16 साल बाद मल्टीप्लेक्स के जरिए लौटता सिनेमा
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उत्तराखंड में पिछले 16 साल के बाद अब मल्टीप्लेक्स के जरिए सिनेमा लौट रहा है। राज्य निर्माण बाद प्रदेश में 42 सिनेमाघर बंद हो चुके हैं। इसके उलट, मल्टीप्लेक्सों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है। डीटीएच प्रदेश का कमाऊ पूत साबित हो रहा है। सूचना अधिकार अधिनियम से यह खुलासा हुआ है।
मनोरंजन कर विभाग के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के पर्वतीय जिलों में केवल पौड़ी गढ़वाल में ही एक सिनेमा हॉल संचालित है। इसी जिले में एक नया मल्टीप्लेक्स भी खुला है। राज्य गठन के समय प्रदेश में 62 सिनेमा गृह थे, जो अब केवल 20 रह गए हैं। केबल, डीटीएच, स्मार्ट फोन के जमाने में अल्मोड़ा, रानीखेत, श्रीनगर आदि कई जगहों पर सिनेमा हॉल बंद हो गए।
हालांकि देहरादून में अभी आठ सिनेमा हॉल और छह मल्टीप्लेक्स चल रहे हैं। धार्मिक नगरी हरिद्वार में सिनेमा के प्रति रुझान कम नहीं हुआ है। वहां तीन सिनेमा हॉल के साथ-साथ तीन मल्टीप्लेक्स भी चल रहे हैं। नैनीताल जिले में सिनेमा हॉल की संख्या पांच हैं तो दो मल्टीप्लेक्स भी संचालित हो रहे हैं।
डीटीएच दे रहा सिनेमा को कड़ी चुनौती, अब भी नं-1
जाहिर है कि मल्टीपल स्क्रीन, खासकर महिलाओं के लिए सुरक्षित और वातानुकूलित माहौल, पिक्चर की अच्छी गुणवत्ता, बैठने की आरामदेह व्यवस्था, थ्रीडी फिक्चर देखने आदि की सुविधा के चलते भी मल्टीप्लेक्सों में दर्शकों को भा रहा है।
इतना होने पर भी मनोरंजन कराने के मामले में डीटीएच प्रदेश में नंबर वन है। पांच साल पहले टैक्स के रूप में डीटीएच से 544.36 लाख रुपये की आय पिछले वित्तीय वर्ष में 1142.97 लाख तक पहुंच गई है। हाल यह है कि प्रदेश में मनोरंजन कर विभाग की कुल आय का लगभग 40 प्रतिशत डीटीएच से मिल रहा है।
पिछले पांच साल में सिनेमा से होने वाली आय लगभग पांच गुनी बढ़ी है। वित्तीय वर्ष में 2010-2011 में सिनेमा से 209.34 लाख आमदनी हुई थी, वहीं 2015-2016 में आय बढ़कर 964.68 लाख हो गई। इस अवधि में केबल टीवी से आय में मामूली इजाफा हुआ। केबल टीवी से आय पांच साल पहले जहां 239.97 लाख रुपये थी, वहीं 2015-16 में 370.66 लाख रुपए है। वर्ष 2000 में मनोरंजन के विभिन्न मदों से 6.18 करोड़ आय थी, जो बढ़कर अब 28.96 करोड़ रुपये हो गई है।
मल्टीप्लेक्सों पर भी नोटबंदी का असर
रेव सिनेमा रुद्रपुर के प्रबंधक अक्षय मित्तल बताते हैं कि अच्छी मूवी आने के बावजूद छोटी करेंसी की किल्लत से दर्शकों की संख्या में 40 से 60 प्रतिशत तक गिरावट आई है। हालांकि इन मल्टीप्लेक्सों में स्वाइप मशीन लगने के बाद दर्शक बढ़े हैं। उन्हें उम्मीद है कि छोटे नोट आने के बाद स्थिति और सुधरेगी।
रोपवे की जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रही सरकार
रोपवे पहाड़ के हर गांव की जरूरत माने जा रहे हैं। हाल यह है कि सिर्फ नैनीताल में ही इससे सालाना 20 लाख से अधिक कमाई हो पा रही है। कुमाऊं में नैनीताल को छोड़कर कहीं भी रोपवे नहीं है, जबकि चुनावी मोड में आई सरकार कई जगहों पर रोपवे बनाने की घोषणा कर चुकी है। बता दें कि रोपवे से 2010-11 में 59.75 लाख रुपये आमदनी हुई, वहीं 2015-16 में सरकारी खजाने में 216.93 लाख रुपये ही मिले।