45 फीसदी टैक्स दो और कर लो कालेधन को सफेद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आयकर विभाग से छुपाकर यदि कोई संपत्ति बनाई है और अब उसे व्हाइट करने का इरादा है तो सरकार ऐसे लोगों के लिए एक बेहतरीन मौका लाई है।
आयकर विभाग ने डोमेस्टिक डिस्क्लोजर स्कीम-2016 पेश की है, जिसमें देश में कालेधन से बनाई गई संपत्तियों के खुलासे का मौका दिया गया है। इसके तहत संपत्ति पर 45 फीसदी टैक्स देकर उसे एक नंबर का बनाया जा सकता है। खास बात यह भी है कि इस स्कीम में शामिल होने वाले करदाता घोषित संपत्ति को लेकर भविष्य में अभियोजन और स्क्रूटनी की पेचीदगियों में नहीं फंसेंगे।
वर्ष 1997 में तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने वॉलेंट्री डिस्क्लोजर स्कीम पेश की थी। इस स्कीम में शामिल होने वाले सामान्य करदाताओं को 30 फीसदी और कंपनी के मामलों में 33 फीसदी टैक्स देकर ब्लैक मनी को व्हाइट करने का इंतजाम था। इस योजना को लोगों ने हाथोंहाथ लिया था।
नतीजा यह हुआ कि छह माह चली स्कीम में आयकर विभाग को 4,147 करोड़ रुपये बतौर टैक्स मिले। उसके बाद से ऐसी स्कीम का इंतजार करदाताओं को था। बीते वर्ष कालेधन से विदेशों में अर्जित संपत्तियों का खुलासा करने की स्कीम पेश हुए थी, जिसमें 3400 करोड़ रुपये विभाग को बतौर राजस्व मिला।
इसी क्रम में अब डोमेस्टिक डिस्क्लोजर स्कीम-2016 पेश की गई है, जिसमें सभी प्रकार के करदाताओं को एक ही श्रेणी में रखते हुए फ्लैट 45 फीसदी टैक्स लेकर संपत्तियों को एक नंबर में करने का ऑफर दिया गया है। इसमें 30 फीसदी टैक्स है और टैक्स की राशि का 25 फीसदी सेस और इतनी ही पेनाल्टी है।
आयकर विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इस स्कीम का लाभ लेने वाले करदाताओं को घोषित चल-अचल संपत्तियों को लेकर अभियोजन और स्क्रूटनी की कार्रवाई नहीं झेलना पड़ेगा। यह योजना एक जून से 30 सितंबर तक चलेगी। इस अवधि में घोषित संपत्तियों पर 30 नवंबर तक टैक्स जमा करना होगा।
आज की दर पर होगा मूल्यांकन
आयकर अधिकारियों के मुताबिक यदि दो नंबर की रकम से कोई संपत्ति पूर्व में खरीदी गई थी, तो उसका मूल्यांकन एक जून की तिथि से होगा।
मान लीजिए किसी ने 100 गज का एक प्लॉट अघोषित तौर पर दस साल पहले दस लाख रुपये में लिया था और आज उसकी मार्केट वैल्यू एक करोड़ रुपये है तो आयकर विभाग एक करोड़ रुपये मानते हुए इस पर 45 लाख रुपये टैक्स लेकर इसे घोषित मानेगा। कुछ यही स्थिति सोने-चांदी और अन्य कीमती वस्तुओं की घोषणा करने पर होगी।
चौतरफा घेरने के बाद आई योजना
केंद्र में नई सरकार आने के तत्काल बाद से ही कालेधन के प्रचलन पर निगरानी और अंकुश लगाने की कवायद शुरू हो गई थी। आयकर सलाहकार सीए विवेक खन्ना की मानें तो सरकार ने सबसे पहले रियल इस्टेट के क्षेत्र में तमाम पाबंदियां लगाईं। इसमें सर्किल रेट के नीचे रजिस्ट्री करवाने और 20 हजार रुपये से अधिक राशि की नकद धनराशि एडवांस में न दिए जाने समेत तमाम नियम बनाए गए।
ऐसे तमाम नियम-कानून के चलते देश के रियल इस्टेट मार्केट में कालेधन का प्रवाह काफी हद तक रुक गया। इसके बाद ज्लेवरी सेक्टर पर भी शिकंजा कसा गया।
एक निर्धारित राशि के जेवर या बुलियन खरीदने की दशा में पैन कार्ड की अनिवार्यता और उसके बाद ज्वेलरी सेक्टर को एक्साइज ड्यूटी की जद में लाना इसी कड़ी में शामिल है। इसके बाद यह डिस्क्लोजर स्कीम पेश की गई है। माना जा रहा है कि इसमें सन-97 के मुकाबले कई गुणा टैक्स सरकार के खजाने में आएगा।