अब पूरे साल होगी चार धाम यात्रा!
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उत्तराखंड सरकार अब चार धाम यात्रा का साल भर जारी रखने पर भी विचार कर रही है।
हालांकि मुख्यमंत्री हरीश रावत का कहना है कि यह फैसला सभी संबंधित पक्षों से बातचीत के बाद ही किया जाएगा। सरकार अपनी तरफ से कोई नई परंपरा स्थापित करना नहीं चाहती।
पर चार धाम यात्रा के आर्थिक पक्ष को देखते हुए यह कोशिश की जा सकती है। रावत के मुताबिक खर्च के लिहाज से सरकार को चार धाम यात्रा के लिए लगातार ही खर्च करना होता है।
ऐसे में छह माह के बजाय साल भर की यात्रा भी शुरू की जा सकती है। पर सरकार इसके लिए कोई नई परंपरा गढऩा नहीं चाहती।
तीर्थ पुरोहितों की सहमति के बाद बढ़ेगी बात
केदारनाथ की डोली शीतकालीन विश्राम के लिए ऊखीमठ में पहुंचती है। ऐसे मे दर्शन का सिलसिला जारी रहता ही है।
रावत के मुताबिक इस पर फैसला करने से पहले वे एक बहस शुरू करना चाहते हैं। तीर्थ पुरोहितों और संबंधित पक्षों की सहमति होने के बाद ही इस पर बात आगे बढ़ाई जाएगी।
वर्तमान में चार धाम यात्रा केवल छह माह की है जो आठ माह तक खिंच जाती है। ऐसे में चार धाम यात्रा मार्ग के तमाम केंद्र एक तरह से सीजनल व्यवसाय तक सीमित हो जाते हैं।
साल भर चलेगी चार धाम यात्रा की तैयारी
चार धाम यात्रा की तैयारी अब सीजन आने पर नहीं बल्कि साल भर होगी।
मुख्यमंत्री हरीश रावत के मुताबिक अगले साल तक हर हाल में चार धाम ही नहीं बल्कि नंदा देवी और कैलाश मानसरोवर यात्रा की यात्रा व्यवस्था को पूरी तरह से पटरी पर ले आया जाएगा।
शनिवार को बीजापुर गेस्ट हाउस में मीडिया से मुखातिब मुख्यमंत्री ने चार धाम यात्रा के तहत डेढ़ लाख यात्रियों के आने का दावा किया।
रावत ने कहा कि इससे दोगुने प्रस्ताव प्रदेश सरकार के लंबित पड़े हैं। यात्रा की तैयारी को अब ठीक यात्रा शुरू होने से कुछ समय पहले की बजाय पूरे साल भर जारी रखा जाएगा।
केदारधाम निर्माण के लिए दूसरा चरण शुरू
मुख्यमंत्री के मुताबिक केदारधाम निर्माण के लिए अब दूसरा चरण शुरू कर दिया गया है। केदार मंदिर का काम पूरी तरह से एएसआई के ही पास है और सरकार कोई हस्तक्षेप करने नहीं जा रही है।
केदार के पैदल मार्ग के लिए नए वैकल्पिक मार्ग को तलाश करने का जिम्मा वन विभाग को सौंपा जा चुका है। गौरकुंड से रामबाड़ा तक के पैदल मार्ग में ढाल को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
इसी तरह रामबाड़ा से लिंचौली तक रोपवे बनाया जाएगा। रोपवे का काम भी जल्द ही शुरू होगा। लिंचौली से केदारधाम बेस तक इलेक्ट्रिक कार की व्यवस्था की जाएगी।
सरकार की कोशिश है कि पूरी केदारयात्रा का संचालय वैष्णों देवी की तर्ज पर हो। लिंचौली और अन्य स्थानों पर छोटे बाजार विकसित किए जाएंगे।
मोटर मार्ग पर भी सरकार कर रही विचार
केदार के लिए मोटर मार्ग पर भी सरकार विचार कर रही है। पर इसमें पर्यावरण का ध्यान रखा जाएगा। पर्यावरण के लिहाज से अगर जरूरी हुआ तो हैली सेवा लिंचौली तक ही रहेगी।
रावत ने कहा कि केदार धाम में किसी भी निर्माण में जीएसआई की रिपोर्ट की अनदेखी नहीं होगी। बल्कि जीएसआई से एक बार और सरकार रिपोर्ट मांगेगी ताकि किसी तरह की संशय न रहे।
रावत ने यह भी स्पष्ट किया कि केदारधाम में अति जर्जर भवनों को गिराया जाएगा। पहले डेनेज प्लान तैयार होगा और इसके बाद ही भवन आदि बनाए जांएगे। पुरानी केदारपुरी में कोई भी काम शुरू करने से पहले जीएसआई की राय ली जाएगी।
अभी चार करोड़ की और दरकार
- रावत के मुताबिक केदारघाटी और अन्य स्थानों में पुनर्निर्माण के लिए केंद्र से 7000 करोड़ रुपए मिले हैं। अभी कम से कम से चार हजार करोड़ रुपए की ओर दरकार है। रावत के मुताबिक इसके लिए वे प्रधानमंत्री मोदी से गुजारिश भी करेंगे।
गुप्तकाशी-मयाली मोटर मार्ग भी तैयार
- जून 2013 की आपदा में लाइन लाइन बने 72 किलोमीटर लंबे गुप्तकाशी-मयाली मोटरमार्ग का काम भी पूरा हो गया है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक पूरी सड़क को ब्लैक टॉप कर दिया गया। जून 2013 में जब सारेरास्ते बंद हो गए थे तो इसी रास्ते से फंसे हुए यात्रियों को निकाला गया है।