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बजट 2017 में उत्तराखंड को क्या मिला एक नजर में पढ़ें...

Tue, 01 Mar 2016 09:59 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 01 Mar 2016 09:59 AM IST
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budget 2017 highlights for uttarakhand.

केंद्रीय बजट से उत्तराखंड के अन्नदाता और पहाड़ी इलाके गदगद हैं। आम बजट में कृषि क्षेत्र को विशेष तवज्जो देने से देवभूमि के किसानों को उम्मीद है कि आने वाले समय में न सिर्फ पहाड़ों में खेती लहलहाएगी और उनकी माली हालत सुधरेगी, बल्कि राज्य के जैविक उत्पादों का पूरी दुनिया में डंका बजेगा।

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आंकड़ों पर नजर डालें तो राज्य में 10.67 लाख किसान 843000 हेक्टेयर में खेतीबाड़ी करते हैं। राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि क्षेत्र का योगदान 10.56 प्रतिशत है। राज्य की 58 फीसदी जनसंख्या खेतीबाड़ी पर निर्भर है। खेतीबाड़ी को बढ़ावा देने को लेकर केंद्र और राज्य सरकार की ओर से दर्जन भर योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
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लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद किसानों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। आम बजट में जैविक खेती को बढ़ावा देने, आपदाग्रस्त गांवों को अंत्योदय योजना के तहत विशेष बजट देने, मनरेगा का बजट बढ़ाकर 38500 करोड़ करने संबंधी प्रस्तावों से राज्य में खेतीबाड़ी को मदद मिलेगी।
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सिंचाई के ‘स्पेशल फंड’ से लबालब होंगे खेत
बजट में सिंचाई योजनाओं के लिए 20000 करोड़ का विशेष पैकेज दिए जाने से भी किसानों को उम्मीद जगी है। नाबार्ड के आंकड़ों पर नजर डालें तो राज्य में 843000 हेक्टेयर में से महज 3.18 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल की सिंचाई नहरों, सरकारी ट्यूबवेल, पंप सेट से हो पाती है।

प्रतिशत के लिहाज से महज 30.93 प्रतिशत खेतों की सिंचाई हो पाती है, जबकि बाकी खेतीबाड़ी वर्षा आधारित है। बजट की कमी के चलते केंद्र एवं राज्य सरकार की तमाम छोटी बड़ी सिंचाई परियोजनाएं या तो शुरू ही नहीं हो पाई और यदि शुरुआत हुई तो आधी अधूरी हैं।

अब जबकि आम बजट में सिंचाई परियोजनाओं के लिए 20000 करोड़ के विशेष पैकेज की व्यवस्था की गई तो किसानों को उम्मीद जगी है कि उनकी खेतीबड़ी पानी के अभाव में चौपट नहीं होगी।

उत्तराखंड के लिए बजट के हाईलाइट्स

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: आपदाग्रस्त गांवों को अंत्योदय योजना के तहत विशेष पैकेज मिलेगा
: केंद्र वित्त पोषित योजनाओं में उत्तराखंड को स्पेशल कैटेगरी का दर्जा बरकरार
: जैविक खेती के लिए भारी भरकम बजट से राज्य के किसानों को होगा फायदा
: सिंचाई निधि से पहाड़ के वर्षा आधारित खेतों में लहलहा सकेगी फसल
: बजट बढ़ने से चारधाम हाईवे का निर्माण कार्य और सुगम होने की उम्मीद बढ़ी
: पशुपालन के लिए चार नए कार्यक्रमों की शुरुआत
: पीएमजीएसवाई में धनराशि तो किसान फसल बीमा योजना का बजट बढ़ाया
: किसानों की आय पांच वर्ष में दोगुनी करने का उत्तराखंड को भी मिलेगा लाभ

उत्तराखंड के जैविक उत्पादों का बजेगा डंका
केंद्र सरकार ने आम बजट में जैविक खेती का क्षेत्रफल पांच लाख हेक्टेयर करने का निर्णय किया है। उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर जैविक खेती होती है।

यह बात और है कि जैविक उत्पादों की मार्केटिंग करने में केंद्र और राज्य सरकार दोनों नाकाम रही हैं। लेकिन अब जबकि केंद्र ने जैविक खेती का क्षेत्रफल बढ़ाने के साथ ही अतिरिक्त बजट का प्रावधान किया है तो जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा।

पशुपालन को मिलेगा बढ़ावा

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बजट में पशुपालन से जुड़े चार नए कार्यक्रमों को संचालित करने संबंधी घोषणा से राज्य में न सिर्फ पशुपालन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जगी है, बल्कि दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में राज्य अग्रणी होगा। ज्ञात हो कि पशुपालन के क्षेत्र में राज्य तेजी से बढ़ा है।

डेयरी विकास को लेकर केंद्र और राज्य सरकार की ओर से संचालित योजनाओं में राज्य ने कई कीर्तिमान भी स्थापित किए हैं। लेकिन अब जबकि बजट में पशुधन योजना समेत चार नए कार्यक्रमों की घोषणा की गई तो राज्य में डेयरी उद्योग को और गति मिलने की उम्मीद जगी है।

आम बजट में पहली बार कृषि क्षेत्र को विशेष तौर पर फोकस किया गया है। बजट में किए गए प्रावधानोें को यदि केंद्र और राज्य सरकारें लागू करने में सफल होती हैं तो कृषि क्षेत्र में अप्रत्याशित विकास होगा। युवाओं का खेतीबाड़ी की ओर रुझान बढ़ेगा।
- ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह, प्रगतिशील किसान

बजट में एग्रीकल्चर सेक्टर पर विशेष तौर पर फोकस किया गया है। यह बहुत अच्छी पहल है। इससे देश में खेतीबाड़ी को जबरदस्त बढ़ाया मिलेगा। खेतीबाड़ी को उद्योग का रूप देने की कोशिश है, जो अच्छी बात है।
- डॉ. विभा मल्होत्रा, निदेशक, सीआईआई

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