फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   bridge decides marriage

यह पुल तय करता है, शादी होगी या नहीं!

Sun, 15 Jun 2014 08:12 AM IST
महेंद्र जंगपांगी/ अमर उजाला, थल (पिथौरागढ़)
महेंद्र जंगपांगी/ अमर उजाला, थल (पिथौरागढ़) Updated Sun, 15 Jun 2014 08:12 AM IST
विज्ञापन
bridge decides marriage

आमतौर पर विवाह से पूर्व कुंडली, परिवार, मुहूर्त आदि देखा जाता है, लेकिन पिथौरागढ़ के एक गांव में परंपरा के अलावा पुल भी देखा जाता है।

विज्ञापन


अस्याली गांव में अस्थायी पुल है, जो सात फेरे के दिन तय करता है। चौंकिए नहीं, यह सच है। अस्याली गांव में हर साल यह पुल बह जाता है, जिसको ग्रामीण हर बार तैयार करते हैं।
विज्ञापन


ऐसे में स्थानीय लोग बारात निकालने से पहले यह देखते हैं कि पुल है या नहीं। फिर इसके हिसाब से विवाह की तिथि तय होती है।

ग्लेशियर पिघलने से बढ़ा नदी का पानी

bridge decides marriage

ग्लेशियर पिघलने से रामगंगा में जलस्तर बढ़ गया है और उस पर बनाए गए अस्थायी पुल के बहने का खतरा मंडरा रहा है।

विकासखंड बेड़ीनाग के इस गांव की विडंबना है कि तीन बार झूलापुल की स्वीकृति होने के बाद भी इसका निर्माण नहीं हो पाया। झूलापुल स्वीकृत होते ही उसे दूसरी जगह शिफ्ट किया जा रहा है।

पिछले आठ साल से रामगंगा में लकड़ियों के सहारे अस्थायी पुल तैयार होता है। इसी पुल से स्कूली बच्चे, थल बाजार आने वाले लोग आते-जाते हैं।

हर साल बनाना पड़ता है यह पुल

bridge decides marriage

बारातें भी निकलती हैं, लेकिन यह सुख लोगों को मात्र आठ महीने तक ही मिल पाता है।

वर्ष के शेष चार महीनों तक लोगों को थल बाजार आने के लिए छह किलोमीटर के खतरनाक रास्ते को पारकर घटीगाड़ झूलापुल तक जाना पड़ता है।

गांव के सुरेश चंद रजवार ने बताया कि अक्तूबर में रामगंगा का प्रवाह कम हो जाता है।

उसके बाद लोग अस्थायी पुल के निर्माण की तैयारी में जुट जाते हैं। करीब एक हफ्ते में पुल बन जाता है।

विज्ञापन

बरसात में होती है परेशानी

bridge decides marriage

सुरेश चंद की प्रेरणा से ही लोग पुल निर्माण के लिए श्रमदान में सहयोग करते हैं। वह बताते हैं कि यदि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बारिश से नदी का जल स्तर अधिक बढ़ा तो यह पुल किसी भी समय बह जाएगा।

अब पुल के बहने के दिन नजदीक आ रहे हैं। सुरेश चंद ने बताया कि गांव के लोग अस्थायी पुल तक पहुंचने के लिए श्रमदान से 500 मीटर का रास्ता तैयार करते हैं।

पिछले दिनों सुरेश चंद की बहन कंचना की बारात भी इसी पुल को पारकर निकली थी।

गांव के लोग यह ध्यान देते हैं कि जब अस्थायी पुल न हो तो गांव में विवाह के कार्यक्रम भी तय न किए जाएं, क्योंकि लोगों को आवागमन में दिक्कत होती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed