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जान देकर जिंदगी देने वाली को मिलेगा सम्मान

Wed, 10 Dec 2014 07:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 10 Dec 2014 07:43 PM IST
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bravery award to monika and labhanshu.

चमोली जिले की 11वीं की छात्रा मोनिका और ऋषिकेश निवासी दसवीं के छात्र लाभांशु को वर्ष 2014 के राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। जान की परवाह किए बगैर उफनती नदी में डूब रहे बच्चे को बचाने वाली मोनिका को मरणोपरांत इस पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

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वहीं, लाभांशु ने हरिद्वार में गंगनहर में डूब रहे दो युवकों को बचाया था। पुरस्कार 26 जनवरी को दिल्ली में दिया जाएगा।

राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए उत्तराखंड से पांच बहादुर बच्चों के नाम भेजे गए थे। इनमें से मोनिका और लाभांशु को पुरस्कार के लिए चुना गया है।

उत्तराखंड राज्य बाल कल्याण परिषद के संयुक्त सचिव कमलेश्वर प्रसाद भट्ट ने बताया कि भारतीय बाल कल्याण परिषद नई दिल्ली से मंगलवार देर शाम ही परिषद को इनके चयन का पत्र मिला है।

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मोनिका ने जान पर खेल बचाई थी जान

bravery award to monika and labhanshu.

चमोली जिले के कर्णप्रयाग ब्लॉक के कालेश्वर गांव निवासी मोनिका सात भाई-बहनों में दूसरे नंबर की थी। राजकीय इंटर कॉलेज लंगासु की 11वीं कक्षा की छात्रा मोनिका पर बड़ी बहन की शादी के बाद परिवार के काम की जिम्मेदारी भी थी।

15 जून 2014 को मोनिका अपनी दो छोटी बहनों के साथ कपड़े धोने अलकनंदा नदी में गई थी। पास में ही नदी किनारे दस वर्षीय साहिल नहा रहा था। अचानक पैर फिसलने से वह डूबने लगा।

बच्चे को डूबता देख 15 वर्षीय मोनिका ने अपनी जान की परवाह किए बगैर अदम्य साहस का परिचय देते हुए साहिल को तो बचा लिया, लेकिन वह खुद उफनती अलकनंदा में बह गई। स्थानीय ग्रामीणों के साथ ही पुलिस और प्रशासन ने मोनिका की तलाश की, लेकिन उफनती नदी में उसका पता नहीं चला। अभी तक भी उसका शव नहीं मिला है।

युवकों को बचाने 30 फीट गहरी गंगनहर में कूदा गया लाभांशु

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दयानंद मार्ग चंद्रेश्वर नगर ऋषिकेश निवासी 17 वर्षीय लाभांशु शर्मा ने गंगनहर में बह रहे दो युवकों को बचाया था। स्कूलस्तरीय नेशनल खेलों में मेडल जीत चुके उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बेलड़ी हरिद्वार का दसवीं कक्षा का छात्र लाभांशु 24 मई वर्ष 2014 को कुश्ती के अभ्यास के लिए गंगनहर किनारे गया था।

तभी वहां दिल्ली निवासी एक युवक पानी पीने के लिए नहर में उतरा। अचानक पैर फिसलने से युवक नहर में बह गया। उसे बचाने के लिए एक अन्य युवक ने प्रयास किया लेकिन वह भी तैरना नहीं जानता था। देखते ही देखते दोनों युवक बहने लगे।

चीख-पुकार मची, लेकिन 30 फीट गहरी नहर में कूदकर उन्हें बचाने की किसी ने हिम्मत नहीं दिखाई। तभी लाभांशु ने अपनी जान की परवाह किए बगैर उन्हें बचाकर अदम्य साहस का परिचय दिया।

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