चीन ने बदल दी तिब्बत की तस्वीर
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चीन ने तिब्बत की तस्वीर बदल दी है। यहां बह्मपुत्र के किनारे होटल से लेकर कॉलोनियों का निर्माण किया गया है।
हम अभी अपनी सीमा तक सड़क बनाने की जद्दोजहद में ही लगे हैं पर चीन तिब्बत क्षेत्र में नागरी-ल्हासा हाईवे तैयार कर चुका है। वह चलने ही नहीं बल्कि देखने लायक भी है।
हाल में एक भारतीय दल अध्ययन करने इस मार्ग से होते हुए कैलास-मानसरोवर तक गया। वहां गए अफसरों के अनुसार इस हाईवे पर 100 से 120 किमी की रफ्तार से भी बड़ी ही आसानी से वाहन चलाया जा सकता है।
भारत की सीमा से 100 किमी दूर है तिब्बत का हाईवे
यह हाईवे भारत की सीमा से 100 किमी दूर है। कैलास के पवित्र भू-क्षेत्र संरक्षण परियोजना के तहत केंद्र सरकार, उत्तराखंड सरकार और वैज्ञानिकों का दल हाल में कैलास मानसरोवर गया था।
इस दल ने काठमांडू से सड़क और पैदल मार्ग से यात्रा की। नागरी-ल्हासा हाईवे होते हुए यह दल कैलास तक पहुंचा। यह हाईवे चीन की उच्च तकनीकी कुशलता और दूरदृष्टि को दर्शाता है।
सीमांत जनपद पिथौरागढ़ और चंपावत के लोग सड़क बनाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं, जबकि चीन तिब्बत में 100 किमी से ज्यादा तेज रफ्तार से वाहन दौड़ाने वाले हाईवे का निर्माण कर चुका है।
पार्किंग का प्रबंध भी काफी बेहतर
दल में शामिल अपर सचिव वन एवं वन संरक्षक मनोज चंद्रन बताते हैं कि हाईवे से चलकर यमद्वार नामक स्थान पर पहुंचकर वाहन की यात्रा खत्म होती है।
यहां पार्किंग का प्रबंध काफी बेहतर है, जहां दर्जनों वाहनों को आसानी से खड़ा किया जा सकता है। यमद्वार के बाद से पैदल यात्रा करनी पड़ती है।
इस साल तिब्बत में हार्स ईयर का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें लेकर देश-विदेश से करीब दस लाख लोगों के पहुंचने की संभावना है। इसके लिए प्रबंधन और सुरक्षा देखने लायक है।
इसके अलावा सीसापेंनगमा देरापुग जगह पर नए होटल का निर्माण हो रहा है। खासा नामक जगह परमार्केट है, वहां भी निर्माण कार्य जारी है। ब्रह्मपुत्र नदी (यारलूंग सांगपो) के किनारे शानदार नया सागान्यू टाउन बसा है, जिसमें बहुमंजिला इमारत बनी हुई है।