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धरातल पर नहीं उतर पाई चारधाम यात्री रजिस्ट्रेशन-ट्रांजिट कैंप योजना

Fri, 21 Apr 2017 04:28 PM IST
हेमवती नंदन भट्ट/ अमर उजाला, ऋषिकेश
हेमवती नंदन भट्ट/ अमर उजाला, ऋषिकेश Updated Fri, 21 Apr 2017 04:28 PM IST
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char dham pilgrimage registration transit camp yojana
चार धाम - फोटो : file photo

उत्तराखंड सरकार सूबे में तीर्थाटन व पर्यटन को बढ़ावा तो देना चाहती है, लेकिन बिना धेला खर्च किए। राजस्व अर्जित करने की इस नीति में देश-दुनिया से यहां आने वाले पर्यटकों व तीर्थाटकों को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

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013 की जल प्रलय में हजारों तीर्थयात्रियों, सैलानियों के जान गंवाने के बावजूद सरकार उनकी सुरक्षा व सुविधाओं को लेकर गंभीर नहीं है। चार साल से प्रस्तावित यात्री रजिस्ट्रेशन-ट्रांजिट कैंप योजना इसकी तस्दीक करती है। लगभग 14 करोड़ की लागत से बनने वाली महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए टीएचडीसी की ओर से भी सात करोड़ की धनराशि उपलब्ध कराई जानी थी। बावजूद इसके सरकार योजना में दिलचस्पी नहीं ले रही। 
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गौरतलब है कि 16/17 जून-2013 में उत्तराखंड में आई जल प्रलय में विभिन्न यात्रा मार्गों और धामों में हजारों लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। यात्राकाल में भारी जन धन हानि होने के बाद पर्यटन विभाग की ओर से चारोंधामों की यात्रा संचालन के प्रमुख केंद्र तीर्थनगरी ऋषिकेश में यात्री ट्रांजिट/रजिस्ट्रेशन कैंप स्थापित करने का निर्णय लिया था। योजना के लिए चारधाम यात्रा बस ट्रांजिट कंपाउंड के समीप स्थापित करने के लिए वन विभाग से 3.70 हेक्टेयर वनभूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन राज्य सरकार के स्तर से आज तक मंजूरी नहीं मिल सकी है। यह आलम तब है जब टीएचडीसी योजना पर आने वाली लागत का आधा बजट उपलब्ध कराने को तैयार है। 
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यह मिलनी थीं सुविधाएं 
यात्री ट्रांजिट कैंप से श्रीबदरीनाथ, केदारनाथ, यमुनोत्री, गंगोत्री और हेमकुंड धाम की यात्रा की मॉनिटरिंग की जानी थी। साथ ही चारधाम जाने वाले तीर्थयात्रियों के स्वास्थ्य परीक्षण को चिकित्सक दल की तैनाती की जानी थी। इसी कैंप में यात्रियों के साथ ही यात्रा पर जाने वाले वाहनों का जीपीएस सिस्टम से लैस बायोमीट्रिक रजिस्ट्रेशन किया जाना था। इस सिस्टम से यात्राकाल में वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने के समय मदद मिलनी थी, साथ ही तीर्थाटकों को यात्रा मार्गों में किसी भी प्रकार की सहायता की जरूरत पड़ने पर इस प्रणाली की मदद ली जानी थी। 


प्रस्तावित यात्री ट्रांजिट/रजिस्ट्रेशन कैंप योजना यात्रा की बेहतर मॉनिटरिंग के साथ ही यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर बनाई गई है। इसके लिए वन विभाग से पर्यटन को भूमि उपलब्ध होने वाली है। इसके बाद योजना को वित्तीय मंजूरी मिलने पर मूर्तरूप दिया जाएगा।
- सीमा नौटियाल, जिला पर्यटन अधिकारी, देहरादून

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