रस्किन ने पुराने अंदाज में लांच की नई किताब
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उन्होंने शनिवार शाम यह किताब पुराने अंदाज में लांच की। स्कूली बच्चों के बीच राजपुर रोड स्थित नटराज ग्रीन शाप पर रस्किन ने इस किताब का एक पैरा ‘टेलीपैथी’ भी पढ़ा। यह किताब भी उनके पहाड़ से जुड़े अनुभवों का खजाना है।
चला सवाल जवाब को दौर
इसके बाद सवाल-जवाब का दौर चला। रस्किन बांड ने बच्चों के सवालों का जवाब बेहद हल्के-फुल्के लहजे में दिया। ज्यादातर का सवाल उनके लेखक बनने से जुड़ा था। उन्होंने कहा कि बचपन से ही कागज पर अपने विचारों को उतारने का शौक था, जो इस पेशे में बदल गया।
एक बच्चे ने पूछा कि ‘हमारे स्कूल में लेखक से ज्यादा वैज्ञानिक जरूरी’? विषय पर वाद-विवाद हुआ था, आपका क्या कहना है? रस्किन बोले-वैज्ञानिक जरूरी हैं, लेकिन लेखक लोगों को खुशी देने का काम करता है। दोनों जरूरी हैं।
एक बच्चे ने उनसे पिता के साथ जुड़े किसी गुदगुदाने वाले वाकये का जिक्र करने को कहा तो उन्हें याद आए शिमला में जाखू हिल पर रिक्शा पर सैर के दिन। कहा कि एक सैर के दौरान सारी भोजन सामग्री बंदर उठा ले गए थे। उनकी गतिविधियां देख सब खिलखिला उठे थे।
किसी पर कमेंट लिखने से जुड़े एक सवाल से याद उन्हें अपनी आंटी, जिन्होंने उनके आकार को लेकर कुछ लिखे जाने पर एक ही वक्त का नाश्ता देना शुरू कर दिया था। इससे पूर्व नटराज बुक शाप के संचालक और रस्किन बांड की किताब के प्रकाशक उपेंद्र ने बुके देकर रस्किन का स्वागत किया।
विशिष्ट अतिथि एचएस मान ने रस्किन बांड को शाल ओढ़ाया। मौके पर उनकी किताबें भी एक अलग स्टाल सजाकर बिक्री के लिए रखी गई थीं।
रस्किन ने बच्चों को अच्छा लेखक बनने के गुर भी बताए। कहा कि कई बार निराशा के क्षण आ सकते हैं, लेकिन फोकस होकर काम करें, कामयाबी मिलेगी।
यह दिए टिप्स
भाषा पर अधिकार पैदा करें, धाराप्रवाह बनें
वाक्यों को जोड़कर लिखने की कला विकसित करें
अपना एक अलग स्टाइल विकसित करें
कापी न हो, ओरिजिनलिटी पर खास ध्यान दें
टाइम, फोकस, कमिटमेंट सर्वाधिक जरूरी