवेशन में उनके आने का संदेश यह है कि वह कर्मचारियों के साथ हैं।
नियमावली में संशोधन नहीं
कौन सी ऐसी नियमावली है जिसमें संशोधन नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि लखवाड़ व्यासी जल विद्युत परियोजना को केंद्र से संस्तुति मिल चुकी है, 20 नवंबर को इसका शुभारंभ होगा। राज्य को बिजली बेचनी चाहिए थी, लेकिन खरीदनी पड़ रही है। कृषि मंत्री हरक सिंह रावत ने कहा कि बहुगुणा की सरकार कर्मचारियों व शिक्षकों की सरकार है, लेकिन इतनी हड़ताल हो रही है कि राज्य हड़ताल प्रदेश हो गया है।
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कर्मचारियों और सरकार के बीच कम्युनिकेशन गैप
कृषि मंत्री ने कहा कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को एसीपी का लाभ वर्ष 2008 से दिया जाना चाहिए। उन्होंने कर्मचारियों की मांगों को कैबिनेट बैठक में रखने का आश्वासन दिया। कांग्रेस नेता साकेत बहुगुणा ने कहा कि कर्मचारियों और सरकार के बीच कम्युनिकेशन गैप है। सरकार यदि सभी मांगें पूरी नही सक सकती तो कुछ मांगों पर अमल हो सकता है।
कर्मचारियों को दिया गया समय
जबकि अन्य मांगों के लिए कर्मचारियों को समय दिया जा सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। साकेत ने कृषि मंत्री को अपना गुरू बताते हुए कहा कि इनकी पहाड़ के दूरदराज के गांवों में खासी पकड़ है। अधिवेशन में रायपुर के विधायक उमेश शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष मनोहर कुमार मिश्रा, प्रदेश महामंत्री सुनील दत्त कोठारी, सिंचाई विभाग कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष रमेश रमोला, महामंत्री पूर्णानंद नौटियाल आदि मौजूद थे।
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धैर्य और संयम का परिचय दें
सीएम ने कहा कि कर्मचारी योगा कर झुकना सीखें और धैर्य और संयम का परिचय दें। उन्होंने मांगों की लंबी-चौड़ी फेहरिस्त पर कहा कि केवल अहम मुद्दों की सुनवाई ही संभव है। हरिद्वार बाईपास रोड पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों से कहा कि वे छात्र जीवन से निकल चुके हैँ और इस उम्र में अब धीरज और संयम बरतें। मांगों के लिए महिलाएं पानी की टंकी पर चढ़ गई हैं ऐसे में वार्ता कैसे होगी। हालांकि मुख्यमंत्री ने ये भी कहा कि अधिवेशन में उनके आने का संदेश यह है कि वह कर्मचारियों के साथ हैं।
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नियमावली में संशोधन नहीं
कौन सी ऐसी नियमावली है जिसमें संशोधन नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि लखवाड़ व्यासी जल विद्युत परियोजना को केंद्र से संस्तुति मिल चुकी है, 20 नवंबर को इसका शुभारंभ होगा। राज्य को बिजली बेचनी चाहिए थी, लेकिन खरीदनी पड़ रही है। कृषि मंत्री हरक सिंह रावत ने कहा कि बहुगुणा की सरकार कर्मचारियों व शिक्षकों की सरकार है, लेकिन इतनी हड़ताल हो रही है कि राज्य हड़ताल प्रदेश हो गया है।
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कर्मचारियों और सरकार के बीच कम्युनिकेशन गैप
कृषि मंत्री ने कहा कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को एसीपी का लाभ वर्ष 2008 से दिया जाना चाहिए। उन्होंने कर्मचारियों की मांगों को कैबिनेट बैठक में रखने का आश्वासन दिया। कांग्रेस नेता साकेत बहुगुणा ने कहा कि कर्मचारियों और सरकार के बीच कम्युनिकेशन गैप है। सरकार यदि सभी मांगें पूरी नही सक सकती तो कुछ मांगों पर अमल हो सकता है।
कर्मचारियों को दिया गया समय
जबकि अन्य मांगों के लिए कर्मचारियों को समय दिया जा सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। साकेत ने कृषि मंत्री को अपना गुरू बताते हुए कहा कि इनकी पहाड़ के दूरदराज के गांवों में खासी पकड़ है। अधिवेशन में रायपुर के विधायक उमेश शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष मनोहर कुमार मिश्रा, प्रदेश महामंत्री सुनील दत्त कोठारी, सिंचाई विभाग कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष रमेश रमोला, महामंत्री पूर्णानंद नौटियाल आदि मौजूद थे।