नदी में समाई बोलेरो, लेकिन न वाहन मिला न सवारी
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ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर मूल्यागांव के पास एक बोलेरो जीप सड़क से लुढ़ककर अलकनंदा नदी में जा समाई।
शनिवार रात हुए इस हादसे के बाद सोमवार सुबह तक न तो वाहन का पता चल पाया और न ही इसमें सवार लोगों का। बताया जाता है कि दुर्घटनाग्रस्त वाहन में महेंद्रा एंड महेंद्रा कंपनी के तीन कर्मचारी सवार थे। पुलिस का खोज-बचाव दल नदी में कांटा डालकर वाहन की खोज में जुटा है।
मूल्यागांव निवासी विक्रम चौहान ने रविवार सुबह देवप्रयाग थाना पुलिस को सूचना दी कि श्रीनगर की ओर मूल्यागांव के पास एक पिलर टूटा है। इससे लगता है कि कोई दुर्घटना हुई है। पुलिस ने विक्रम के बताए स्थान पर पहुंचकर खोजबीन की तो पहाड़ी में बोलेरो जीप की स्टेपनी, एक बैग, चप्पल और एक टूटा हुआ मोबाइल फोन मिला।
दुर्घटना स्थल पर पत्थरों पर खून लगा होने से दुर्घटना होने की बात पुख्ता हो गई। पुलिस ने मोबाइल का सिम दूसरे मोबाइल में डालकर फोन बुक में दर्ज एक नंबर पर कॉल की तो दूसरी ओर से बताया गया कि मोबाइल नंबर राहुल सिसोदिया पुत्र आरपी सिंह निवासी सेक्टर छह फरीदाबाद का नंबर है।
वाहन को ढूंढने नदी में डाला गया कांटा फंसा
फोन करने वाले ने बताया कि वह राहुल (35) का पिता है। उनका बेटा महेंद्रा एंड महेंद्रा कंपनी में कार्य करता है। राहुल के पिता ने बताया कि राहुल बदरीनाथ से लौट रहा था। रात 10 बजे कर्णप्रयाग में खाना खाते समय उसने घर पर बात की थी। राहुल ने सीधे फरीदाबाद पहुंचने की बात की थी।
घटनास्थल पर मिले बैग की तलाशी लेने पर पुलिस को उसमें से आशुतोष शर्मा (32) पुत्र लोकेश शर्मा निवासी साहिबाबाद जिला गाजियाबाद का ड्राइविंग लाइसेंस और राहुल का परिचय पत्र मिला। इस पते और परिचयपत्र के आधार पर पुलिस ने महेंद्रा एंड महेंद्रा कंपनी के अधिकारियों से बात की। अधिकारियों ने बताया कि आशुतोष और राहुल कंपनी में इंजीनियर हैं। इन दोनों के साथ शिवकांत (34) पुत्र राजेंद्र प्रसाद निवासी गाजियाबाद था।
वाहन के अलकनंदा में समा जाने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस को अभी तक न तो वाहन मिला है और न ही उसमें सवार व्यक्ति। आशंका जताई जा रही है कि वाहन में सवार लोग या तो बह गए हैं या वाहन के अंदर फंसे हैं। तहसीलदार बीएस मंडागी ने बताया कि हरिद्वार से एसडीआरफ भी मौके पर पहुंच गई है। तलाश जारी है।
वाहन को ढूंढने नदी में डाला गया कांटा फंसा
पुलिस ने नदी में समाए वाहन को ढूंढने के लिए अलकनंदा में कांटा डाला था, लेकिन कांटा नदी के भीतर कहीं चट्टानों में फंस कर रह गया। पुलिस का यह तरीका भी काम नहीं कर पाया।
रात 10 बजे बाद किए 10 बैरियर पास, नहीं रोका किसी ने
बताया जा रहा है कि दुर्घटनाग्रस्त वाहन कर्णप्रयाग से 10 बजे रात को चला। नियमानुसार 8 बजे बाद पहाड़ी मार्गों पर यातायात बंद कर दिया जाता है। बावजूद इसके इस वाहन ने कर्णप्रयाग से मुल्यागांव तक 10 पुलिस बैरियर पार किए, लेकिन किसी भी बैरियर में इन्हें रोका नहीं गया।