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फर्जी वसीयत बनाकर किया संपत्ति पर कब्जा, पांच पर मुकदमा दर्ज
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फर्जी वसीयत बनाकर जालसाजों ने एक संपत्ति पर कब्जा कर लिया। जालसाजी और धोखाधड़ी के आरोप में पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपियों ने फर्जी हस्ताक्षरों और अंगूठे के निशान के बूते फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे।
मुकदमा डालनवाला थाने में दर्ज किया गया है। मामले में सुमंत भूषण निवासी इंद्ररोड, डालनवाला ने शिकायत की है। उनकी शिकायत के आधार पर मुकीम रोशन निवासी मन्नू गंज, असलम निवासी मच्छी बाजार, फैसल, एमएस सकलानी और बसीरन पत्नी निवासी सीटीआई क्लब भारूवाला के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि इन्होंने उनके पिता के फर्जी हस्ताक्षर व अंगूठे का निशान बनाकर फर्जी वसीयत नामा तैयार किया। फर्जीवाड़ा कर उनकी और पिता के नाम की संपत्ति पर कब्जा कर बेच डाला। उनके 86 वर्षीय पिता गंभीर बीमारी से जुझ रहे थे। आरोपियों ने जाली वसीयत का 20 नवंबर 2020 का प्रयोग किया और अब हक अधिकार क्लेम कर रहे हैं। बैंकों में भी प्रार्थना पत्र दे रहे हैं। सुमंत भूषण का कहना है कि वह 19 नवंबर 2020 को देहरादून अपने माता-पिता के साथ आए थे। 20 नवंबर 2020 को उनकी पत्नी का जन्मदिन था। पूरा परिवार घर पर मौजूद था। पिता पूरे समय परिवार के साथ ही थे। पिता एक मिनट के लिए भी घर पर अकेले नहीं थे। लेकिन, आरोपियों ने 20 नवंबर 2020 को ही पिता शशि भूषण ने वसीयत बना ली। यही नहीं उनके पिता चलने, देखने, सुनने व हस्ताक्षर करने की शक्ति तो खो चुके थे।
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मुकदमा डालनवाला थाने में दर्ज किया गया है। मामले में सुमंत भूषण निवासी इंद्ररोड, डालनवाला ने शिकायत की है। उनकी शिकायत के आधार पर मुकीम रोशन निवासी मन्नू गंज, असलम निवासी मच्छी बाजार, फैसल, एमएस सकलानी और बसीरन पत्नी निवासी सीटीआई क्लब भारूवाला के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि इन्होंने उनके पिता के फर्जी हस्ताक्षर व अंगूठे का निशान बनाकर फर्जी वसीयत नामा तैयार किया। फर्जीवाड़ा कर उनकी और पिता के नाम की संपत्ति पर कब्जा कर बेच डाला। उनके 86 वर्षीय पिता गंभीर बीमारी से जुझ रहे थे। आरोपियों ने जाली वसीयत का 20 नवंबर 2020 का प्रयोग किया और अब हक अधिकार क्लेम कर रहे हैं। बैंकों में भी प्रार्थना पत्र दे रहे हैं। सुमंत भूषण का कहना है कि वह 19 नवंबर 2020 को देहरादून अपने माता-पिता के साथ आए थे। 20 नवंबर 2020 को उनकी पत्नी का जन्मदिन था। पूरा परिवार घर पर मौजूद था। पिता पूरे समय परिवार के साथ ही थे। पिता एक मिनट के लिए भी घर पर अकेले नहीं थे। लेकिन, आरोपियों ने 20 नवंबर 2020 को ही पिता शशि भूषण ने वसीयत बना ली। यही नहीं उनके पिता चलने, देखने, सुनने व हस्ताक्षर करने की शक्ति तो खो चुके थे।
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