तबाही रोकने के लिए अब विमान की मदद से लिए जाएंगे बादलों के नमूने
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कहां और क्यों फटते हैं बादल? मानवीय गतिविधि बादल फटने की घटनाओं को किस प्रकार प्रभावित कर रही है, इसकी जानकारी हासिल करने के लिए भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) हिमालय क्षेत्र में एयरक्राफ्ट (विमान) की मदद से बादलों के नमूने लेगा।
एयरक्राफ्ट से बादलों के नमूने लिए गए हैं
प्रयोगशाला में इन नमूनों के परीक्षण के बाद वैज्ञानिक बादल फटने की घटना की वजह की सटीक जानकारी जुटा पाएंगे। वैज्ञानिक यह अंदाजा लगा सकेंगे कि किन स्थानों में बादल फटने का ज्यादा खतरा है। पहाड़ में लगभग हर साल बादल फटने या अतिवृष्टि की घटनाएं होती हैं। इन घटनाओं में जान-माल का व्यापक नुकसान होता है। वर्तमान में देश-विदेश में बादल फटने की सटीक जानकारी के लिए शोध चल रहे हैं, ताकि समय से जानकारी मिलने पर जान माल के नुकसान को कम किया जा सके।
इसके लिए संस्थान में विशेष एयरक्राफ्ट उपलब्ध है, जिसमें उपकरण लगे हुए हैं। अलग-अलग वक्त पर बादलों के नमूने लिए जाएंगे, ताकि यदि कहीं बादल फटता है, तो बादलों में आए परिवर्तन का अध्ययन हो सके। इससे यह फायदा होगा कि बादल फटने की स्थिति बनने पर समय से चेतावनी जारी की जा सकती है।