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सीएम रावत की चाय पर चर्चा, फौजी वोटों पर नजर
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 04 Feb 2016 03:39 AM IST
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सीएम हरीश रावत के आमंत्रण पर बुधवार को चाय पर आमंत्रित पूर्वसैनिकों और पूर्व अर्द्धसैनिकों ने अपनी मांगों का पिटारा खोला। चर्चा लंबित मांगों से आक्रोशित फौजियों के कड़े तेवरों से शुरू हुई लेकिन खत्म होने तक सीएम के आश्वासन पर सब नरम पड़ते दिखे।
ज्यादा रोष अर्द्धसैनिकों बलों में दिखा, जिनकी आधा दर्जन से अधिक मामले सरकार में विचाराधीन हैं। वहीं पूर्व सैनिकों ने कल्याण योजनाओं को बेहतर बनाने के लिए कई प्रस्ताव रखे। हालांकि चर्चा में भाग लेने सैनिक कल्याण मंत्री हरक सिंह रावत और अर्द्धसैनिक कल्याण मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी मौजूद नहीं रहे।
अलग निदेशालय का मुद्दा उठा
सीएम से चाय पर चर्चा के लिए पूर्वसैनिक और अर्द्धसैनिक बल के पूर्व कार्मिक अपना अपना एजेंड़ा रखा। पूर्वसैनिकों के कई बिंदु हैं जिसमें राज्य सैनिक कल्याण परिषद के ढांचे में बदलाव, कल्याण योजनाओं में धनराशि में की गई वृद्धि प्रभावी नहीं होने के अलावा उपनल में रोजगार जैसे मुद्दे उठे।
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अर्द्धसैनिक बलों ने 8 फरवरी 2014 के जारी शासनादेशों को प्रभावी बनाने की मांग रखी। इस शासनादेश में उनके लिए पूर्वसैनिकों के समान सुविधाएं देने का उल्लेख है, लेकिन उसका अनुपालन नहीं हुआ। अर्द्धसैनिकों के कल्याण के लिए अलग निदेशालय बनाने की मुद्दा भी उठा।
अर्द्धसैनिक कल्याण परिषद के अध्यक्ष बलराम सिंह नेगी मौजूद रहे, जबकि राज्य सैनिक कल्याण परिषद के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल गंभीर सिंह नेगी (रि) ने तहसील स्तर पर सैनिक कल्याण का ढांचा स्थापित करने का सुझाव दिया। सीएम हरीश रावत ने पूर्वसैनिकों और पूर्व अर्द्ध्रसैनिक बलों को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों को लेकर सरकार गंभीर है। सीएम ने कहा कि उनकी मांगों को एक साथ प्रभावी नहीं किया जा सकता बल्कि चरणबद्ध तरीके से अमल में लाया जाएगा।
नहीं खुला निदेशालय
अर्द्धसैनिक कल्याण की सबसे बड़ी मांग अलग से निदेशालय का गठन सरकार के लिए सबसे बढ़ी चुनौती है। पुलिस मेडल प्राप्त कार्मिकों को मिले सैन्य वीरता पदकों के समान सुविधाएं। अर्द्धसैनिक बलों की कैंटीन (सीपीसी) में दुपहिया चौपहिया वाहन खरीद पर मिले छूट। अर्द्धसैनिकों बलों की कैंटीन से शराब खरीद पर जारी शासनादेश हो संशोधित।
उपनल और निदेशालय रहे निशाने पर
उपनल में पूर्व सैनिकों को रोजगार का मुद्दा भी जमकर गूंजा। कई पूर्व सैनिकों ने उपनल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किये। लेफ्टिनेंट कर्नल गंगा सिंह रावत (रि) ने सैनिक कल्याण निदेशालय में केंद्र के मानकों की अवेहलना का मुद्दा उठाया। डीएम की अध्यक्षता में पूर्वसैनिक और वीर नारियों की समस्याओं को लेकर मासिक बैठक को नियमित बनाने की मांग रखी। जनरल नेगी ने पूर्वसैनिकों को वीरचंद्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार ऋण योजना के तहत जोड़ने का सुझाव दिया। कैंटीन पर एक्साइट ड्यूटी कम करने की मांग भी बैठक में उठी। ब्रिगेडियर केजी बहल (रि) ने स्मार्ट सिटी का प्रस्ताव आईएमए के साथ बनाने से सुरक्षा का मुद्दा रखा।
