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देहरादून: एमईएस में कर्मचारियों की फर्जी हाजिरी, 18.43 लाख का भुगतान, तीन ठेकों में गड़बड़ी, सीबीआई ने की FIR

Fri, 02 Oct 2026 03:24 PM IST
Renu Saklani माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Fri, 02 Oct 2026 03:24 PM IST
सार

तीन अलग-अलग ठेकों में जिन कर्मचारियों की तैनाती होनी थी, उनकी मौजूदगी को लेकर सवाल उठे हैं। जांच में बिना निर्धारित तैनाती के उपस्थिति दर्ज कर सरकारी भुगतान लेने का आरोप सामने आया है।

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CBI FIR in MES outsourcing scam 18.43 lakh payment alleged for fake attendance six named Dehradun News
केस दर्ज - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

रक्षा मंत्रालय की सैन्य इंजीनियरिंग सेवा (एमईएस) में आउटसोर्स कर्मचारियों की तैनाती के नाम पर कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा देहरादून ने तीन ठेकों में निर्धारित कर्मचारियों की तैनाती नहीं होने के बावजूद उपस्थिति दर्ज कराकर भुगतान लेने के आरोप में दो सरकारी अधिकारियों, तीन ठेकेदारों और एक अन्य समेत अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।

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प्रारंभिक जांच में सरकारी खजाने को 18,43,334 रुपये का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है। सीबीआई की प्राथमिकी के मुताबिक मामला रायपुर रोड स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के इंस्ट्रूमेंट्स एंड रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (आईआरडीई) परिसर में वर्ष 2025-26 के दौरान कर्मचारियों की तैनाती से जुड़ा है। जेम के तीन अनुबंधों के तहत प्रतिबंधित क्षेत्र में कर्मचारियों को काम करना था लेकिन जांच में निर्धारित संख्या से कम कर्मचारियों के पहुंचने की बात सामने आई।

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जांच के अनुसार एचआर एंटरप्राइजेज के अनुबंध में 12 कर्मचारियों की तैनाती होनी थी, जिनमें दो कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं पहुंचे। कनिष्का ग्लोबल सर्विसेज के अनुबंध में 11 कर्मचारी तैनात किए जाने थे लेकिन किसी कर्मचारी के संबंधित प्रतिबंधित क्षेत्र में काम करने का रिकॉर्ड नहीं मिला। एयरस्टेक इंडिया के अनुबंध में 10 कर्मचारियों में से दो के अनुपस्थित रहने की बात सामने आई है।

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आरोप है कि एमईएस के सहायक गैरीसन इंजीनियर साकेत कुमार और जूनियर इंजीनियर वीरेंद्र सिंह रावत ने अनुपस्थित कर्मचारियों को उपस्थिति रजिस्टर में मौजूद दर्शाया। इसके आधार पर ठेकेदारों के बिल पास हुए। बालकृष्ण छेत्री पर भी भुगतान प्रक्रिया में मदद करने का आरोप है।

 

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