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युवाओं के खून से बच रही है लोगों की जान
योगेंद्र सिंह/अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Wed, 27 Nov 2013 05:53 PM IST
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उत्तराखंड के लोगों की जान बचाने में स्कूल कॉलेजों के छात्र छात्राओं का अहम योगदान है। 2009 से 2013 तक चार सालों में छात्रों ने एक लाख 88 हजार यूनिट ब्लड डोनेट किया। जबकि राज्य के कुल रक्त दानदताओं से दो लाख 99 हजार यूनिट खून प्रदेश के समस्त ब्लड बैंको को मिल सका।
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बडे़ पैमाने पर रक्तदान शिविर
राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के स्वयंसेवी छात्र छात्राएं जहां समाज सेवा, विभिन्न जागरुकता अभियान और सफाई स्वच्छता के कार्यक्रम चलाती है वहीं बडे़ पैमाने पर रक्तदान शिविर लगाकर जिले के ब्लड बैंको में खून जमा करती है। यह खून ही इमरजेंसी के समय लोगों की जान बचाता है।
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राष्ट्रीय सेवा योजना के पूर्व राज्य संपर्क अधिकारी डा. आनंद सिंह उनियाल ने बताया कि 2009 से 2013 तक चार सालों में एनएसएस इकाईयों के प्रदेश भर में 1800 रक्तदान शिविर लगाए गए।
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छात्र-छात्राओं की पहल
इन शिविरों से 188000 यूनिट खून ब्लड बैंकों में जमा किया गया। जबकि जिला ब्लड बैंक हरिद्वार के प्रभारी डा. एसएन खान ने राज्य रक्त संचरण परिषद उत्तराखंड के आंकडे़ बताते हुए जानकारी दी की पिछले चार सालों में अभी तक प्रदेश में रक्त दानदाताओं ने कुल 299284 यूनिट खून जमा।
जिसमें एनएसएस के स्वयं सेवियों का खून भी शामिल है। इस लिहाज से स्वयं सेवी छात्र छात्राओं से अलग केवल 111284 यूनिट खून ही जमा हो सका। आकंड़ों पर गौर करें तो छात्र छात्राओं ने पिछले चार सालों में अन्य सभी नागरिकों से 76716 यूनिट खून ज्यादा जमा किया।
हर तीसरे माह दे रहे खून
एनएसएस के पूर्व राज्य संपर्क अधिकारी और डा. आंनद उनियाल हर तीन माह बाद एक बार खून दे रहे हैं। पिछले 13 सालों वह ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह अब तक 52 बार रक्तदान कर चुकें हैं। एक दिसंबर को तीन माह पूरे होने पर 53 बार रक्तदान करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब खुद रक्तदान करुंगा तभी दूसरों को प्रोत्साहित कर सकता हूं।
एनएसएस के महान योगदान
राष्ट्रीय सेवा योजना के जिला समन्वयक डा. सुरेश चंद्र त्यागी, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कार्यक्रम सन्वयक डा. राकेश और देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कार्यक्रम सन्वयक अरुणेश पारासर का कहना है कि एनएसएस के स्वयं सेवक देश सेवा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
वहीं रक्तदान में स्वयं सेवी छात्र छात्राओं की सबसे बड़ी भूमिका है। उन्होंने डा. उनियाल को 1800 रक्दान शिविर लगाने और खुद 52 बार रक्तदान करने के लिए राज्य सरकार की ओर से रक्तपुरुष की उपाधि और पुरस्कार दिए जाने की मांग की।