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कौन देगा MSCY के 82 लाख का हिसाब?
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 04 Aug 2016 09:16 AM IST
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मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत शुल्क के नाम पर गरीबों से करीब 82 लाख रुपये का कोई हिसाब विभाग के पास नहीं है। वहीं संशोधित योजना लागू होने के बाद अब गरीबों से कार्ड बनाने के लिए दोबारा शुल्क वसूला जा रहा है।
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प्रदेश में पिछले साल मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना लागू की गई थी। योजना के तहत करीब 10 लाख 74 हजार परिवारों को 50 हजार रुपये तक के स्वास्थ्य बीमा की सुविधा दी गई। योजना के तहत प्रत्येक परिवार का एक कार्ड बनना था। इसके लिए फॉर्म भरते समय सभी परिवारों से 30-30 रुपये शुल्क लिया गया।
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कार्ड बनने के बाद यह धनराशि जमा कर कार्ड बांटने थे। लेकिन करीब एक साल बीतने के बावजूद केवल आठ लाख परिवारों को ही कार्ड उपलब्ध कराया गया है। छूटे करीब दो लाख 74 हजार परिवारों से लिए गए करीब 82 लाख रुपये का कोई हिसाब विभाग के पास नहीं मिला। तब विभागीय अधिकारियों ने दावा किया कि दोबारा आवेदन करते वक्त उनसे पैसा नहीं लिया जाएगा।
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एक अगस्त को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पौने दो लाख रुपये के बीमा कवर के साथ संशोधित योजना की शुरूआत की। सरकार एक से 15 अगस्त तक सभी छूटे और पात्र परिवारों के कार्ड बनाने जा रही है। लेकिन पूर्व में शुल्क जमा करा चुके पात्र परिवारों से भी 50 रुपये ही वसूला जा रहा है। हालांकि विभागीय अधिकारियों ने उन्हें पुराना पैसा जल्द वापस करने का दावा किया है।
नए परिवार भी जुड़ेंगे
पहले योजना के तहत प्रदेश के 10 लाख 74 हजार परिवारों को शामिल किया गया था। अब योजना में करीब पांच लाख नए पात्र परिवारों को जोड़ा जा रहा है। इसके लिए एक से 15 अगस्त तक विशेष पंजीकरण अभियान चलाया जा रहा है। प्रत्येक पात्र परिवार को कार्ड बनाने के लिए 50 रुपए शुल्क लिया जा रहा है।
किसी भी पात्र परिवार से एमएसबीवाई कार्ड के लिए दोबारा पैसा नहीं लिया जाएगा। जिन परिवारों से पैसा लिया गया है, उन्हें वापस करवाया जाएगा। उसके बाद उन्हें कार्ड के लिए 50 रुपए शुल्क देकर दोबारा आवेदन करना होगा।
- डा. नीरज खैरवाल, स्टेट नोडल अफसर