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खाना तो दूर खिलाड़ियों को पानी तक नहीं नसीब

Fri, 08 Nov 2013 12:06 PM IST
अमर उजाला, हरिद्वार
अमर उजाला, हरिद्वार Updated Fri, 08 Nov 2013 12:06 PM IST
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carelessness of education department

शिक्षा विभाग खेल प्रतिभाएं कैसे गढ़ रहा है, इसका नमूना गुरुवार को हरिद्वार के भेल स्टेडियम में देखने को मिला। जिलास्तरीय विद्यालयी खेल प्रतियोगिता में एक बार फिर खिलाड़ियों से खेल किया गया।

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पानी तक मयस्सर नहीं

किसी तरह अपना किराया देकर ब्लॉकों के 600 चैंपियन खिलाड़ी आयोजन स्थल तक सुबह पहुंच गए, लेकिन न उन्हें नाश्ता मिला, न ही खाना। और तो और, खिलाड़ियों को पानी तक मयस्सर नहीं हुआ। ऐसे में भूखे-प्यासे खिलाड़ी कैसे दौड़े-खेले होंगे आसानी से समझा जा सकता है।
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हद तो यह रही कि बालिका वर्ग के खिलाड़ियों के लिए शौचालय तक की व्यवस्था नहीं थी। गुरुवार से भेल स्टेडियम में तीन दिनी जिला खेल प्रतियोगिता का आगाज हुआ।

प्रतिभाग कर रहे हैं 600 खिलाड़ी
इसमें 84 प्रतियोगिताएं कराई जा रही हैं। जिसमें जिले के सभी छह ब्लॉकों (बहादराबाद, खानपुर, लक्सर, नारसन, रुड़की, भगवानपुर) के प्राथमिक, जूनियर, उच्चतर माध्यमिक और माध्यमिक स्कूलों के करीब 600 खिलाड़ी प्रतिभाग कर रहे हैं।

तस्वीरों में देखें,
मां गंगा की भक्ति में डूबे प्रिंस चार्ल्स

उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि एचआर भेल अनिल कपूर ने मार्च पास्ट की सलामी ली। इस दौरान श्याम कुमार यादव, सुरेंद्र कुमार, ओडी शर्मा, दिनेश वर्मा, राजीव राठी, नरेंद्र कुमार और मनोज कुमार आदि उपस्थित रहे।

बोले खिलाड़ी

अपना पैसा खर्च करके यहां पहुंचा हूं। स्कूल या विभाग की ओर से किराए आदि की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। स्टेडियम में न सुबह नाश्ता मिला न दोपहर में खाना मिला।
- अंकित कुमार, छात्र, भारापुर भौंरी स्कूल

बस मैं बैठकर अपने साथी खिलाड़ी के साथ स्टेडियम पहुंचा। स्कूल के शिक्षक हमारे साथ नहीं आए। हमें कोई किराया नहीं दिया गया अपना पैसा खर्च कर यहां पहुंचा हूं।
- अशोक कुमार, छात्र, डीएवी स्कूल रुड़की

अपने 40 रुपए खर्च करके पहुंचा हूं। यहां आने के बाद भूखा प्यासा हूं। खाने-पीने में भी अपने पैसे खर्च करने पड़ेंगे। यहां विभाग की ओर से कोई प्रबंध नहीं किया गया है।

- अरुण कुमार, छात्र, केएलडीएवी रुड़की

अभी-अभी दौड़ लगाकर आई हूं। सुबह से खाने पीने के लिए कुछ नहीं दिया गया। स्कूल से मैडम हमें बस में लेकर यहां लेकर पहुंचीं। भूख प्यास से दम निकला जा रहा है।
- मोनिका, छात्रा, एसडीपीसी रुड़की

अपने घर से चाय पीकर आई थी। दोपहर हो गई अभी तक खिलाना तो दूर, चाय या पानी तक नहीं मिला है। भूखे प्यासे दौड़ने में चक्कर आ सकते हैं।
- सीमा, छात्रा, एसडीपीसी रुड़की

दौड़ में भाग लेने के लिए मैडम के साथ बस में आई हूं। किराया मैडम ने ही दिया। सुबह से खाने के लिए कुछ नहीं दिया। पीने का पानी तक स्टेडियम में नहीं रखा गया है।
- गुलनाज, एसडीपीसी रुड़की

सुबह से दोपहर हो गई खाना तो दूर चाय तक नहीं पिलाई गई। यहां पानी भी कहीं दिखाई नहीं दे रहा है। भूख-प्यास के मारे दम निकला जा रहा है।
- गौतम सैनी, छात्र नेशनल इंटर कॉलेज धनौरी

यहां कुछ नहीं मिला, न ही कुछ मिलने के आसार दिखाई दे रहे हैं। अपने पैसे से ही ठेली पर जाकर कुछ पेट में भरना पडे़गा।
- अनुज सैनी, छात्र, नेशनल इंटर कॉलेज धनौरी

अधिकारियों की सुनिए
खेल प्रतियोगिता के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। इसके लिए जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक को इंचार्ज बनाया गया है। वही जानकारी दे सकती हैं।
- आरके उनियाल, मुख्य शिक्षा अधिकारी एवं अध्यक्ष आयोजन समिति

मुझे नहीं पता कितना बजट किस-किस मद में खर्च करने के लिए विभाग ने निर्धारित किया है। अभी तक कुल 15 हजार रुपये दिए हैं। विभिन्न कामों के लिए अलग-अलग समितियां बनी हैं। सभी जिम्मेदार हैं।
- रामबहादुर, सहसंयोजक आयोजन समिति

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