125 स्कूल 'बंद' कर शिक्षकों ने किया कुछ ऐसा पीछे लगी पुलिस
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उत्तराखंड के हरिद्वार में 125 स्कूलों पर रानीपुर कोतवाली में एक साथ मुकदमा दर्ज कर दिया गया है।
शिक्षा महानिदेशक डी सेंथिल पांडियन के आदेश पर जिले के बीआरसी और सीआरसी समन्वयकों को हटाए जाने और शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अशोक चौहान को निलंबित करने के विरोध में प्राथमिक विद्यालयों पर तालाबंदी करने के मामले में जिलाध्यक्ष अशोक चौहान समेत 125 प्राथमिक विद्यालयों के खिलाफ कोतवाली रानीपुर में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
कुल कितने शिक्षक इस मुकदमे की जद में आएंगे उन्हें चिह्नित किया जा रहा है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी हे।
जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक रामेंद्र कुशवाहा की ओर से शनिवार देर रात रानीपुर कोतवाली में दर्ज कराए गए मुकदमे में प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष व बहादराबाद के बीआरसी समन्वयक अशोक चौहान पर प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों को स्कूलों में तालाबंदी करने और मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने के लिए इकट्ठे होने के लिए प्रेरित करने का आरोप लगाया गया है।
जिससे स्कूलों में पठन पाठन का काम प्रभावित हुआ।
अशोक चौहान अलीपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक भी हैं जो बीआरसी समन्वयक के रुप में बहादराबाद में तैनात थे। जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक रामेंद्र कुशवाहा ने बताया कि स्कूलों में तालाबंदी कराने में जिले के 125 स्कूलों के शिक्षक प्रथम दृष्टया संलिप्त पाए गए हैं।
इन सभी ने शनिवार को संघ के नेताओं के उकसावे पर अपने स्कूल बंद रखे थे । इन सभी को भी एफआईआर में शामिल किया गया है। शिक्षकों की कुल संख्या कितनी है इसे अभी चिह्नित किया जा रहा है।
यह भी पाई गई है शिकायत
अलीपुर के प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक अशोक चौहान के खिलाफ जांच में सात अन्य आरोप भी पाए गए है। जिनमें खंड शिक्षा अधिकारी की मोहर पर अपने हस्ताक्षर कर सीआरसी की नियुक्ति का कार्य किया। संबंधी प्रकरण प्रक्रिया में भी कई शिक्षकों को अन्य स्कूलों में संबद्घ किया गया।
बीआरसी कक्ष में बिना अनुमति के शिक्षक संघ के कार्यालय का संचालन किया जा रहा है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत होने वाले कार्य में व्यक्तिगत रूप से कार्य कराए गए। सहायक अध्यापक जूनियर हाईस्कूल में पदोन्नति के फलस्वरूप कार्यभार ग्रहण करने व वेतन आहरण करने के उपरांत कूट रचना कर प्रधानाध्यापक प्राथमिक विद्यालय पद पर कार्य किया जा रहा है।
साथ ही उक्त पद का वेतन भी लिया जा रहा है। स्कूल में तैनात महिला शिक्षकों के साथ गलत व्यवहार करने में महिला आयोग में जांच, बीआरसी के दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन नहीं करने का भी मामला है। इस सभी आरोपों की जांच में जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक ने 15 दिन के अंदर लिखित में अपना पक्ष रखने को कहा है।