गंगा से जुड़ी परियोजनाओं पर सीबीआई जांच की तलवार

ब्यूरो / अमर उजाला, नई दिल्ली/देहरादून Updated Fri, 17 Feb 2017 11:52 AM IST
cbi investigation on ganga projects
NGT
गंगा सफाई मामले पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सख्ती लगातार कायम है।
एनजीटी की प्रधान पीठ ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि अभी तो सिर्फ गढ़ मुक्तेश्वर में एक छोटी और सीमित परियोजना की ही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच का आदेश दिया गया है। लेकिन जरूरत महसूस हुई तो हरिद्वार की सीमा से उन्नाव तक गंगा से जुड़ी समूची परियोजनाओं की सीबीआई जांच कराई जा सकती है।

पीठ ने प्राधिकरणों से हरिद्वार से उन्नाव तक गंगा से सीधे जुड़ने वाले 30 प्रमुख नालों के बारे में सही तथ्य और जानकारी देने को कहा है। पीठ ने सख्त लहजे में प्राधिकरणों को चेताया है कि वे महीनों सिर्फ नाले से जुड़े मुद्दे पर अपना समय बर्बाद नहीं कर सकते।

जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ एमसी मेहता मामले पर लगातार सुनवाई कर रही है। हालांकि डूब क्षेत्र व अन्य मुद्दों पर एनजीटी ने कहा है कि 10 दिसंबर, 2015 को उत्तराखंड में गंगा से संबंधित पहले चरण का जो फैसला दिया गया था, वह सभी गंगा क्षेत्रों पर लागू होगा। सुनवाई के दौरान पीठ ने उत्तर प्रदेश जल निगम के अभियंताओं को खूब फटकार लगाई। 

रामगंगा और पूर्व काली नदी में प्रदूषण को लेकर भी आदेश
30 प्रमुख नालों पर एसटीपी लगाने और शुगर, टेक्सटाइल, पेपर व पल्प जैसी खतरनाक औद्योगिक इकाइयों के प्रदूषण पर रोकथाम के लिए भी एनजीटी ने आदेश दिया है।

पीठ ने कहा कि प्राधिकरण बताएं कि रामगंगा और पूर्व काली नदी में इन औद्योगिक इकाइयों के प्रदूषण के रोकथाम का क्या खाका है। वहीं जाजमऊ, बंथर में प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों को लेकर भी पीठ ने कड़े लहजे में कहा है कि वे तैयार रहें। मामले पर शुक्रवार को भी सुनवाई जारी रहेगी। 

परियोजना के नाम पर धन की बर्बादी
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 6 फरवरी को भी कड़ी टिप्पणी की थी कि गंगा नदी की एक बूंद भी अब तक साफ  नहीं हो सकी है। साथ ही गंगा की सफाई के लिए परियोजना के नाम पर जनता के धन की बर्बादी को लेकर सरकारी एजेंसियों की आलोचना की थी।

एनजीटी ने सरकारी एजेंसियों से पूछा था कि वे किस प्रकार से प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी नमामि गंगे परियोजना को लागू कर रहे हैं। एनजीटी प्रमुख न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने गंगा नदी को साफ  करने की योजना पर एकसाथ काम करने का भी सभी एजेंसियों को निर्देश दिया था।

एक जगह बताएं जहां गंगा साफ है
एनजीटी ने पहले ही तल्ख टिप्पणी करते हुए उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार से पूछ चुकी है कि वह गंगा नदी के 2500 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में कोई एक जगह बताये जहां गंगा साफ है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने एनजीटी से गंगा को प्रदूषित कर रहीं औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ  कार्रवाई करने को कहा था।

बहरहाल न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली एनजीटी की पीठ ने अपनी टिप्पणी में कहा कि 5000 करोड़ रुपये से अधिक धनराशि खर्च करने के बाद भी गंगा की हालत बद से बदतर होती जा रही है। गंगा सफाई के प्रति सरकार के सुस्त रवैये की आलोचना करते हुए एनजीटी ने कहा कि गंगा की सफाई के सिलसिले में कुछ भी होता हुआ नहीं दिख रहा है।

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