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उत्तराखंड विधानसभा का काला दिन, गैरसैंण में मर्यादा हुई तार-तार

Wed, 04 Nov 2015 02:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 04 Nov 2015 02:24 AM IST
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black day of uttarakhand assembly in gairsain.

दावा तो गैरसैंण को मील का पत्थर साबित करने का था, लेकिन मंगलवार को सदन में हुए हंगामे और दो दिन में ही सत्र समापन ने यहां के इतिहास में ऐसा काला अध्याय जोड़ दिया, जिसे शायद ही भुलाया जा सके।

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गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के मुद्दे पर सरकार की स्पष्ट राय की मांग कर रहे विपक्ष ने सदन की मर्यादा को ही तार-तार कर दिया। स्पीकर की रिपोर्टिंग मेज को उलट दिया गया। माइक तोड़ दिए गए।
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नेता सदन की मेज को भी उलटने की कोशिश की गई। दस मिनट तक विपक्ष के सदस्य पीठ तक पहुंचने के लिए मार्शलों से हाथापाई करते रहे। गणेश जोशी, राजकुमार ठुकराल, पुष्कर धामी का रवैया देखकर विधानसभा अध्यक्ष ने चेताया कि दोबारा यह हरकत हुई तो एक साल के लिए निलंबित कर दूंगा।

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मार्शलों से हाथापाई, तोड़ डाले माइक

black day of uttarakhand assembly in gairsain.

इससे पहले सदन की कार्यवाही सुबह 11.10 बजे, दोपहर 12.50 बजे और 1.30 बजे तीन बार स्थगित हुई। इसके बाद कार्यवाही तीन बजे शुरू होनी थी, लेकिन यह साढ़े तीन बजे शुरू हुई। इस बार विपक्ष काम रोको प्रस्ताव लाकर नियम 310 में गैरसैंण के मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग पर अड़ गया।

इसे लेकर भाजपा के सदस्य वेल में आ गए। तभी नेता सदन हरीश रावत ने सरकार की ओर से सदन पटल पर विशेष राज्य का दर्जा बरकरार रखने का प्रस्ताव रखने की कोशिश की और सरकार ने दो विधेयक और पारित करा लिए। साथ ही सदन में रखे गए संकल्पों पर चर्चा चलती रही।

इसी बीच सदन में हंगामा शुरू हो गया और दस मिनट तक सदन कुश्ती के अखाड़े में बदल गया। एक तरफ नेता सदन माइक पर प्रस्ताव पढ़ रहे थे। दूसरी तरफ नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट व अन्य भाजपा सदस्य माइक उखाड़ने में लगे थे।

मेज पर चढ़े नेता प्रतिपक्ष, तीरथ और पुष्कर धामी

black day of uttarakhand assembly in gairsain.

पुष्कर सिंह धामी, गणेश जोशी, राजकुमार ठुकराल मार्शलों से उलझ गए। उन्होंने रिपोर्टिंग मेज पलटने की कोशिश की। पीठ की ओर कागज के गोले भी फेंके गए। अपनी जगह खड़े तीरथ सिंह रावत ने मेज पर लगा माइक तोड़ डाला। नेता सदन की मेज की तरफ भी भाजपा के कुछ विधायक लपके तो मार्शलों के लिए भी एक बार तो स्थिति को संभालना मुश्किल हो गया।

सुरक्षा अधिकारियों के इशारे पर करीब एक दर्जन विधानसभा स्टाफ में लगे लोग पीठ की ओर बढ़े तो हालात बिल्कुल पूरी तरह अनियंत्रित दिखाई दिए। विपक्ष ने सत्ता पक्ष पर सदन में पुलिस बुलाने का आरोप लगाया। इस बीच नेता सदन लगातार बोलते रहे।

यह सब कुछ इतनी तेजी से घटित हुआ कि विधानसभा अध्यक्ष भी विपक्ष से शांत रहने की अपील नहीं कर पाए। इन हालात के बीच ही स्पीकर ने सत्र को अनिश्चितकालीन अवधि के लिए समाप्त करने का ऐलान कर दिया। राष्ट्रगान शुरू होने के बाद ही यह हंगामा थम पाया।

जानिए, घटना पर किसने क्या कहा

black day of uttarakhand assembly in gairsain.

जो कुछ हुआ वह निदंनीय है। समझ मे नहीं आता कि इस पर दुख जताऊं या आक्रोश जाहिर करूं। सरकार नियम 310 में चर्चा स्वीकार नहीं कर सकती थी। विपक्ष को और भी विकल्प दिए थे। सदन में पुलिस नहीं, रिजर्व में रखे गए मार्शल पहुंचे थे, लेकिन दिल्ली में नंबर बढ़ाने के लिए उत्तराखंड में भाजपाइयों ने यह तमाशा किया। सदन नहीं चलने देने के लिए भाजपा जिम्मेदार है।
-हरीश रावत, मुख्यमंत्री

यह शर्मनाक है। विपक्ष से नियम 58 में गैरसैंण पर चर्चा का प्रस्ताव लाने को कहा था, सरकार भी जवाब देती। लेकिन हंगामा ने थमता देख मैंने पुष्कर सिंह धामी, गणेश जोशी, राजकुमार ठुकराल को अल्टीमेटम दिया कि यदि ऐसा दोबारा हुआ तो एक साल के लिए निलंबित कर दिया जाएगा। मार्शल के इशारे पर कुछ रिजर्व मार्शल सदन के अंदर आए थे, जिनको मैंने बाहर भेज दिया था।
-गोविंद कुंजवाल, विधानसभा अध्यक्ष

सदन में पुलिस बुलाना सरकार की खराब मंशा थी। ये लोग विपक्षी विधायकों को मारने पर ही उतारू थे। सरकार का गैरसैंण पर असली चेहरा सामने आ गया है। विधायकों का जिस तरह से सदन के बाहर विरोध किया गया। सरकार ने सदन की कार्यवाही को कांग्रेस का अधिवेशन बना डाला। पीठ की तरफ जाना तो अलग बात है, पर विधायकों को भड़काने का बाकी काम तो बाहरी लोगों ने ही किया।
-अजय भट्ट, नेता प्रतिपक्ष

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