बोर्डिंग स्कूल सामूहिक दुष्कर्म प्रकरण: अमर उजाला और पुलिस की तत्परता से खुला था जघन्य कांड
- अमर उजाला के पास एक गुमनाम व्यक्ति ने किया था फोन
- तत्कालीन एसएसपी और एसओ सहसपुर ने लिया था संज्ञान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
देहरादून शहर से सटे भाऊवाला के बोर्डिंग स्कूल का जघन्य कांड अमर उजाला और दून पुलिस की तत्परता से सामने आया था। अमर उजाला के पास एक सूचना आई, जिसे तत्कालीन एसएसपी निवेदिता कुकरेती और फिर थानाध्यक्ष सहसपुर नरेश सिंह राठौर ने तत्काल संज्ञान लेकर कार्रवाई की। इसके बाद महज चंद घंटों के भीतर ही सभी आरोपियों को पुलिस दबोच लिया।
बता दें, 16 सितंबर 2018 अमर उजाला को एक गुमनाम पाठक ने फोन पर सनसनीखेज सूचना दी थी। सूचना थी कि बोर्डिंग स्कूल में नौवीं की एक छात्रा से 14 अगस्त 2018 को कुछ छात्रों ने दुष्कर्म किया था।
छात्रा ने इसे स्कूल प्रबंधन के कई लोगों को बताया, लेकिन उसकी शिकायत पर किसी ने गौर नहीं किया। इस सूचना को एसएसपी निवेदिता कुकरेती को भेजा गया। उन्होंने एसओ सहसपुर नरेश सिंह राठौर को तत्काल मौके पर भेजा तो कुछ ही देर में इसकी पुष्टि भी हो गई।
बंधन के लोगों ने मामले को दबाने का भी भरसक प्रयास किया
पुलिस ने चंद घंटों में ही दुष्कर्म के आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। जांच में आया था कि यहां न सिर्फ छात्रा से दुष्कर्म हुआ बल्कि प्रबंधन के लोगों ने मामले को दबाने का भी भरसक प्रयास किया। उन्होंने पीड़िता को डराया धमकाया और पुलिस के डर से आरोपी छात्रों को छुपा भी दिया।
मामले में पुलिस ने स्कूल की निदेशक लता गुप्ता, प्रिंसिपल, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, उसकी पत्नी और आया को भी गिरफ्तार कर लिया। छात्रों में से चार तीन छात्र नाबालिग थे, जबकि सर्वजीत नाम का छात्र बालिग निकला। इस मामले में नाबालिगों को किशोर न्याय बोर्ड ने बाल सुधार गृह भेज दिया था, जबकि सभी छह वयस्क आरोपियों को पॉक्सो कोर्ट ने सुद्धोवाला जेल भेज दिया था।
मुकदमे के विवेचक होंगे पुरस्कृत
मुकदमे में पुलिस की विवेचना तारीफ के काबिल है। ऐसे में डीआईजी अरुण मोहन जोशी ने तत्कालीन एसओ सहसपुर नरेश राठौर और मुख्य विवेचना अधिकारी लक्ष्मी जोशी को पुरस्कृत करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि इस तरह मजबूत विवेचनाओं के बल पर ही अपराधियों को सजा और पीड़ितों को न्याय मिलता है।
यह ऐतिहासिक फैसला है। इसी तरह के फैसले आगे लिए नजीर बनते हैं। दोषियों को उनके किए की सजा मिली है यह स्वागत योग्य है।
- आईपीएस निवेदिता कुकरेती, तत्कालीन एसएसपी
हमने विवेचना हर पहलु को ध्यान में रखकर की थी। यही कारण है कि इस मामले में इतना बड़ा फैसला आया है। छात्रा को उसकी मानसिक प्रताड़ना की क्षतिपूर्ति देने का आदेश भी कोर्ट ने दिया है। यह ऐतिहासिक फैसला है।
- एसआई नरेश राठौर, तत्कालीन एसओ सहसपुर