{"_id":"5a410a734f1c1b87698c3a8b","slug":"boy-death-due-to-grip-of-stones","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"पहले पिता को खोया फिर ऐसे गंवाई अपनी जान, बहनों का रो-रोकर बुरा हाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पहले पिता को खोया फिर ऐसे गंवाई अपनी जान, बहनों का रो-रोकर बुरा हाल
ब्यूरो/अमर उजाला, अल्मोड़ा
Updated Mon, 25 Dec 2017 08:13 PM IST
विज्ञापन
मौत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पहले पिता का हाथ सिर से उठ गया। हादसे को अभी छह माह ही बीते थे कि परिवार का इकलौता चिराग भी बुझ गया। परिवार पर आए इस दुख के पहाड़ से बहनों को रो -रो कर बुरा हाल है।
विज्ञापन
भनोली तहसील के अंतर्गत पहाड़ से किसी जानवर के पैर की ठोकर से गिरे पत्थर की चपेट में आने से मुरियाबांज गांव निवासी 14 वर्षीय किशोर की मौत हो गई। उसके पिता का छह माह पहले ही निधन हुआ था। छह भाई-बहनों में वह सबसे छोटा था। वह राजकीय इंटर कालेज दन्यां में कक्षा सात में पढ़ता था।
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत धार के पूर्व प्रधान मुरियाबांज गांव निवासी स्व. किशन राम का सबसे छोटा बेटा 14 वर्षीय महेंद्र कुमार सोमवार सुबह गांव के पास ही जंगल में जानवरों को चराने गया था। पहाड़ी पर मवेशी चर रहे थे और वह कुछ दूरी पर पहाड़ी के नीचे बैठा था।
विज्ञापन
छह माह में पिता-पुत्र की असामयिक मौत से छाया घर में मातम
शव
करीब दस बजे जानवरों के पैरों से लुढ़क कर पहाड़ी से काफी संख्या में पत्थर नीचे की तरफ गिरने लगे, जिनकी चपेट में महेंद्र आ गया और सिर पर पत्थर लगने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
परिजनों ने घायल मनोज को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धौलादेवी पहुंचाया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना परिजनों ने भनोली के उपजिलाधिकारी को दे दी है। छह माह में पिता-पुत्र की असामयिक मौत से घर में मातम छाया हुआ है और गांव में भी शोक की लहर है। मृतक की चार बड़ी बहनें और एक बड़ा भाई है। मां का निधन तभी हो चुका था जब वह छह महीने का था।
परिजनों ने घायल मनोज को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धौलादेवी पहुंचाया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना परिजनों ने भनोली के उपजिलाधिकारी को दे दी है। छह माह में पिता-पुत्र की असामयिक मौत से घर में मातम छाया हुआ है और गांव में भी शोक की लहर है। मृतक की चार बड़ी बहनें और एक बड़ा भाई है। मां का निधन तभी हो चुका था जब वह छह महीने का था।