{"_id":"5c0855909279fd01d77c13f9e4ddb196","slug":"braille-was-given-by-dehradun","type":"story","status":"publish","title_hn":"देहरादून ने हिंदुस्तान को दिए संगीत के नए सुर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
देहरादून ने हिंदुस्तान को दिए संगीत के नए सुर
प्रवेश कुमारी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 23 Sep 2013 08:48 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिंदुस्तानी संगीत का ब्रेल म्यूजिक नोटेशन सिस्टम देहरादून में तैयार हो गया है। राष्ट्रीय दृष्टिबाधितार्थ संस्थान यानी एनआईवीएच ने यह उपलब्धि हासिल की है।
विज्ञापन
मशहूर स्थानीय शास्त्रीय गायक शुचित नारंग ने इसके लिए एक यूनिफाइड ब्रेल कोड विकसित किया है। यानी देश भर में हिंदुस्तानी संगीत की एक ही स्वर लिपि होगी। इसे ब्रेल काउंसिल आफ इंडिया (बीसीआई) को अप्रूवल के लिए भेजा गया है।
विज्ञापन
पढ़ें, केबीसी की हॉट सीट पर बैठा देहरादून का नौजवान
विज्ञापन
जल्द ही संगीत विधा के माहिर जनों की दो वर्कशाप होंगी। इनकी अनुशंसाओं के आधार पर काउंसिल इस कोड को अप्रूव करेगा। शुचित नारंग ने इसके जल्द ही अप्रूवल की बात दोहराई। बता दें कि उन्होंने एनआईवीएच के लिए इस एक साल के प्रोजेक्ट पर बीते अप्रैल माह में काम शुरू किया था, जो इस साल मार्च में जाकर पूरा हुआ।
संस्थान की ओर से उन्हें यह प्रोजेक्ट करने को कहा गया था, क्योंकि वह पहले भी कर्नाटक संगीत की ब्रेल स्वर लिपि तैयार कर चुके हैं। इस लिपि के होने से फायदा यह होगा कि राज्य चाहे कोई भी हो, कोलकाता हो चाहे मध्य प्रदेश, इसे एक ही तरीके से स्वरबद्ध किया जा सकेगा।
30 साल पहले भी हुई थी कोशिश
दून में लगभग 30 साल पहले भी हिंदुस्तानी संगीत का ब्रेल म्यूजिक नोटेशन सिस्टम तैयार करने की कोशिश हुई थी। लेकिन इसमें कुछ बुनियादी कमियां रह गई थीं। मसलन इसमें कुछ मात्राओं का वर्गीकरण ठीक से नहीं समझा जा सकता था।
इसके अलावा मुरकी आदि के तकनीकी चिन्ह इसमें शामिल नहीं थे। इन कमियों को पूरी तरह से दूर कर लिया गया है। इस ब्रेल लिपि में कुछ चिन्हों में बदलाव भी किया गया है।
फेसबुक पर राय देने के लिए क्लिक करें...