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स्कूल में कब्जा, सड़क पर बच्चे
बिशन सिंह बोरा/अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 10 Jul 2014 01:49 PM IST
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राजधानी दून के माता मंदिर रोड स्थित अशासकीय न्यू प्रभु निकेतन जूनियर हाईस्कूल के 37 छात्र-छात्राएं सड़क पर आ गए हैं।
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स्कूल की संपत्ति कब्जाने के लिए कुछ लोगों ने यहां ताले जड़ दिए हैं। शिक्षकों का कहना है कि स्कूल की संपत्ति खुर्द-बुर्द करने की साजिश रची जा रही है। वहीं, दूसरे पक्ष का कहना है कि यह निजी भवन है, जिसे स्कूल प्रबंध समिति को किराये पर दिया गया था। शिक्षक कब्जे की कोशिश कर रहे हैं। दावा है कि प्रबंध समिति की रजामंदी पर ही स्कूल खाली कराया गया है।
दो करोड़ का है मामला
बताया जा रहा है कि धर्मपुर के माता मंदिर रोड पर मुख्य सड़क पर स्थित इस स्कूल में 14 कमरे हैं। सूत्रों की मानें तो इसकी कीमत दो करोड़ रुपये से अधिक है। यह स्कूल वर्ष 1980 में बना था, जिसे सात साल बाद अशासकीय मान्यता मिली। अभी यहां दो शिक्षक गिरीश चंद्र सेमवाल और दयाल सिंह, जबकि एक परिचारक नरेश कुमार तैनात हैं। प्रधानाध्यापिका ज्योत्सना शर्मा हाल में रिटायर हुई हैं।
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मई में लग गए थे ताले
स्कूल की तत्कालीन प्रधानाध्यापिका ज्योत्सना शर्मा ने 28 मई 2014 को जिलाधिकारी को भेजे पत्र में बताया था कि स्कूल के मेन गेट पर दीवार बनाकर रास्ता बंद कर दिया गया है। इसके अलावा आफिस, कक्षाओं और मिड डे मील कक्ष के ताले भी बदल डाले गए हैं। लेकिन प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। इससे पूर्व 24 मार्च वर्ष 2014 को उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षक संघ ने भी मुख्य शिक्षाधिकारी को पत्र भेज मामले की जानकारी दी थी। लेकिन शिक्षा विभाग सोता रहा।
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प्राइमरी में भी नहीं मिली जगह
जुलाई में स्कूल खुलने के बाद बच्चे पहुंचे तो रास्ता बंद देख भौचक रह गए। शिक्षकों ने बात रखी तो मंगलवार को जिला शिक्षाधिकारी बेसिक पद्मेंद्र सकलानी ने व्यवस्था होने तक न्यू प्रभु निकेतन जूनियर स्कूल को आराघर के प्राइमरी स्कूल में चलाने का निर्देश दिया। लेकिन, पहले से जर्जर प्राइमरी स्कूल में कक्षाएं नहीं चलाई जा सकी। अब बच्चे अधर में हैं।
अरबों की है स्कूलों की जमीन
राजधानी में स्कूलों की जमीनों पर अतिक्रमण और इन्हें खाली कराने के प्रयास तेजी से बढ़े हैं। दून में 54 अशासकीय इंटर कालेज और 49 जूनियर हाईस्कूल हैं। इनमें से कुछ में 20 से 25 बीघा जमीन है, जिसकी कीमत अरबों रुपये है। ऐसे में भूमाफिया की नजर स्कूलों पर है। खास बात यह है कि भूमाफिया स्कूलों पर कब्जे करने की कोशिश करते हैं, लेकिन शिक्षा विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा रहता है।
अफसर ही बताते हैं रास्ता
सूत्र बताते हैं कि स्कूलों को खाली कराने का रास्ता शिक्षा विभाग के अफसर ही भूमाफिया को बताते हैं। अधिकारियों और स्कूल प्रबंध समितियों की मिलीभगत से पहले स्कूल की जमीन को विवादित बनाया जाता है। इसके बाद मामला कोर्ट में पहुंचता है तो विभाग ठीक से पैरवी नहीं करता। आखिर स्कूल को शिफ्ट करवाने के रास्ते निकाल लिए जाते हैं।
इन स्कूलों पर भी नजर
राजपुर रोड स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय को भूमाफिया खाली कराने की कोशिश में हैं। इसके अलावा राजपुर रोड स्थित सीएनआई गर्ल्स इंटर कालेज की भूमि को भी विवादित बना दिया गया है। सीएनआई बालक इंटर कालेज पलटन बाजार, जगदंबा जूनियर हाईस्कूल गांधी ग्राम, बाल भारती शिक्षा निकेतन ऋषिकेश, मंगला देवी इंटर कालेज, सनातन धर्म इंटर कालेज की जमीन पर भी भूमाफिया की नजर है।
अशासकीय स्कूलों का प्रबंधन समिति देखती है, लेकिन स्कूल न बिक सकता है न बंद हो सकता है। संपत्ति खुर्द-बुर्द करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। शिक्षकों को वेतन सरकार देती है। मैंने सीईओ से रिपोर्ट मांगी है। बृहस्पतिवार को वह मौके पर जाएंगे। इसके बाद आगे कार्रवाई की जाएगी।
-मंत्री प्रसाद नैथानी, शिक्षा मंत्री
स्कूल की चल-अचल संपत्ति किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि प्रबंध समिति के नाम होती है। स्कूल को इस शर्त पर ही सरकार से अनुदान मिलता है। ऐसे में स्कूल को बंद नहीं किया जा सकता है। स्कूल की प्रबंध समिति का कोई भी सदस्य या किसी भी बच्चे का अभिभावक इस मामले में शिकायत कर सकता है।
-एनएस राणा, पूर्व अपर शिक्षा निदेशक
दून में कई स्कूल प्रबंधन समितियां स्कूलों पर कब्जे करने की तैयारी में हैं। जो हालात बने हुए हैं, उनमें कभी भी किसी स्कूल पर कब्जा हो सकता है। शिक्षक संगठन बच्चों और शिक्षकों के हितों की अनदेखी को बर्दाश्त नहीं करेगा। संगठन इसके खिलाफ आंदोलन छेड़ेगा।
-ईवी कुमार, प्रांतीय महामंत्री उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षक संगठन