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कूड़े के ढेर पर रेंग रही 'राजधानी'
देहरादून/अंकित चौधरी
Updated Sun, 11 Aug 2013 10:37 PM IST
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राजधानी देहरादून कूड़े की बदबू से परेशान है लेकिन जिम्मेदार कंपनी और नगर निगम बेपरवाह हैं। नगर निगम के लचर रवैये का फायदा कूड़ा उठाने वाली दून वैली वेस्ट मैनेजमेंट (डीबीडब्ल्यूएम) कंपनी उठा रही है।
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कंपनी अपनी मर्जी से काम कर रही है। कुछ जगहों और घरों से कूड़ा उठाती है बाकी जगह छोड़ देती है। स्थिति यह है कि शहर की सड़कों पर कई दिनों तक कूड़े के ढेर फैले रहते हैं। इसी तरह लोगों के घरों में भी कई-कई दिन तक कूड़ा पड़ा रहता है। इस तरह लोग घर से सड़क तक कूड़े की वजह से परेशान हैं।
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बीमारियों की चपेट में शहर
जहां कूड़े की बदबू ने लोगों का जीना मुश्किल कर रखा है, वहीं इससे शहर में कई तरह की बीमारियां भी फैल रही हैं। मक्खी और मच्छरों ने लोगों की दुश्वारियां बढ़ा दी हैं।
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जब नगर निगम कूड़ा उठाता था तो कूड़ा डालने वाली जगहों पर सफेद चूना डाला जाता था, ताकि बदबू और मक्खी-मच्छर न फैलें। लेकिन जब से निजी कंपनी ने कूड़ा उठाने की जिम्मेदारी ली है तब से यह व्यवस्था केवल कागजों पर दिखाई देती है।
रकम मनमानी, उठान का नाम नहीं
कंपनी को घर-घर से कूड़ा उठाने के बदले तीन वर्ग के रूप में घरों से पैसे मिलते हैं। निम्न आय वर्ग से बीस, मध्य आय वर्ग से तीस और उच्च आय वर्ग से चालीस रुपये प्रतिमाह प्रति घर से देना नगर निगम ने तय किया है।
लेकिन कंपनी तीन चौथाई शहर के लोगों से पचास रुपये प्रतिमाह वसूलती है। कंपनी ने इसकी रसीद देनी भी बंद कर दी है। ज्यादातर इलाकों में दो से तीन दिन में एक बार ही कूड़ा उठाया जा रहा है।
कहां हैं निगम के सुपरवाइजर
नगर निगम ने अपने हर वार्ड में एक सुपरवाइजर की नियुक्ति केवल इसलिए की है कि वह इलाके की सफाई व्यवस्था को देखेगा। लेकिन ये सुपरवाइजर कहां काम करते हैं और क्या देखते हैं, कोई उनसे जवाब मांगने वाला नहीं है।
सही काम पर दिए थे 60 वार्ड
डीबीडब्ल्यूएम कंपनी के पास जब तक तीस वार्ड की कूड़ा उठाने की जिम्मेदारी थी, तब तक उसने ठीक काम किया। जब से सभी वार्डोँ के कूड़ा उठाने की जिम्मेदारी मिली उसकी कार्यशैली ही बदल गई। कंपनी के पास सारा शहर तो आ गया। लेकिन उसने इसके बाद उपकरण नहीं बढ़ाए, जिससे कूड़ा उठान की समस्या शुरू हो गई।
ट्रंचिंग ग्राउंड बेहाल
नगर निगम एक दशक से सहस्रधारा रोड स्थिति ट्रंचिंग ग्राउंड में कूड़ा डाल रहा है। जब तक निगम ने वहां कूड़ा डाला तब तक वहां कोई समस्या नहीं थी।
दो साल से कंपनी ने कूड़ा डालना शुरू किया तो आसपास के लोगों के लिए परेशानियों का अंबार लग गया। कूड़ा निस्तारण ठीक नहीं होने से कूड़े की बदबू, मक्खी और मच्छर से लोग परेशान हो गए हैं।
हाईकोर्ट में देना है जवाब
नगर निगम को कूड़ा निस्तारण नहीं होने के कारण सहस्रधारा रोड पर पैदा हुई समस्याओं के संबंध में हाईकोर्ट में जवाब देना है। कोर्ट से मैदान में कूड़ा नहीं डालने देने के आदेश हैं।
लेकिन कूड़ा उठाने वाली कंपनी के पास इसके अलावा और कोई जगह नहीं है। कंपनी को जगह नगर निगम को उपलब्ध करानी है, जोकि अभी तक नाकाम रहा है।
यहां सड़ता है कूड़ा
सर्वे चौक से करनपुर रोड, होटल ग्रेटवेल्यू के पास कैनाल रोड, ईसी रोड, बॉबे बाग, चुक्खूवाला, खुड़बुड़ा, शक्ति विहार-माजरा, पटेलनगर नगर, कांवली रोड, अधोईवाला, करनपुर, डीएल रोड, नेशविला रोड आदि।
अलग-अलग सुर
बारिश की वजह से कूड़े का बैकलाग बढ़ता जा रहा है। हम लगातार कंपनी पर दबाव बना रहे हैं। सुपरवाइजरों पर भी सख्ती बरती जाएगी।
- अशोक कुमार, एमएनए
ईद पर अधिकांश कर्मचारियों के छुट्टी चले जाने के कारण समस्या बढ़ गई थी। रविवार तक स्थिति को नियंत्रण में लाने का प्रयास किया जाएगा।
- सिद्धार्थ जैन, प्रोजेक्ट डाइरेक्टर, डीबीडब्ल्यूएम
यह है हकीकतः
-200 टन कूड़ा प्रतिदिन निकलता है शहर से
-64 गाड़ियों और 250 रिक्शों से ढोया जाता है
-60 वार्डों से घर-घर से कूड़ा उठाने की जिम्मेदारी
-01 लाख से अधिक घर और कांप्लेक्स कंपनी के हवाले
-50 लाख रुपये कूड़ा उठाने पर प्रतिमाह खर्च का दावा
-40 लाख रुपये प्रतिमाह आमदनी का दावा करती है कंपनी
-10 लाख रुपये प्रतिमाह घाटे का दावा करती है कंपनी
-35 लाख प्रतिमाह कूड़ा उठाने पर निगम मानता है खर्च