शीतकालीन चारधाम यात्रा में आपका स्वागत है!
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उत्तराखंड के चारों धामों से देव डोलियों के शीतकाल के लिए अपने विश्राम स्थलों के लिए निकल चुकी हैं। गंगोत्री धाम की डोली मुखबा में पहुंच गई है। यमुनोत्री की डोली खरसाली और केदारधाम की डोली ऊखीमठ में पहुंच चुकी है।
डोलियों के अपने विश्राम गृह में पहुंचने के साथ इस बार उत्तराखंड सरकार की ओर से प्रस्तावित शीतकालीन चारधाम यात्रा का भी श्रीगणेश हो गया है। यात्रा चारधामों से आई डोलियों के स्थापित होने के स्थान पर होगी। विषम मौसम, खराब रास्ते और सहूलियतों की कमी आस्था की कड़ी परीक्षा लेंगे, मगर आध्यात्मिक लाभ की अनुभूति सभी कष्टों को हर लेती है।
बदरीनाथ धाम, गंगोत्री, यमुनोत्री और केदार धाम के कपाट शीतकाल में लगभग छह माह तक बंद रहते हैं। इस दौरान यात्रा पर विराम लग जाता है। शीतकाल में इन धामों की डोलियां कम ऊंचाई वाले स्थानों पर ले जाने की परंपरा है।
इस बार इन्हीं स्थानों पर चारधाम यात्रा संचालित होगी। ऋषिकेश चारो धामों तक पहुंचने का मुख्य द्वार है। देहरादून से 35 किमी दूर यह स्थान रेल, सड़क मार्ग से जुड़ा है। जौलीग्रांट (देहरादून) का हवाई अड्डा भी यहां से बहुत दूर नहीं है।
बदरीनाथ पांडुकेश्वर में, ऊखीमठ में बाबा केदार
मान्यता है कि सृष्टि के पालनकर्ता विष्णु बदरीनाथ धाम में तपस्यारत हैं। बदरीनाथ के प्रतिनिधि के तौर पर उद्धव जी की डोली पांडुकेश्वर के उद्धव मंदिर में लाई जाती है। शीतकाल में उन्हीं की पूजा-अर्चना की जाती है।
पांडुकेश्वर की ऋषिकेश से दूरी 293 किमी है। ऋषिकेश से बस का किराया प्रति यात्री साढे़ पांच सौ, जीप और टैक्सी में करीब छह सौ रुपये है। पांडुकेश्वर और जोशीमठ में ठहरने के लिए होटल और लॉज हैं।
ऊखीमठ में विराजेंगे केदार बाबा
बीते साल केदारनाथ की आपदा के बाद इस साल अपेक्षाकृत कम लोग यहां आए थे। इसलिए इस बार शीतकाल में ऊखीमठ में बाबा केदार का प्रवास बहुत अहम हो गया है।
ऋषिकेश से ऊखीमठ की सड़क मार्ग से दूरी 180 किमी है। टैक्सी में प्रति यात्री किया लगभग साढ़े तीन सौ रुपये है। ठहरने के लिए निजी होटल हैं। मंदिर परिसर में 10 कमरों का नीलकंठ भवन बनाया है, लेकिन इसमें रुकने के लिए रावल की अनुमति जरूरी है।
गंगोत्रीः मुखबा में बोलें हर-हर गंगे
24 अक्तूबर को गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने के बाद गंगोत्रीधाम से गंगा जी की भोग मूर्ति मुखबा गांव में आ गई है। मुखबा में गंगोत्री मंदिर जैसा ही मंदिर निर्मित है। मुखबा ऋषिकेश से 180 किमी सड़क मार्ग पर उत्तरकाशी में है।
देहरादून, ऋषिकेश से धराली तक पहुंचने का प्रति यात्री टैक्सी किराया करीब साढ़े चार सौ रुपये है। ऋषिकेश, देहरादून, उत्तरकाशी आदि स्थानों से टैक्सी की सुविधा उपलब्ध है। मुखबा के पास धराली एवं हर्षिल के साथ ही यात्रा मार्ग के पड़ावों पर खाने एवं ठहरने के पर्याप्त इंतजाम हैं।
खरसाली में यमुना की डोली
यमुनोत्री मंदिर के कपाट 25 अक्तूबर को बंद होंगे। इसके बाद यमुना जी की उत्सव मूर्ति शीतकाल में खरसाली में रहेगी। ऋषिकेश से खरसाली की दूरी करीब 250 किमी है। देहरादून से मसूरी, नैनबाग, बड़कोट होते हुए खरसाली की दूरी दो सौ किमी है। ऋषिकेश, देहरादून, बड़कोट आदि स्थानों से टैक्सी की सुविधा उपलब्ध है। खरसाली के पास जानकीचट्टी सहित तमाम यात्रा पड़ावों पर खाने एवं ठहरने की पर्याप्त व्यवस्थाएं मौजूद हैं।
बोले अधिकारी
शीतकालीन चार धाम यात्रा के दौरान तीर्थयात्री देवालयों के साथ ही खूबसूरत पर्यटन स्थलों का लुत्फ भी उठा सकते हैं। शीतकाल में ठंड की अधिकता के चलते तीर्थयात्री और पर्यटक अपने साथ गर्म कपडे़ और जरूरी दवाइयां भी लेकर आएं
-सोबत सिंह राणा, जिला पर्यटन अधिकारी, चमोली।