भांग के ये फायदे सुनकर चौंक जाएंगे आप
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देश से भांग की खेती पर प्रतिबंध हटाने की तैयारी है। ऐसा हुआ तो उत्तराखंड को खासा फायदा होने की उम्मीद है। हालांकि उत्तराखंड में भांग की खेती पर प्रतिबंध नहीं है पर नारकोटिक्क्स कंट्रोल ऐक्ट में प्रतिबंधित होने के कारण राज्य को इसका पूरा फायदा नहीं मिल पा रहा है।
भांग के रेशे और बीज का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है और इस समय करीब 23 हजार उत्पाद भांग के रेशे और बीज से तैयार किए जा रहे हैं। प्रदेश में भांग के रेशे से उत्पाद तैयार करने का काम हो रहा है पर यह बहुत ही सीमित मात्रा में है।
सिर्फ नशा नहीं है भांग
विशेषज्ञों का कहना है कि भांग को फिलहाल नारकोटिक्स के नजरिए से ही देखा गया है, जबकि भांग के रेशे से कागज, रस्सी और कपड़े भी बनाए जाते हैं। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली ने नमूने के तौर पर भांग के रेशे से हैट भी बनाया था।
कपड़ा मंत्रालय प्रतिबंध हटाने के पक्ष में
देश भर में भांग की खेती प्रतिबंधित है। अब कपड़ा मंत्रालय इस कोशिश में है कि भांग की खेती पर से प्रतिबंध हटाया जा सके।
खास बात यह भी है कि कपड़ा मंत्रालय के इस प्रस्ताव में उत्तराखंड को नोडल राज्य के रूप में स्थापित करने की योजना भी है।
तर्क यह है भांग के उपयोग से रस्सी, कपड़े बनाने का प्रचलन उत्तराखंड के कई स्थानों पर है और यहां भांग के साथ ही कंडाली (बिच्छु घास) का उत्पादन व्यापक पैमाने पर हो सकता है।
2400 लाख के उद्योग में राज्य की हिस्सेदारी
राष्ट्रीय प्राकृतिक रेशा नीति में केला, अनानास, रामबांस, कंडाली के साथ ही भांग को भी महत्वपूर्ण रेशा उत्पाद के रूप में चिह्नित किया गया है।
भांग का पौधा चार माह में 16 फीट ऊंचा हो जाता है और इसमें किसी खाद की जरूरत नहीं होती। पूर्व मुख्य सचिव और योजना आयोग के सदस्य डा. आरएस टोलिया के मुताबिक उत्तराखंड में भांग की खेती पर प्रतिबंध राज्य गठन के कुछ समय बाद ही हटा दिया गया था।
कपड़ा मंत्रालय का प्रस्ताव अगर मान लिया जाता है तो उत्तराखंड की सीधी हिस्सेदारी देश के 2400 लाख रुपये के उद्योग में सीधी भागीदारी हो जाएगी।