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ज्यादा रोष अर्द्धसैनिकों बलों में दिखा, जिनकी आधा दर्जन से अधिक मामले सरकार में विचाराधीन हैं। वहीं पूर्व सैनिकों ने कल्याण योजनाओं को बेहतर बनाने के लिए कई प्रस्ताव रखे। हालांकि चर्चा में भाग लेने सैनिक कल्याण मंत्री हरक सिंह रावत और अर्द्धसैनिक कल्याण मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी मौजूद नहीं रहे।
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अलग निदेशालय का मुद्दा उठा
सीएम से चाय पर चर्चा के लिए पूर्वसैनिक और अर्द्धसैनिक बल के पूर्व कार्मिक अपना अपना एजेंड़ा रखा। पूर्वसैनिकों के कई बिंदु हैं जिसमें राज्य सैनिक कल्याण परिषद के ढांचे में बदलाव, कल्याण योजनाओं में धनराशि में की गई वृद्धि प्रभावी नहीं होने के अलावा उपनल में रोजगार जैसे मुद्दे उठे।
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अर्द्धसैनिक बलों ने 8 फरवरी 2014 के जारी शासनादेशों को प्रभावी बनाने की मांग रखी। इस शासनादेश में उनके लिए पूर्वसैनिकों के समान सुविधाएं देने का उल्लेख है, लेकिन उसका अनुपालन नहीं हुआ। अर्द्धसैनिकों के कल्याण के लिए अलग निदेशालय बनाने की मुद्दा भी उठा।
अर्द्धसैनिक कल्याण परिषद के अध्यक्ष बलराम सिंह नेगी मौजूद रहे, जबकि राज्य सैनिक कल्याण परिषद के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल गंभीर सिंह नेगी (रि) ने तहसील स्तर पर सैनिक कल्याण का ढांचा स्थापित करने का सुझाव दिया। सीएम हरीश रावत ने पूर्वसैनिकों और पूर्व अर्द्ध्रसैनिक बलों को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों को लेकर सरकार गंभीर है। सीएम ने कहा कि उनकी मांगों को एक साथ प्रभावी नहीं किया जा सकता बल्कि चरणबद्ध तरीके से अमल में लाया जाएगा।
नहीं खुला निदेशालय
अर्द्धसैनिक कल्याण की सबसे बड़ी मांग अलग से निदेशालय का गठन सरकार के लिए सबसे बढ़ी चुनौती है। पुलिस मेडल प्राप्त कार्मिकों को मिले सैन्य वीरता पदकों के समान सुविधाएं। अर्द्धसैनिक बलों की कैंटीन (सीपीसी) में दुपहिया चौपहिया वाहन खरीद पर मिले छूट। अर्द्धसैनिकों बलों की कैंटीन से शराब खरीद पर जारी शासनादेश हो संशोधित।
उपनल और निदेशालय रहे निशाने पर
उपनल में पूर्व सैनिकों को रोजगार का मुद्दा भी जमकर गूंजा। कई पूर्व सैनिकों ने उपनल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किये। लेफ्टिनेंट कर्नल गंगा सिंह रावत (रि) ने सैनिक कल्याण निदेशालय में केंद्र के मानकों की अवेहलना का मुद्दा उठाया। डीएम की अध्यक्षता में पूर्वसैनिक और वीर नारियों की समस्याओं को लेकर मासिक बैठक को नियमित बनाने की मांग रखी। जनरल नेगी ने पूर्वसैनिकों को वीरचंद्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार ऋण योजना के तहत जोड़ने का सुझाव दिया। कैंटीन पर एक्साइट ड्यूटी कम करने की मांग भी बैठक में उठी। ब्रिगेडियर केजी बहल (रि) ने स्मार्ट सिटी का प्रस्ताव आईएमए के साथ बनाने से सुरक्षा का मुद्दा रखा।