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एनएच घोटाले में बड़ा खुलासा, केंद्र सरकार नहीं चाहती तीन सौ करोड़ के घोटाले की सीबीआई जांच

Tue, 23 May 2017 09:29 AM IST
संजय त्रिपाठी/ अमर उजाला, देहरादून
संजय त्रिपाठी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 23 May 2017 09:29 AM IST
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center govt do not favour of cbi investigation in NH 74 Scam
trivendra singh rawat

सरकार बनते ही त्रिवेंद्र सरकार ने भ्रष्टाचार पर जिस जीरो टॉलरेंस का हवाला देते हुए एनएच-74 घोटाले की सीबीआई जांच की सिफारिश की थी, उस पर खुद केंद्र सरकार को आपत्ति है। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को पत्र लिखकर इस मामले में दर्ज एफआईआर और सीबीआई जांच के फैसले पर चिंता जताई है।

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गडकरी ने लिखा है कि इस प्रकार के फैसलों से सरकारी अधिकारियों के मनोबल पर विपरीत असर पड़ता है। साथ ही योजनाओं के निर्बाध संचालन में भी बाधा उत्पन्न होती है।
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अमर उजाला को खबर मिली है कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को पत्र भेजा है। इस पत्र में कहा गया है कि सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्रालय उत्तराखंड में सड़कों के विकास के लिए लगातार प्रयासरत है। इसमें भी खासतौर पर चारधाम रोड कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट का जिक्र किया गया है।
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नितिन गडकरी के मुताबिक वे हाल ही में प्रदेश में एनएच घोटाले में मुआवजा वितरण में हुई धांधली को लेकर बीते दिनों न केवल ऊधमसिंह नगर में दर्ज की गई एफआईआर बल्कि मामले की सीबीआई जांच के लिए राज्य सरकार के आदेश से खासे चिंतित हैं। इस मामले में एनएचआई अधिकारी जांच के घेरे में हैं।

गडकरी की चिट्ठी में चेतावनी

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nitin gadkari

केंद्रीय मंत्री ने साफ तौर पर लिखा है कि उत्तराखंड सरकार की इस प्रकार की कार्रवाई अधिकारियों के मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है, जिससे परियोजनाओं के निष्पादन में बाधा उत्पन्न होती है। उन्होंने चेतावनी भरे शब्दों में यह भी कहा कि सरकार के इन फैसलों से पैदा हुए माहौल में उत्तराखंड में और अधिक परियोजनाओं को लाने के बारे में पुनर्विचार करना पड़ेगा।

नितिन गडकरी ने मुख्यमंत्री से सीबीआई जांच के मुद्दे पर तत्काल सुधारात्मक कदम उठाते हुए मौजूदा गतिरोध को समाप्त करने की बात भी कही है।

गौरतलब है कि भारी बहुमत से सरकार बनाने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाने के संकेत देते हुए तीन सौ करोड़ से ज्यादा के एनएच घोटाले की जांच सीबीआई से कराने का एलान किया था। इसके तत्काल बाद सीबीआई जांच की सिफारिश की गई।

महीना भर बीत जाने के बावजूद सीबीआई की ओर से कोई जवाब न आने के चलते मुख्यमंत्री ने रिमाइंडर भी भेजा था। इधर, दो दिन पहले कबीना मंत्री मदन कौशिक ने भी इस मुद्दे पर पत्रकार वार्ता में कहा कि जल्द ही तीसरा रिमाइंडर भेजेंगे। उन्होंने हर हाल में जांच सीबीआई से करवाने का भी दावा किया। 

यह है एनएच-74 घोटाला

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demo pic - फोटो : अमर उजाला

पश्चिमी यूपी से उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-74 के चौड़ीकरण कार्य के लिए बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण की कवायद की गई थी। करीब चार वर्ष तक चले इस अधिग्रहण में कुछ शिकायतों के बाद जांच हुई तो पता चला कि ज्यादातर कृषि भूमि को बैकडेट में अकृषि दिखाकर मुआवजे की राशि को कई गुना बढ़ा दिया गया।

कुमाऊं कमिश्नर की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाकर जांच की गई तो संबंधित तहसीलों में तीन सौ करोड़ से ज्यादा का घपला प्रारंभिक जांच में ही पुख्ता हो गया। कमेटी ने विस्तृत जांच की सिफारिश भी की। इस मामले में कई अधिकारियों को निलंबित भी किया जा चुका है। कुमाऊं क्षेत्र के दो प्रमुख भाजपा नेताओं की संलिप्तता की चर्चा भी खुले तौर पर इसमें सामने आने की बात कही जा रही है।

कुछ ऐसा रहा घटनाक्रम
- एक मार्च को कमिश्नर कुमाऊं डी. सेंथिल पांडियन ने प्रेस कांफ्रेंस में किया 118 करोड़ के घोटाले का खुलासा।
 - नौ मार्च को कमिश्नर की अध्यक्षता में सचिव राजस्व, एडीएम और पीडब्ल्यूडी चीफ इंजीनियर की कमेटी को सौंपी जांच।
- 11 मार्च को डीएम के आदेश पर पंतनगर की सिडकुल चौकी में सौ से अधिक लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
- 15 मार्च को घोटाले के आरोपी और ऊधमसिंह नगर के विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी डीपी सिंह को पद से हटाया गया।
- 16 मार्च को कमिश्नर की अध्यक्षता वाली कमेटी ने मुख्य सचिव से मुलाकात करके उन्हें अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी।
- 18 मार्च को घोटाले से जुड़ी तमाम फाइलें सितारगंज, बाजपुर, जसपुर और गदरपुर तहसीलों से गायब कर दी गईं।
- 22 मार्च को कमिश्नर ने एसएलएओ आफिस से सभी फाइलों को मंगाकर कोषागार के डबल लाक में सुरक्षित करवाईं।
- 23 मार्च को एसएसपी ऊधमसिंह नगर के निर्देशन में जांच के लिए विशेष अनुसंधान दल (एसआईटी) का गठन हुआ।
- 25 मार्च को छह पीसीएस अफसरों को निलंबित कर दिया गया और प्रकरण की सीबीआई जांच की सिफारिश की गई।

कैबिनेट मंत्री और सरकार के प्रवक्ता मदन कौशिक ने कहा कि सीबीआई को दो रिमाइंडर भेजे हैं। जल्द ही तीसरा भेजने की तैयारी हो रही है। केंद्र से किसी प्रकार का कोई दबाव नहीं है। केंद्रीय मंत्री के पत्र की मुझे कोई जानकारी नहीं है। सरकार के स्तर पर कोई हीलाहवाली नहीं है और राज्य की सिफारिश है तो केंद्र को क्या आपत्ति होगी? घपले के किसी आरोपी को नहीं बख्शेंगे। उम्मीद है जल्द ही मामला टेकअप हो जाएगा।

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