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21 दिन में निपटा दिया 365 दिन का काम
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निगम की ओर से संबंधित ठेकेदार को जारी अनुभव प्रमाण पत्र
- फोटो : VIKAS NAGAR
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बीते मई माह में उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड की ओर से डाकपत्थर बैराज में किए गए कार्य सवालों के घेरे में हैं। जिस पर सवाल उठने लाजिमी हैं। गजब यह है कि विभागीय अधिकारियों ने 365 दिन के काम महज 21 दिन में निपटा दिए। इतना ही नहीं कार्य की लागत भी करीब 20 फीसदी बढ़ गई। हालांकि विभागीय उच्चाधिकारी इस तेजी को जायज ठहरा रहे हैं। इसके साथ ही निर्माण कार्य की लागत में 20 फीसदी की बढ़ोतरी को भी विभागीय अधिकारियों ने सिरे से नकार दिया है जबकि, विभाग की ओर से संबंधित ठेकेदार को जो अनुभव प्रमाण पत्र जारी किया गया है। उसमें साफ जिक्र है कि निर्माण कार्य 6.87 करोड़ की लागत से स्वीकृत हुए थे लेकिन निर्माण कार्य पूर्ण करते समय इसकी लागत 9.30 करोड़ पहुंच गई।
ऑनलाइन मिली जानकारी के अनुसार करीब 9.30 करोड़ के इन कार्यों के अंतर्गत डेढ़ लाख क्यूबिक मीटर मिट्टी से संबंधित कार्य भी होना था, जो कि इतने कम समय में पूरा होना संभव नहीं है। वहीं जनसंघर्ष मोर्चा के जिला मीडिया प्रभारी प्रवीण शर्मा पिन्नी का कहना है कि यदि निगम के अधिकारी गंभीरता से इसकी जांच करें तो बहुत बड़ा घोटाला सामने आएगा। कहा कि यदि ई वे बिल और क्रय किए गए सामान के बिलों की गहनता से जांच हो तो निगम की सारी कलाई खुल जाएगी। उन्होंने कहा कि मोर्चा इसके खुलासे के लिए मोर्चा खुलेगा।
निर्माण कार्य बैराज की डाउन स्ट्रीम में कराए गए हैं। कई बार नदी में पानी का लेवल खासा बढ़ जाता है। ऐसे में एहतियात के तौर पर टेंडर कार्य पूर्ण करने के लिए 365 दिन की समय सीमा निर्धारित की गई थी। शीघ्र निर्माण कार्य पूर्ण करने के लिए साइट पर एक विशेष केमिकल का इस्तेमाल किया गया। जिस कारण निर्माण कार्य को इतनी जल्दी पूर्ण किया जा सका। निर्माण कार्य की राशि में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की बात पूरी तरह से गलत है। निर्माण कार्य लगभग 7.78 करोड़ की लागत से पूरे हुए हैं।
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अधिशासी अभियंता, एमएस अधिकारी
उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड
ऐसे हुआ खेल
अनुबंध संख्या- दिनांक 28-5- 2019, 02/ ईई /पीसीएम- डीकेपी 2019-20 के तहत पराग जैन नाम की फर्म को डाकपत्थर बैराज डाउनस्ट्रीम में सिविल कार्य के लिए करीब 6.87 करोड़ ठेका मिला। निर्माण कार्य 29-5-2019 को शुरू हुआ। अनुबंध के अनुसार निर्माण कार्य करीब एक साल यानी 28-5-2020 को पूरा होना था। लेकिन निगम के अधिकारियों और ठेकेदार ने महज 21 दिन यानी 19-5 2019 को ही निर्माण कार्य पूरा कर दिया। इतना ही नहीं लागत भी करीब 20 प्रतिशत बढ़ कर करीब 9.30 करोड़ हो गई। महज 21 दिन के भीतर लागत में इतना बड़ा अंतर होना भी किसी बड़े गड़बड़झाले की ओर इशारा कर रहा है।
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ऑनलाइन मिली जानकारी के अनुसार करीब 9.30 करोड़ के इन कार्यों के अंतर्गत डेढ़ लाख क्यूबिक मीटर मिट्टी से संबंधित कार्य भी होना था, जो कि इतने कम समय में पूरा होना संभव नहीं है। वहीं जनसंघर्ष मोर्चा के जिला मीडिया प्रभारी प्रवीण शर्मा पिन्नी का कहना है कि यदि निगम के अधिकारी गंभीरता से इसकी जांच करें तो बहुत बड़ा घोटाला सामने आएगा। कहा कि यदि ई वे बिल और क्रय किए गए सामान के बिलों की गहनता से जांच हो तो निगम की सारी कलाई खुल जाएगी। उन्होंने कहा कि मोर्चा इसके खुलासे के लिए मोर्चा खुलेगा।
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निर्माण कार्य बैराज की डाउन स्ट्रीम में कराए गए हैं। कई बार नदी में पानी का लेवल खासा बढ़ जाता है। ऐसे में एहतियात के तौर पर टेंडर कार्य पूर्ण करने के लिए 365 दिन की समय सीमा निर्धारित की गई थी। शीघ्र निर्माण कार्य पूर्ण करने के लिए साइट पर एक विशेष केमिकल का इस्तेमाल किया गया। जिस कारण निर्माण कार्य को इतनी जल्दी पूर्ण किया जा सका। निर्माण कार्य की राशि में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की बात पूरी तरह से गलत है। निर्माण कार्य लगभग 7.78 करोड़ की लागत से पूरे हुए हैं।
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उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड
ऐसे हुआ खेल
अनुबंध संख्या- दिनांक 28-5- 2019, 02/ ईई /पीसीएम- डीकेपी 2019-20 के तहत पराग जैन नाम की फर्म को डाकपत्थर बैराज डाउनस्ट्रीम में सिविल कार्य के लिए करीब 6.87 करोड़ ठेका मिला। निर्माण कार्य 29-5-2019 को शुरू हुआ। अनुबंध के अनुसार निर्माण कार्य करीब एक साल यानी 28-5-2020 को पूरा होना था। लेकिन निगम के अधिकारियों और ठेकेदार ने महज 21 दिन यानी 19-5 2019 को ही निर्माण कार्य पूरा कर दिया। इतना ही नहीं लागत भी करीब 20 प्रतिशत बढ़ कर करीब 9.30 करोड़ हो गई। महज 21 दिन के भीतर लागत में इतना बड़ा अंतर होना भी किसी बड़े गड़बड़झाले की ओर इशारा कर रहा है।