दिल्ली एनसीआर में डेढ़ महीने में पांच भूकंप किसी बड़े खतरे का संकेत तो नहीं, वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी
- सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) रुड़की के वैज्ञानिकों ने दिल्ली एनसीआर में भूकंपीय फॉल्ट होने से एहतियात बरतने की चेतावनी दी
- टेक्टोनिक प्लेटों के बीच घर्षण से भूगर्भ में संरक्षित ऊर्जा भूकंप के रूप में आ रही है बाहर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दिल्ली एनसीआर में बीते डेढ़ महीने के अंदर आए पांच भूकंप ने वैज्ञानिकों को चिंता में डाल दिया है। सिस्मिक रिस्क जोन चार में शामिल दिल्ली से होकर गुजरने वाले भूकंपीय फॉल्ट भी बड़े खतरे का कारण हैं, क्योंकि मई में आए दो भूकंप का केंद्र नई दिल्ली के उत्तर में और 29 मई को आए तीसरे भूकंप का केंद्र रोहतक, हरियाणा में था। यही नहीं, दिल्ली से होकर गुजर रहे सिस्मिक फॉल्ट में भूकंप का लंबा इतिहास भी रहा है।
सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) रुड़की के वैज्ञानिकों का कहना है कि टेक्टोनिक प्लेटों के बीच हो रहे घर्षण से जो ऊर्जा निकल रही है, उसे चेतावनी मानकर भविष्य के लिए एहतियाती कदम उठाने जरूरी हैं। वैसे तो पांच मैग्नीट्यूड से कम क्षमता के भूकंप को खतरा नहीं माना जाता है, लेकिन दिल्ली एनसीआर में जिस तरह से कम अंतराल में छोटे-छोटे भूकंप आ रहे हैं, ऐसे में वैज्ञानिकों के सामने यह एक बड़ा सवाल है कि कहीं ये किसी बड़े खतरे का संकेत तो नहीं।
भूकंप की पूर्व भविष्यवाणी संभव नहीं
सीबीआरआई के वैज्ञानिक डॉ. अजय चौरसिया ने बताया कि भूकंप की पूर्व भविष्यवाणी संभव नहीं है, लेकिन डेढ़ महीने में दिल्ली एनसीआर में आए पांच भूकंप सावधान करने के लिए काफी हैं। उन्होंने बताया कि ये भूकंप उत्तर-पूर्व और उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में आए हैं। दिल्ली के हाई सिस्मिक जोन चार में होने के साथ ही यहां सोहना, दिल्ली-मुरादाबाद, मथुरा और दिल्ली-हरिद्वार सिस्मिक फॉल्ट भी हैं।
इन फॉल्ट और इसके आसपास भूकंप का लंबा इतिहास है। 29 मई को 4.6 तीव्रता का जो भूकंप आया है, उसका केंद्र रोहतक में था। इस जगह भूगर्भ में बना फॉल्ट भी समय-समय पर सक्रिय रहा है। उन्होंने बताया कि छोटे भूकंप इस बात के संकेत हैं कि भूगर्भ में ऊर्जा संरक्षित हो रही है और धीरे-धीरे भूकंप के रूप में निकल भी रही है, लेकिन यह एनर्जी कब बड़ी मात्रा में निकल जाए, इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। ऐसे में यह महत्वपूर्ण समय है कि आपदा न्यूनीकरण के सभी उपायों को तत्काल अमल में लाया जाए।
दिल्ली एनसीआर में डेढ़ माह में आए भूकंप
12 अप्रैल - 3.5 मैग्नीट्यूड
13 अप्रैल - 2.7 मैग्नीट्यूड
10 मई - 3.4 मैग्नीट्यूड
15 मई - 2.2 मैग्नीट्यूड
29 मई - 4.6 मैग्नीट्यूड