फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   CAG report on kedarnath disaster.

2013 केदारनाथ त्रासदी पर कटघरे में उत्तराखंड सरकार

Sun, 08 Nov 2015 12:09 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 08 Nov 2015 12:09 PM IST
विज्ञापन
CAG report on kedarnath disaster.

पर्यावरणविदों और भूगर्भ विज्ञानियों के बाद अब महालेखा परीक्षक (कैग) ने भी 2013 की त्रासदी को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया है।

विज्ञापन


कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि प्राकृतिक आपदा विषम हिमालयी भूभाग में साल दर साल होने वाले बेतहाशा अवस्थापना विकास कार्यों का नतीजा है। राज्य सरकार हिम नदियों पर गठित विशेषज्ञों की समिति की अनुशंसा को लागू करने में विफल रही है।

आपदाओं को रोकने को लेकर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के दिशा निर्देशों की भी अनदेखी की गई है। आपदाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए कैग ने अपनी रिपोर्ट में कई सुझाव दिए हैं।
विज्ञापन


रिपोर्ट में कहा गया है कि अवस्थापना विकास कार्यों के लिए पूरे हिमालयी क्षेत्र में विस्फोटकों का जमकर प्रयोग किया गया। इसके नियंत्रण को लेकर सरकार ने कोई नीति नहीं बनाई। निर्माण कार्यों के दौरान जो भी मलबा निकला, उसके निस्तारण में भी लापरवाही बरती गई। राज्य का नगर नियोजन विभाग निर्धारित प्रावधानों के तहत भवनों का निर्माण कराने में नाकाम रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण था निष्क्रिय
कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि राज्य सरकार ने प्राकृतिक आपदाओं को रोकने और उनके न्यूनीकरण को लेकर कोई नीति नहीं बनाई। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण निष्क्रिय था।

जून 2013 की आपदा से पूर्व सरकार आपदा प्रबंधन को लागू करने में सक्षम नहीं थी। राज्य और जिला स्तर पर आपातकालीन परिचालन केंद्रों पर कर्मचारियों और आवश्यक उपकरणों की कमी थी। सरकार के पास चार धाम यात्रा के तीर्थयात्रियों के पंजीकरण का कोई तंत्र नहीं था।

राज्य आपदा प्रबंधन नीति बनाए सरकार
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए राज्य सरकार को तत्काल आपदा प्रबंधन नीति बनानी चाहिए। प्रवर्तन प्राधिकरणों को आवश्यक अधिकार देने की जरूरत है। आपदा प्रबंधन को लेकर नियमित तौर पर बैठकें होनी चाहिए जिसमें उठाए गए कदमों की समीक्षा होनी चाहिए।


राज्य सरकार यह सुनिश्चित करें कि आपदा प्रबंधन से जुडे़ तमाम सरकारी विभाग अपनी वार्षिक योजनाएं बनाएं। जिलावार जोखिम सुरक्षा प्रकोष्ठों को क्रियाशील किया जाय। प्राकृतिक आपदाओं के मद्देनजर आवश्यक खाद्य सामग्रियों का पर्याप्त भंडारण किया जाय।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed