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CAG का खुलासा, बिना टेंडर करोडों की खरीददारी

Fri, 18 Apr 2014 01:51 PM IST
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 18 Apr 2014 01:51 PM IST
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cag report scam in fri

इंडियन काउंसिल फॉर फारेस्ट्री रिसर्च एंड एजूकेशन (आईसीएफआरई) और इससे जुड़े शोध संस्थानों में अनियमितताओं की परतें उधड़ती जा रही हैं।

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वैज्ञानिक उपकरणों की खरीद प्रक्रिया पर सवाल
अब संस्थान में वैज्ञानिक उपकरणों की खरीद में करोड़ों का घपला सामने आया है।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने दो अप्रैल को भेजी रिपोर्ट में वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) में वैज्ञानिक उपकरणों की खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठाया है।
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रिपोर्ट के मुताबिक एक जुलाई 2007 से मैनुअल टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई है। इसके बावजूद वर्ष 2010-11, 2012-13 में एफआरआई के लिए 5.78 करोड़ रुपए के वैज्ञानिक उपकरण ई-टेंडर प्रक्रिया के बिना चुपचाप खरीद लिए गए।
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यही नहीं, भुगतान की दर भी विधि मंत्रालय द्वारा तय दर से अधिक रखी गई।

उधड़ती परतें
- सीएजी ने संस्थान में 32 क्रय फाइलों का निरीक्षण किया, जिनमें अनियमितताएं सामने आई, टेंडर से संबंधित कागजात डाक, पोस्टल स्टांप या कोरियर स्टांप वाले नहीं मिले

- 19 मार्च 2013 को 9.76 लाख रुपए की अल्ट्रासाउंड मशीन और 17.33 लाख रुपए की एक्स-रे मशीन खरीदी गई, इसके लिए कोई भी टेंडर विज्ञापन नहीं निकाला गया

- 15 अक्तूबर 2011 को 3,21,750 रुपए इकोलॉजी इनवायरन्मेंट डिवीजन में 30 मीटर टावर लगाने के लिए दिए गए लेकिन जिस फर्म को भुगतान किया गया, उसका सीएसटी रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं मिला

- 26 मार्च 2013 को एफआरआई के एंटोमोलॉजी डिवीजन में ‘ट्राइनोक्यूलर स्टीरियोस्कोपिक माइक्रोस्कोप’ रेडिकल इंस्ट्रूमेंट्स से 3.65 लाख भुगतान पर खरीदे गए, जबकि बायो सिंक इंस्ट्रूमेंट्स कंपनी ने इसकी सबसे कम 2.81 लाख की बोली लगाई थी, इससे संस्थान को 0.84 लाख का नुकसान हुआ

अपनों को मनाने में बहाए 79.82 लाख
आईसीएफआरई में वर्ष 2010 से 2013 के बीच 79.82 लाख रुपए बतौर वकीलों की फीस पर खर्च किए गए। यह खर्च विधि मंत्रालय द्वारा तय कीमतों से कहीं अधिक दर पर किया गया।


सीएजी ने माना है कि विधि मंत्रालय ने वकीलों का प्रति सुनवाई जो खर्च तय कर रखा है, उससे कहीं ज्यादा रकम खर्च की गई। सीएजी ने यह भी पाया कि इनमें से 99 प्रतिशत मामले संस्थान के कर्मचारियों की सेवाओं से जुड़े थे।

इन्हें संस्थान के स्तर पर सुलझाया जा सकता था। लेकिन, अधिकारी कर्मचारियों से बेहतर समन्वय बनाने में भी नाकाम रहे।

रिपोर्ट पर हड़बड़ाए, फोन काटा

उपकरणों की खरीद में अनियमितताओं पर अमर उजाला ने एफआरआई निदेशक डॉ. पीपी भोजवैद का पक्ष लेना चाहा तो वह भड़क उठे। उनका कहना था कि उन्हें ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं मिली है।

जब उन्हें क्रय संबंधी अनियमितताओं पर सवाल किया गया तो उन्होंने फोन ही काट दिया। इसके बाद निदेशक ने कई बार रिंग करने पर भी फोन नहीं उठाया।

दूसरी ओर, अमर उजाला में खुलासों के बाद आईसीएफआरई के डीजी एसएस गर्ब्याल समेत सभी आईएफएस अधिकारी सामने आने से बच रहे हैं।

अमर उजाला डीजी को भी दो दिन से लगातार फोन कर रहा है, लेकिन उनके पीए हर बार साहब के मीटिंग में होने की बात कह रहे हैं।

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