झूठे निकले पूर्व शिक्षा निदेशक ग्वाल पर लगे आरोप, क्लीन चिट
पूर्व विद्यालयी शिक्षा निदेशक चंद्र सिंह ग्वाल पर लगे सभी आरोप झूठे साबित हो गए हैं। वित्त ऑडिट प्रकोष्ठ ने जांच करने के बाद उन पर लगाए गए सभी आरोप गलत पाए गए। प्रकोष्ठ ने 10 बिंदुओं पर जांच करने के बाद अपनी रिपोर्ट शासन को दी। इस आधार पर अपर मुख्य सचिव डॉ. रणबीर सिंह ने उन्हें क्लीनचिट दे दी।
पूर्व विद्यालयी शिक्षा निदेशक चंद्र सिंह ग्वाल पर 54 लाख के गबन के साथ ही कई और अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे। इस आधार पर लेखा परीक्षा दल के वरिष्ठ अधिकारी एसएस नगन्याल की अध्यक्षता में दल ने 17 मई 2016 से 30 मई 2016 तक जांच की।
वित्त ऑडिट प्रकोष्ठ ने दस बिंदुओं की जांच करते हुए जांच आख्या शासन को उपलब्ध कराई थी। इस आधार पर चंद्र सिंह ग्वाल को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया है। उनके खिलाफ सभी जांचें समाप्त कर दी गई हैं।
जांच के बाद यह बातें आईं सामने
एससीईआरटी से ऑडिट से संबंधित अभिलेख के आधार पर आधे अधूरे गलत आंकड़े और तथ्यात्मक त्रुटि शासन को उपलब्ध कराई गई। इस अवधि में 54 लाख रुपये की धनराशि का अभिलेख उपलब्ध न होने के कारण गबन व जालसाजी की संभावनाओं को दर्शाया गया है जबकि विभागीय जांच में सभी अभिलेख एससीईआरटी में ही उपलब्ध पाए गए।
सेवानिवृत्ति के तीन दिन पहले शिक्षा अनुभाग शासन ने अभिलेखों के बिना परीक्षण के जल्दबाजी में ऑडिट की तथ्यात्मक त्रुटि को ही आधार मानते हुए आरोप पत्र निर्गत कर दिया गया। आरोप पत्र में वर्ष 2004 से 2009 के स्थान पर ऑडिट अवधि को वर्ष 2002 से 2011 की अवधि को सम्मिलित करते हुए आरोप पत्र निर्गत किया गया। जो प्रक्रिया आरोप पत्र देने से पहले अपनाई जानी चाहिए थी और जो आरोप पत्र निर्गत करने के बाद अपनाई गई, वह न्यायसंगत नहीं है।
जो आरोप लगाए गए वह आधारहीन आंकड़े प्रस्तुत किए गए। ऐसा लगता है कि कुछ अधिकारियों ने दुर्भावना और षडयंत्र के तहत यह काम किया है। जबकि ऑडिट की अवधि में चंद्र सिंह ग्वाल के अलावा छह अपर निदेशकों और तीन निदेशों ने काम किए लेकिन उनके संबंध में विभाग मौन रहा। इससे स्पष्ट होता है कि उक्त प्रकरण सोची समझी कूटनीति है।
आरोपों के संदर्भ में सीएस ग्वाल ने स्थिति स्पष्ट करते हुए करीब पौने दो वर्ष पहले अपना उत्तर शासन को उपलब्ध करा दिया। इसके बावजूद उक्त प्रकरण लंबी अवधि तक शिक्षा विभाग ने लंबित रखा।
इस प्रकरण की विशेष परीक्षण और जांच सचिव वित्त को सौंपा गया। जांच वित्त विभाग और ऑडिट विभाग की संयुक्त टीम ने की। इसमें सीएस ग्वाल को निर्दोष पाया गया। शिक्षा मंत्री और सीएम ने दो सितंबर को निर्दोष पाते हुए उनके खिलाफ प्रचलित जांच को समाप्त कर दिया। अपर मुख्य सचिव डॉ. रणबीर सिंह ने इस संबंध में पत्र जारी कर दिया।
सीएस ग्वाल निर्दोष थे और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सत्य एवं तथ्यों पर आधारित नहीं पाए गए।
तथ्यहीन आंकड़ों के आरोपों के आधार पर लंबे समय तक जांच को लंबित रखा गया, जिससे एक वरिष्ठ अधिकारी की निष्ठा एवं छवि को ठेस पहुंची है।