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Dehradun: जिंदगी के पटरी पर लौटने का है इंतजार, 32 परिवारों के पुनर्वास की फाइल शासन नहीं पहुंची

Mon, 31 Oct 2022 05:46 PM IST
रेनू सकलानी विनोद मुसान, अमर उजाला, देहरादून
विनोद मुसान, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Mon, 31 Oct 2022 05:46 PM IST
सार

रायपुर ब्लाक में 19-20 अगस्त को अतिवृष्टि और बादल फटने की घटना में दस से अधिक लोग मलबे में जिंदा दफन हो गए थे। प्रशासन का दावा है कि सभी मृतक आश्रितों को चार-चार लाख रुपये की मुआवजा राशि दी जा चुकी है। पुनर्वास के लिए चिह्नित करीब 32 परिवारों की फाइल जिला प्रशासन से शासन तक ही नहीं पहुंच पाई है।

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cloudburst Tehri incident rehabilitation file of 32 families did not reach government Uttarakhand news
सीएम पुष्कर सिंह धामी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

टिहरी के जौनपुर ब्लॉक के कुमाल्डा और देहरादून तहसील सदर क्षेत्र के रायपुर ब्लाक में 19-20 अगस्त को अतिवृष्टि और बादल फटने की घटना के बाद आपदाग्रस्त लोगों की जिंदगी अभी भी पटरी पर नहीं लौट पाई है। तमाम परिवार अब भी स्कूल की छत के नीचे रहने को मजबूर हैं। प्रशासन के दावों से इतर कई लोगों को मुआवजा नहीं मिल पाया है।

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इधर, दोनों जिलों में पुनर्वास के लिए चिह्नित करीब 32 परिवारों की फाइल जिला प्रशासन से शासन तक ही नहीं पहुंच पाई है। इस आपदा में आपदा में दस से अधिक लोग मलबे में जिंदा दफन हो गए थे। प्रशासन का दावा है कि सभी मृतक आश्रितों को चार-चार लाख रुपये की मुआवजा राशि दी जा चुकी है।
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आपदाग्रस्त क्षेत्र सरखेत, भैंसवाड़ा और क्यारा सिम्यारी के रहने वाले बिजेंद्र सिंह पंवार, चमन दास, महादेव भट्ट, सुमित्रा राणा, मोहित राणा, प्रेम सिंह, महेंद्र सिंह आदि ग्रामीण मुआवजे के लिए रोज जिला प्रशासन की चौखट नाप रहे हैं। उनका कहना है कि 19-20 ही नहीं 28 अगस्त को भी भारी तबाही हुई है, लेकिन जिला प्रशासन ने अब तक उनकी सुध नहीं ली। 

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दून जिले में इनको मिला मुआवजा 
- 26 परिवारों को पूर्ण एवं तीक्ष्ण क्षतिग्रस्त आवासीय भवन के लिए प्रति परिवार एक लाख एक हजार 900 सौ रुपये
- 07 परिवारों को आंशिक भवन क्षतिग्रस्त होने पर 52 सौ रुपये प्रति परिवार
- 41 परिवारों को 3800 रुपये तत्कालिक सहायता 
- 52 परिवारों को कृषि भूमि मुआवजा रकबे के हिसाब से 
- 13 परिवारों के विस्थापन के लिए की पत्रावली हो रही तैयार 

स्कूल भवन में रह रहे अब भी आठ परिवार
मालदेवता क्षेत्र के सरखेत में आठ परिवार अब भी जूनियर हाई स्कूल की छत के नीचे जीवन व्यतीत कर हरे हैं। दो परिवार किराए के भवन में चले गए। कुछ परिवारों ने अभी नाते-रिश्तेदारी में शरण ली है।

तिमली गांव में जमीन का विरोध कर रहे लोग 
आपदाग्रस्त सरखेत, भैंसवाड़ा के लोगों को प्रशासन की ओर से तिमली गांव में बसाने के लिए आवासीय भूखंड देने की बात कही गई थी। लेकिन लोग इसका विरोध कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि उनका जीवन खेती-किसानी पर ही निर्भर है। यदि वह अपने खेतों से दूर हो जाएंगे जीवन व्यापन कैसे होगा। कुछ लोगों ने मुआवजा राशि बांटे जाने में भी भेदभाव का आरोप लगाया है। 

