उत्तराखंड: सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की बल्ले-बल्ले, डीए और बोनस का शासनादेश जारी
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प्रदेश सरकार ने सोमवार को करीब तीन लाख कर्मचारियों और पेंशनरों को पांच प्रतिशत महंगाई भत्ते और बोनस के रूप में दीपावली का तोहफा दे दिया है। दीपावली से पहले 25 अक्तूबर तक कर्मचारियों के खाते में उनकी बढ़ी हुई पगार भी पहुंच जाएगी।
साथ ही पेंशनरों को भी पेंशन जारी हो जाएगी। सरकारी कर्मियों को अभी तक 12 प्रतिशत डीए मिल रहा था। इस आदेश के बाद उन्हें अब 17 प्रतिशत डीए मिलेगा। शासन ने इसके लिए महंगाई भत्ता और बोनस का आदेश जारी कर दिया है। दीपावली से पहले ही कर्मचारियों को वेतन के साथ ही 17 प्रतिशत महंगाई भत्ता का भुगतान भी हो जाएगा।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का अनुमोदन प्राप्त होने के साथ ही सचिव वित्त अमित सिंह नेगी की ओर से सोमवार को इनके शासनादेश जारी कर दिए गए। इनके मुताबिक कार्मिकों को एक जुलाई 2019 से 17 प्रतिशत डीए का भुगतान होगा। इसी के साथ शासन ने 1.50 लाख पेंशनरों को भी डीए पांच प्रतिशत बढ़ाकर देने का आदेश जारी किया है। यह कवायद पिछले लंबे समय से जारी थी।
डीए के मामले में राज्य निर्वाचन आयोग ने पहले ही हरी झंडी दे दी थी। सोमवार को बोनस जारी करने की अनुमति भी राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी कर दी गई। शनिवार को ही मुख्यमंत्री ने भी डीए और बोनस जारी करने का निर्देश जारी कर दिया था। कर्मियों को एरियर भी मिलेगा।
1.60 लाख कर्मियों को 6908 रुपये का बोनस
वित्त विभाग ने सोमवार को कर्मचारियों को बोनस के भुगतान का भी आदेश जारी किया है। इससे प्रदेश में करीब 1.60 लाख कर्मचारियों को यह फायदा मिलेगा। वित्त विभाग ने कर्मचारियों को 6908 रुपये नगद बोनस भुगतान करने का आदेश जारी किया है।
इनकों मिला महंगाई भत्ता
नियमित राज्य कर्मचारी, सहायता प्राप्त शिक्षण एवं प्राविधिक शिक्षण संस्थानों, स्थानीय निकायों के नियमित एवं पूर्णकालिक कर्मचारी, कार्य प्रभारित कर्मचारी, राजकीय विश्वविद्यालयों और यूजीसी वेतनमान में कार्यरत पदधारक
करीब 860 करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ पड़ेगा सरकार पर
वित्त विभाग का आकलन है कि डीए और बोनस के भुगतान से प्रदेश सरकार पर करीब 860 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आएगा। करीब 750 करोड़ रुपये का व्यय भार अधिकारियों/ कर्मचारियों और पेंशनर्स को डीए का भुगतान करने पर आएगा। इसके अलावा करीब 110 करोड़ रुपये का भुगतान बोनस के रूप में करना होगा। यह भी तय माना जा रहा है कि इस वित्तीय भार को उठाने के लिए प्रदेश सरकार को अलग से धनराशि की व्यवस्था भी करनी होगी।