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मुकदमों के तो रिकॉर्ड, सजा का नहीं हिसाब

Tue, 10 Jan 2017 12:55 PM IST
राकेश शर्मा/ अमर उजाला, देहरादून
राकेश शर्मा/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 10 Jan 2017 12:55 PM IST
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case file in the time of election but no punishment
court

विधानसभा चुनावों के दौरान जिस तेजी से मुकदमे दर्ज होते हैं, उतनी तेजी से पुलिस इन्हें भूल भी जाती है।

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मसलन 2012 के विधानसभा और 2014 के लोकसभा चुनावों में झगड़ों और आचार संहिता उल्लंघन के करीब 107 मुकदमे दर्ज हुए थे। इनमें से 34 मुकदमों का निस्तारण अदालतों में हुआ, लेकिन पुलिस को इन मामलों में हुए फैसलों की जानकारी तक नहीं है।

जबकि, मुकदमों की प्रगति पर नजर करने के लिए हर थाने में एक पैरोकार होता है। अदालतों के फैसलों को आधार बनाकर पुलिस राजनीतिज्ञों पर आचार संहिता का अनुपालन कराने में दबाव बना सकती थी। इसके अलावा 33 मुकदमों में पुलिस ने एफआर लगाकर पल्ला झाड़ लिया।
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चुनाव की घोषणा के साथ ही पुलिस पुराने चुनावी मुकदमों के रिकार्ड खंगाल कर अपनी रणनीति तैयार कर रही है। पुलिस के पास 2012 विधानसभा चुनाव में हुए मुकदमों का हिसाब तो है, लेकिन यह पता लगाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई गई कि अदालतों से निस्तारित मुकदमों में आरोपियों को राहत मिली है या किसी तरह का जुर्माना अथवा सजा हुई। 2014 चुनावों के दस मुकदमे अभी विचाराधीन है।
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2012 के विधानसभा चुनाव में दर्ज मुकदमे
मुकदमे - चार्जशीट - एफआर - निस्तारित - लंबित
72 - 49 - 23 - 29 - 20

2014 के लोकसभा चुनाव के मुकदमे
मुकदमे - चार्जशीट - एफआर - निस्तारित - लंबित
30 - 20 - 10 - 00 - 10          

पुलिस के लिए इस बार बड़ी है चुनौती
चुनाव आयोग द्वारा उत्तराखंड में 15 फरवरी को होने वाला चुनाव इस बार पहले के मुकाबले ज्यादा संवेदनशील है, क्योंकि 2016 में हरीश रावत सरकार के बदलाव की लड़ाई ने कांग्रेस और भाजपा में कड़वाहट बढ़ा दी है। खासतौर से उन दस विधानसभा सीटों पर ज्यादा नूरा कुश्ती की आशंका है, जहां के कांग्रेस विधायक पाला बदलकर भाजपा में शामिल हुए। यही वजह है कि 70 में 43 विधानसभाओं को इस बार संवेदनशील की श्रेणी में रखा गया है। इनमें मैदानी जिलों ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार और देहरादून को ज्यादा संवेदनशील माना गया है।


प्रदेश में इस बार चुनावी संवेदनशीलता बढ़ी है। इस लिहाज से पुलिस तैयारियां कर रही है। पूर्व के चुनावों में हुए झगड़ों के मद्देनजर पहले से ही दोनों पक्षों के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई करने के साथ अवांछनीय तत्वों को जिला बदर और गुंडा एक्ट में निरुद्ध किया जा रहा है। निस्तारित मुकदमों में हुए फैसलों का भी पता लगाया जा रहा है। पुलिस निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव कराने के लिए कृत संकल्प है।  
- राम सिंह मीणा, अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था

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