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पूरा हुआ आईएमए में देखा ख्वाब
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 15 Jun 2014 02:08 PM IST
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दो बच्चे स्कूल टूर पर परेड देखने भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) पहुंचे तो उनके जीवन का लक्ष्य ही बदल गया।
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सेना का अनुशासन, जोश और जज्बा उनकी रग-रग में बस गया। अकादमी में इन बच्चों ने जो सपना बचपन में देखा था वह शनिवार को पासिंग आउट परेड (पीओपी) के साथ पूरा हो गया।
यह अकादमी उनके लिए हमेशा प्रेरणा बनी रही और यही प्रेरणा उन्हें मंजिल तक ले आई। अकादमी की ओर से विशेष योजना के तहत हर साल स्कूली बच्चों को इसी मकसद से बुलाया जाता है।
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आईएमए बना प्रेरणा
देहरादून के रायपुर निवासी गोविंद प्रसाद के बेटे दिवाकर खनाल आईएमए से पासआउट होकर अधिकारी बन गए। उनकी स्कूली शिक्षा एसजीआरआर बालावाला से हुई थी।
उन्होंने बताया कि बचपन में वह स्कूल टूर पर एक बार आईएमए में कमांडेंट परेड देखने आए थे। ड्रिल स्क्वायर पर कदमताल करते भावी अधिकारियों के देखकर उन्होंने भी एक दिन यहीं से पासआउट होने का सपना देखा।
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इस सपने को पूरा करने के लिए खूब कोशिश भी की लेकिन 12वीं के बाद इंजीनियरिंग में जाना पड़ा। ग्राफिक एरा विवि से बीटेक करने के बाद दिवाकर ने उम्मीद नहीं छोड़ी।
टेक्निकल एंट्री स्कीम से आईएमए में एंट्री मारी और सेना में अधिकारी बन गए। दिवाकर की मां सरिता खनाल ने बताया कि दिवाकर का चचेरा भाई सर्वेश पंथी भी उनके साथ ही पासआउट हुआ है।
उनके साथ उनके ताऊ गोविंद प्रसाद भी इन गौरवशाली लम्हों के साक्षी बने।
तीन बार आईएमए आए थे ऋषभ
मूलरूप से द्वाराहाट और वर्तमान में दून विहार निवासी ऋषभ नेगी के लिए शनिवार को दिन बेहद खास था। उनकी स्कूली शिक्षा स्कॉलर्स होम स्कूल से हुई।
ऋषभ ने कभी सेना में आने की नहीं सोची थी, लेकिन पहली बार स्कूल टूर के तहत आईएमए पहुंचे तो सोच और लक्ष्य दोनों बदल गए।
उन्होंने सेना का जोश और जज्बा इतना भाया कि वे लगातार तीन साल तक स्कूल टूर पर आईएमए में आते रहे।
12वीं के बाद एनडीए खड़गवासला पहुंचे। वहां से पासआउट होने के बाद अपने सपनों के आईएमए में आ गए। ऋषभ ने बताया कि जब पहली बार उन्होंने बतौर कैडेट आईएमए में कदम रखा तो वह लम्हा किसी सपने जैसा था।
आज उनका बचपन का सपना पूरा हो गया। उनके पिता डा. भुवनेश कुमार सेंट्रल सिल्क बोर्ड में वैज्ञानिक हैं जबकि मां विमला नेगी शिक्षिका हैं। एक बड़ा भाई एनआईटी जमशेदपुर से एमटेक कर रहा है।