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अफसरों ने तोड़ा इन बॉक्सरों का सपना
अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 19 Dec 2013 11:51 AM IST
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उत्तराखंड में ब्लॉक स्तर पर स्वर्ण पदक कब्जाने के बाद खटीमा के दो युवा बॉक्सर राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के रिंग तक तो पहुंचे, लेकिन सिस्टम से हार गए।
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बिना खेले लौटना पड़ा
अफसरों की लापरवाही के चलते दोनों को बिना खेले लौटना पड़ा। खिलाड़ियों संग हुए इस खेल से पायका अधिकारी पल्ला झाड़ रहे हैं। परेड ग्राउंड स्थित बाक्सिंग रिंग में बुधवार को राज्य स्तरीय स्वामी विवेकानंद ग्रामीण खेलकूद प्रतियोगिता के बॉक्सिंग मुकाबले हुए।
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दोपहर करीब सवा एक बजे कमलेश सिंह बोरा और नईम इस्लाम मायूस घूमते नजर आए। पूछने पर पता चला दोनों खटीमा के ग्रामीण क्षेत्रों से हैं। वे प्रतियोगिता में पदक हासिल करने का सपना लिए यहां पहुंचे थे। लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला।
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झनकट गांव के कमलेश ने बताया कि ब्लॉक स्तर पर उन्होंने 50 किलो भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था। कहा गया था कि जिला स्तर पर प्रतियोगिता नहीं होगी, सीधे राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में बुलाया जाएगा।
अपने खर्चे पर आए थे दून
मंगलवार शाम करीब साढ़े 4 बजे टूर्नामेंट की जानकारी मिली, लेकिन यहां उनके पहुंचने तक खिलाड़ियों का वेट हो चुका था, तो प्रवेश नहीं मिला। भूड़मोलया गांव के नईम इस्लाम ब्लॉक स्तर पर 52 किलो भार वर्ग के स्वर्ण पदक विजेता हैं। वह भी नहीं खेल सके।
दोनों खिलाड़ी ज्यूरी के मुख्य सदस्य अर्जुन अवार्डी पूर्व बॉक्सर पद्म बहादुर मल्ल से भी मिले, लेकिन दोनों के भार वर्ग के मैच हो जाने के कारण वह मदद नहीं कर सके। दोनों खिलाड़ी शाम को घर लौट गए। दोनों अपने खर्चे पर दून आए थे।
मेरे संज्ञान में मामला आया है। इस संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। अगर मामला सही पाया गया तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- आरसी डिमरी, उप निदेशक, युवा कल्याण