CM रावत के स्टिंग मामले पर 20 अगस्त को होगी हाईकोर्ट में अगली सुनवाई
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नैनीताल हाईकोर्ट में मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग ऑपरेशन की जांच सीबीआई द्वारा किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर अगली सुनवाई आगामी 20 अगस्त को होगी।
मंगलवार को दोपहर दो बजे शुरू हुई सुनवाई में कोर्ट ने हरक सिंह रावत से जवाब मांगा। हरक सिहं रावत कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे।
राज्य सरकार की तरफ से अधिवक्ता शेखर नाफड़े और जावेद तथा मुख्यमंत्री की तरफ से राजीव धवन और देवीदत्त कामथ हैं जबकि याचिकाकर्ता हरक सिंह रावत की तरफ से स्थानीय अधिवक्ता विकास बहुगुणा पैरवी की।
फैसले पर टिकी उत्तराखंड की सियासी तस्वीर
हरीश रावत ने स्टिंग मामले में उनके खिलाफ चल रही सीबीआई जांच पर रोक लगने के लिए हाईकोर्ट में अर्जी लगाई थी। याची ने कहा था कि राष्ट्रपति शासन के दौरान सीबीआई जांच की संस्तुति की गई थी।
बाद में कैबिनेट ने प्रस्ताव पारित कर सीबीआई जांच की संस्तुति को वापस लेकर इसकी जांच एसआईटी से कराने का फैसला लिया था। विधायकों की खरीद फरोख्त के स्टिंग प्रकरण में फंसे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत का सियासी भविष्य अदालत के फैसले पर टिका है।
उल्लेखनीय है कि विधायकों की खरीद फरोख्त से जुड़े स्टिंग प्रकरण की हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत ने अदालत में याचिका दाखिल की है कि मुख्यमंत्री की गैर मौजूदगी में कैबिनेट ने सीबीआई की जगह प्रकरण की जांच एसआईटी जैसी राज्य की एजेंसी से कराने का जो फैसला किया है, वह गलत है।
'राज्य की जांच एजेंसी जांच करने में सक्षम हैं'
स्टिंग प्रकरण की सीबीआई जांच ही होनी चाहिए। जबकि मुख्यमंत्री रावत की ओर से दाखिल याचिका में जांच सीबीआई से न होकर एसआईटी से करवाने की पैरवी की गई है, क्योंकि राज्य की जांच एजेंसी जांच करने में सक्षम है।
पहले हो चुकी सुनवाई में हाईकोर्ट ने याचिका पर सीबीआई को सीएम की गिरफ्तारी नहीं करने की राहत तो दी है, साथ ही सीबीआई की जांच में उन्हें सहयोग करने के निर्देश दिए हैं। माना जा रहा है कि मंगलवार को हाईकोर्ट याचिका पर फैसला आ सकता है।
अदालत का जो भी फैसला रहे उससे प्रदेश की सियासत तो प्रभावित होगी ही साथ ही सीबीआई जांच पर भी स्थिति साफ हो जाएगी। सूत्रों के मुताबिक याचिका निरस्त होने के साथ ही सीबीआई मुख्यमंत्री के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई कर सकती है।
हालांकि इससे पूर्व मुख्यमंत्री रावत राष्ट्रपति शासन को सुप्रीम कोर्ट से समाप्त कराने संबंधी अदालत के फैसले के बाद न सिर्फ सरकार बल्कि अपनी कुर्सी भी बचा ली है। लेकिन स्टिंग प्रकरण का मुद्दा उनका पीछा नहीं छोड़ रहा है। सीबीआई जांच का जो पैंतरा केंद्र सरकार और प्रदेश भाजपा ने पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत के साथ मिलकर खेला उससे छुटकारा नहीं मिल रहा है।