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हिमालयी जंगलों के इस जानवर के पीछे हाथ धोकर पड़ा चीन!

Wed, 02 Aug 2017 09:25 AM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 02 Aug 2017 09:25 AM IST
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Pangolin
मध्य हिमालयी क्षेत्रों में सक्रिय वन्य जीव तस्कर की मदद से अब चीन बड़े पैमाने पर पैंगोलिन का शिकार करवा रहा है। नेशनल वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो के सूत्रों का कहना है कि अधिकांश तस्कर पैंगोलिन के अंगों की सप्लाई चीन में करते हैं।


 

पैंगोलिन के शरीर के खोल से दवाएं बनाता है चीन 

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himalayan park

वन्य जीव विज्ञानियों को जंगलों में पैंगोलिन कम नजर आ रहे हैं। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजरवेशन आफ नेचर (आईयूसीएन) ने हिमालयी जंगलों में पैंगोलिन के विलुप्तप्राय होने पर चिंता जताई है। आईयूसीएन ने हिमालयी जंगलों से पैंगोलिन को विलुप्तप्राय बताया है। वन्य जीव विज्ञानियों की सर्वे टीमों को पैंगोलिन नहीं दिख रहे हैं। पैंगोलिन वन्य जीवों में सबसे अधिक तस्करी किया जाने वाला जीव है।
 

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Pangolin
उत्तराखंड समेत अन्य हिमालयी राज्यों के पास इस वन्य जीव का अभी तक कोई डाटा बेस नहीं है। इस संबंध में अभी तक सर्वे भी नहीं कराया गया। वन्य जीव विज्ञानियों का कहना है कि पैंगोलिन जंगलों से तेजी से गायब होते जा रहे हैं।

 
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डेमो पिक
सूत्रों का कहना है कि चीन पैंगोलिन के शरीर के खोल से दवाएं बनाता है और इसके मांस की डिश होटलों में परोसी जाती है। शिवालिक और हिमालय की दूसरी रेंजों में पैंगोलिन का शिकार हो रहा है। इस संबंध में कई बार वन्य जीव तस्करों के गिरोह को पकड़ा भी गया। इनसे यह खुलासा हुआ है। इसके बावजूद पैंगोलिन के शिकार पर रोक लगाने के लिए अलग से कोई कार्ययोजना तैयार नहीं की गई। प्रवर्तन निदेशालय ने तस्करों की प्रोफाइलिंग की जरूर की है, लेकिन इसके सरगना अभी तक हत्थे नहीं चढ़े।

 
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जूलोजिकल सर्वे आफ इंडिया ने दर्जन भर से अधिक वन्य जीवों का डीएनए सीक्वेंस ऑनलाइन किया है, लेकिन इसमें अभी पैंगोलिन को शामिल नहीं किया गया। सीक्वेंस होने पर यह पता चल जाता है कि अंग किस वन्य जीव का है और उसका वासस्थल किस क्षेत्र में है। वनाधिकारियों का कहना है कि सबसे अधिक फोकस बाघ, गुलदार, भालू और हाथी पर रहता है।

 
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