-क्षेत्र में सड़क और पैदल मार्ग को ठीक करने का कार्य कुछ दिन बाद ही कर लिया गया था। जो मार्ग अभी और सुधारे जा सकते हैं, उन पर कार्य चल रहा है। इसके अलावा नदी के सुरक्षात्मक कार्य पर भी प्रगति है। आपदा प्रभावितों और मृतक आश्रितों को मुआवजा राशि उपलब्ध की जा चुकी है। कुछ कार्य ऐसे हैं, जो शासन स्तर पर किए जाने हैं, उनके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जा रहा है। 
- सोनिका, जिलाधिकारी देहरादून

11 परिवारों ने गांव से दूसरी जगह पुनर्वास करने पर नहीं दी सहमति
टिहरी जिले के जौनपुर ब्लॉक के कुमाल्डा क्षेत्र में पुनर्वास के लिए 19 परिवार चिह्नित किए गए हैं। इनमें से 11 परिवारों ने गांव से दूसरी जगह पुनर्वास होने पर सहमति नहीं दी है। प्रभावित परिवारों ने गांव के आसपास ही सुरक्षा कार्य करने का अनुरोध किया है। 

कृषि भूमि, पशु हानि ने तोड़ी ग्रामीणों की कमर
आपदा से खेती को हुए नुकसान की भरपाई करना ग्रामीणों के सामने चुनौती बना हुआ है। वहीं पशु हानि ने उनकी कमर तोड़कर रख दी है। यहां अलग-अलग गांवों की लगभग 16 हेक्टेयर कृषि भूमि आपदा की भेंट चढ़ गई और 69 पशु अकाल मौत का शिकार बने। जो ग्रामीणों की आर्थिकी का जरिया थे। इस एवज में ग्रामीणों को नाममात्र का मुआवजा मिला है तो कई को वह भी नसीब नहीं हो पाया है। 

दूसरे लोगों के घरों में शरण लिए हुए हैं लोग
आपदा में अलग-अलग गांव के 12 आवासीय भवन पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हो गए थे। 46 भवन आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए थे। हालांकि आपदा प्रभावित गांवों में पानी और बिजली की आपूर्ति बहाल कर दी गई है। लेकिन गांवों को जाने वाले पैदल मार्ग अभी भी क्षतिग्रस्त हैं। आपदा से प्रभावित 19 परिवारों को प्रशासन ने पुनर्वास के लिए चिन्हित किया है। प्रभावित कई परिवार गांव में दूसरे लोगों के घरों में शरण लिए हुए हैं। 

प्रशासन ने दी सहायता 
- टिहरी जिले में पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त 12 भवन स्वामियों को दस लाख 10 हजार और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त भवन स्वामियों को दो लाख 39 हजार की आर्थिक सहायता राशि वितरित की जा चुकी है। 
- प्रभावित परिवारों को बर्तन, कपड़े आदि सामान लेने के लिए दो लाख 77 हजार रूपये का मुआवजा दिया 
- खेती को हुए नुकसान के लिए काश्तकारों को 14 लाख 75 हजार का मुआवजा भुगतान किया जा चुका है। 
क्षतिग्रस्त हुई सिंचाई नहर, पेयजल, विद्युत लाइन, पुलिया और रास्तों के मरम्मत के लिए शासन को 20 करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया है। 

(अपर जिलाधिकारी रामजी शरण शर्मा के अनुसार) 

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जौनपुर ब्लॉक के कुमाल्डा क्षेत्र में आपदा से खेतों को हुए नुकसान का मरम्मत कार्य मनरेगा के तहत किया जा रहा है। गदेरे और नदियों के किनारे सुरक्षात्मक कार्य करने के लिए प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। प्रभावित परिवारों को मुआवजा राशि का वितरण किया जा चुका है। आपदा से क्षतिग्रस्त गांव के पैदल रास्तों का मरम्मत कार्य पूरा हो चुका है। - डा. सौरभ गहरवार, डीएम टिहरी गढ़वाल

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