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...तो ऐसे शरीर में दोबारा विकसित हो सकेंगे अंग
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 13 Feb 2016 01:05 PM IST
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जिस प्रकार पौधे में दोबारा नई कोंपले और उत्तक विकसित हो सकते हैं, उसी प्रकार ओरगेनोजिनिसिस के माध्यम से मानव शरीर में अंगों को दोबारा विकसित किया जा सकता है।
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स्टेम सेल्स से मानव शरीर के रोगों का उपचार आसान हो जाएगा। इसी प्रकार की नई वैज्ञानिक जरूरतों पर मंथन के साथ उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान(यूकॉस्ट) में चल रही साइंस कांग्रेस का समापन हो गया। कार्यशाला के अंतिम दिन 50 युवा वैज्ञानिकों को पुरस्कृत किया गया।
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यूकॉस्ट के सभागार में चल रही साइंस कांग्रेस के समापन सत्र में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन महानिदेशक डॉ. एसएस नेगी बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे। उन्होंने कहा कि शोध एवं अनुसंधान में बेहतर स्थिति के लिए पुस्तकालयों के विकास तथा उनमें संदर्भ पुस्तकों व ग्रंथों की उपलब्धता बनाई जानी चाहिए।
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अध्यक्षता कर रहे सीएम के वित्तीय सलाहकार इंदु कुमार पांडे ने कहा कि परंपरागत ज्ञान को आधुनिक परिवेश में प्रयोग किए जाने की जरूरत है। बाबा भीमराव अंबेडकर विवि, लखनऊ के कुलपति डॉ. आरसी सोबती ने स्टेम सेल्स शोध के द्वारा विभिन्न रोगों के उपचार में प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि मानव अंगों को ओरगेनोजिनिसिस के माध्यम से दोबारा जीवित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जब पौधों में दोबारा नई कोपलें और टहनियां उत्पन्न हो जाती है तो मानव शरीर में क्यों नहीं। भविष्य में रोगों का उपचार स्टेम सेल्स के माध्यम से किया जा सकेगा।
कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. एचएस धामी ने कहा कि उच्च शिक्षा में गुणात्मक सुधारों से भारत विश्व में उच्च स्थान प्राप्त कर सकता है। तकनीकी विवि के कुलपति प्रो. पीके गर्ग ने कहा कि युवाओं को विज्ञान व तकनीकी विषयों पर उच्च शिक्षा व शोध की ओर अग्रसर होना चाहिए। बीएसआईपी लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सीएम नौटियाल ने विज्ञान संचार के बारे में बताया।
वाडिया इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने कहा कि वैज्ञानिक समुदाय को उच्च शिक्षण संस्थाओं में शोध एवं अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। यूकॉस्ट महानिदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल ने दसवें प्रादेशिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी कांग्रेस की संस्तुतियों को प्रस्तुत किया। कांग्रेस में 16 विषयों के कुल 490 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।
कांग्रेस में 50 युवा वैज्ञानिकों को पुरस्कृत करने की संस्तुति दी। जिनमें 28 पुरुष तथा 22 युवा महिला वैज्ञानिकों को चुना गया। सभी को सम्मानित किया गया। सर्वाधिक 14 पुरस्कार जीबी पंत विवि के शोधार्थियों को प्रदान किए गए।
गढ़वाल विवि के शोधार्थियों को छह, कुमाऊं विवि के शोधार्थियों को चार पुरस्कार मिले। गढ़वाल विवि के पूर्व कुलपति प्रो. एसपी सिंह को इकोलॉजी के क्षेत्र में विज्ञान एवं तकनीकी उत्कृष्ठता पुरस्कार से नवाजा गया। ग्राफिक एरा विवि के छात्र सोमजीत मंडल को इनोवेटर ऑफ द ईयर 2016 का अवार्ड दिया गया।