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आम बजटः हर चेहरे पर दिखी राहत

Fri, 11 Jul 2014 12:18 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 11 Jul 2014 12:18 PM IST
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budget for uttarakhand

संयुक्त परिवार हो या एकल परिवार। 25 हजार कमाने या 50 हजार कमाने वाला। लगभग हर चेहरे पर बजट से राहत देखी गई।

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लोगों में खुशी

सबसे ज्यादा राहत लोगों ने आयकर स्लैब में छूट का दायरा बढ़ाए जाने की ली। मोबाइल, कंप्यूटर जैसी अब जरूरत में शामिल चीजों को सस्ता किए जाने पर भी खुशी जताई।

रेडिमेट कपड़ों, कास्मेटिक और सजने-संवरने के सामान महंगे होने पर महिलाएं जरूर परेशान दिखाई दीं। उनकी इच्छा यह भी थी कि तेल, साबुन के अलावा किचन से जुड़ी और चीजें भी सस्ती होनी चाहिए थीं। फिर भी ज्यादातर महिलाएं इस बजट को 10 में से सात अंक देती हैं।
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कास्मेटिक्स सस्ता होता, रसोई को और मिलता

पेशे से व्यवसायी तरुण की मासिक आय 60 हजार रुपए है। माता-पिता, पत्नी और दो बच्चों केसाथ त्यागी रोड पर रह रहे तरुण बजट से संतुष्ट नजर आते हैं।

उनका कहना है कि आम आदमी को सबसे ज्यादा राहत आयकर छूट का दायरा बढ़ाए जाने से मिलेगी। हालांकि वह यह भी मानते हैं कि यह छूट 5 लाख तक होनी चाहिए थी।

तरुण की पत्नी अलीशा हालांकि महिलाओं के लिए भी अधिक छूट दिए जाने की बात दोहराती हैं। कास्मेटिक्स पर बढ़ोत्तरी से भी वह नाराज हैं। तरुण इंडियन टूर आपरेटर्स को सर्विस टैक्स में कमी किए जाने की बात से खुश नजर आते हैं।
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उनकी मानें तो इससे टूरिस्टों को फायदा मिलेगा और होटल, टूरिज्म इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा। छह साल के बेटे अरंजय ने अभी पढ़ाई ही शुरू की है। तरुण के मुताबिक अगर एजुकेशन के लिए कुछ किया गया होता तो अच्छा होता।  

बजट अच्छा पर एजुकेशन पर और मिलता
टैगोर विला में रह रहे 27 साल के जतिन सब्बरवाल ने अपनी पत्नी सोनाली, मां सुषमा और ताऊ अशोक सब्बरवाल के साथ बेहद चाव के साथ टीवी पर बजट प्रसारण देखना शुरू किया था।

जतिन रेडिमेड कपड़ों के व्यापारी हैं। यह कपड़े बजट में महंगे हो गए हैं। लेकिन जतिन इसे जरूरी बताते हैं। उनकी मानें तो कच्चा माल महंगा होने का यह असर होना ही था।

उनके बकौल वित्त मंत्री अरुण जेटली ने निराश नहीं किया। हां, एजुकेशन के क्षेत्र में कुछ खास न होेने पर जरूर उन्होंने निराशा जताई।

जतिन की मासिक आमदनी लगभग 40 हजार रुपए है। उन्हें भी तमाम दूसरे लोगों की तरह आयकर में छूट का दायरा बढ़ाए जाने की उम्मीद थी, जो पूरी हुई। मोबाइल फोन, कंप्यूटर के दाम कम होने पर भी वह खुश नजर आए।


यह है इस परिवार का एक माह का खर्च

मद - खर्च (रुपए में)
किचन का खर्च - 20000
परिवहन का खर्च -3000
मोबाइल/नेट/टीवी - 1500
शापिंग, हेल्थ, पिकनिक - 5000

आयकर स्लैब में छूट का दायरा और बढ़ता

वेस्ट पटेलनगर में रहने वाले भूपेंद्र पेशे से एक स्थानीय मोटर कंपनी में एकाउंटेंट हैं। उनकी मासिक आय 20 हजार रुपए से अधिक है।

एक बेटा है, जो जालंधर की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी से बीटेक कर रहा है। भूपेंद्र ने उसके लिए लोन लिया है। उनकी पत्नी उषा शिक्षिका हैं। घर का एक हिस्सा उन्होंने किराए पर भी उठाया हुआ है।

बजट को वह अच्छा करार देते हैं, लेकिन आयकर स्लैब में छूट का दायरा और बढ़ाए जाने के साथ ही वह किचन पर कुछ और मेहरबानी की बात कहते हैं।

दवाएं सस्ती होने को वह अच्छा कदम बताते हैं, लेकिन उनके बकौल यह भी सच है कि डाक्टर सस्ती दवाएं नहीं लिखते। लिखते भी हैं तो बाजार में मिलती नहीं।

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