सरकार की बेरुखी: चिपको आंदोलन की सूत्रधार को सम्मान के नाम पर सिर्फ प्रशस्ति पत्र, बेटा बोला- धनराशि की छोड़ दी उम्मीद
पांच साल पहले वर्ष 2016 में उत्तराखंड सरकार ने उत्तराखंड रत्न की घोषणा की थी। मरणोपरांत गौरा देवी समेत नौ लोगों को उत्तराखंड रत्न के लिए चयनित किया गया था। गौरा देवी के पुत्र 78 वर्षीय चंद्र सिंह ने हर स्तर से प्रयास करने के बाद अब इस राशि के मिलने की उम्मीद भी छोड़ दी है।
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पर्यावरण संरक्षण के लिए विश्व विख्यात चिपको आंदोलन की सूत्रधार स्व. गौरा देवी को वर्ष 2016 में राज्य स्थापना दिवस पर उत्तराखंड सरकार की ओर से उत्तराखंड रत्न पुरस्कार के लिए चुना गया। उनके परिजनों को उत्तराखंड रत्न के नाम पर सिर्फ प्रशस्ति पत्र सौंपा गया, लेकिन सम्मान निधि की पांच लाख की धनराशि आज तक नहीं मिली है।
गौरा देवी के पुत्र 78 वर्षीय चंद्र सिंह ने हरस्तर से प्रयास करने के बाद अब इस राशि के मिलने की उम्मीद भी छोड़ दी है। पांच साल पहले वर्ष 2016 में उत्तराखंड सरकार ने उत्तराखंड रत्न की घोषणा की थी। मरणोपरांत गौरा देवी समेत नौ लोगों को उत्तराखंड रत्न के लिए चयनित किया गया था।
इस सम्मान में प्रशस्ति पत्र व पांच लाख एक रुपये की सम्मान राशि दी जानी थी। उत्तराखंड शासन ने सम्मान राशि देने के लिए गौरा देवी के पुत्र चंद्र सिंह से वारिस प्रमाणपत्र व मृत्यु प्रमाणपत्र की मांग की, जिस पर उन्होंने उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद को आवश्यक प्रमाणपत्र भी उपलब्ध कराए, लेकिन आज तक उन्हें सम्मान राशि का भुगतान नहीं हो पाया है।
सम्मान राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई
जब इस संबंध में ग्राम प्रधान कागा गरपक पुष्कर सिंह राणा ने बीते तीन मार्च को सूचना अधिकार के तहत उत्तराखंड शासन से सूचना मांगी तो बताया गया कि 12 जनवरी 2017 तक भी गौरा देवी के वारिसदार न मिलने के कारण सम्मान निधि की राशि उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद को लौटा दी गई और इस राशि का वितरण सामान्य प्रशासन (देहरादून जिला प्रशासन) के स्तर से भुगतान किया जाना था, लेकिन आज तक गौरा देवी के बेटे को यह राशि नहीं मिली है। गौरा देवी के बेटे चंद्र सिंह का कहना है कि जिस दिन गौरा देवी को मरणोप्रांत उत्तराखंड रत्न से सम्मानित करने के लिए उन्हें देहरादून बुलाया गया था, तो उसी दिन उनसे वारिस व मृत्यु प्रमाणपत्र की मांग क्यों नहीं की गई। कार्यक्रम संपन्न होने के एक माह बाद उन्हें पत्र के माध्यम से प्रमाणपत्र जमा करने के लिए कहा गया, उसी दौरान प्रमाणपत्र जमा करने के बाद भी सम्मान राशि का भुगतान अभी तक क्यों नहीं किया गया। हमें यह अंदेशा है कि सम्मान राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है।
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सरकार करती है उपेक्षा
जोशीमठ के रैणी गांव की गौरा देवी के इकलौते बेटे चंद्र सिंह का कहना है कि जब वे ढाई साल के थे तो पिता की मृत्यु हो गई थी। भाई और बहनों में वे अकेले हैं। मेहनत-मजदूरी कर उन्होंने अपने परिवार का लालन पालन किया। सत्तर के दशक में मां को ग्राम पंचायत ने महिला मंगल दल की अध्यक्ष बनाया। उन्होंने गांव की महिलाओं के साथ मिलकर जंगल का संरक्षण किया। इसी दौरान मां के नेतृत्व में चिपको आंदोलन को विश्व फलक पर पहचान मिली। चिपको आंदोलन की वर्षगांठ पर प्रतिवर्ष अपने संसाधनों से कार्यक्रम आयोजित किया जाता है, लेकिन सरकारों की ओर से यहां की उपेक्षा ही की जाती है। जिलाधिकारी देहरादून डॉ. आर. राजेश कुमार का कहना है कि इस मामले में तत्काल संज्ञान लिया जा रहा है। जरूरी प्रक्रिया पूरी कर जल्द ही सम्मान राशि हम सब की आदर्श विश्वविख्यात चिपको आंदोलन की सूत्रधार स्वर्गीय गौरा देवी के परिजनों को प्रदान कर दी जाएगी। यह सम्मान राशि जारी होने में इतना समय लगना वास्तव में बहुत गंभीर मसला है। यह भी जांच की जाएगी कि आखिरकार किस स्तर से यह लापरवाही हुई। इसके लिए जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी की जाएगी।