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‘कहते हैं भगतुवा इधर उधर क्यों घूम रहा है’

Mon, 26 Aug 2013 10:51 PM IST
अमर उजाला, अनूप वाजपेयी/जितेंद्र पपनै, रामनगर
अमर उजाला, अनूप वाजपेयी/जितेंद्र पपनै, रामनगर Updated Mon, 26 Aug 2013 10:51 PM IST
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bjp working committee meeting in ramnagar

उत्तराखंड भाजपा की दो दिवसीय कार्यसमिति की बैठक रविवार को इस संकल्प के साथ समाप्त हुई कि आपसी मतभेद और दूरियां मिटाकर कांग्रेस को उखाड़ फेकेंगे। समापन सत्र में बड़े नेताओं के भाषण का आशय पदाधिकारियों की समझ में तो आ गया, लेकिन बैठक में एकजुटता पर राजी नेताओं की गुटबाजी बाहर निकलते ही साफ दिखी।

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बैठक जैसे ही समाप्त हुई बीसी खंडूरी सीधे लौट गए। एकजुटता का पाठ पढ़ने के बाद सभी छोटे-बड़े भोजन के लिए एक जगह जुटे। दो पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और भगत सिंह कोश्यारी भी वहां पहुंचे। दोनों ने अपने-अपने समर्थकों को जुटाकर ताकत का प्रदर्शन किया। कोसी नदी के छोर पर निशंक जा डटे तो भगतदा ने स्वीमिंग पुल का छोर संभाला। अब बारी पदाधिकारियों की थी जो समझ नहीं पा रहे थे कि खाने की प्लेट लेकर किधर जाएं।
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मां भी मुझे भगतुवा ही बुलाती थीं

बैठक में दूसरे दिन पहुंचे भगतदा तो जैसे फट पड़े। उन्होंने कहा कि मैं प्रदेश का दौरा करता हूं तो लोग कहते हैं ये भगतुवा इधर-उधर क्यों घूम रहा है। वैसे मुझे खराब नहीं लगता क्योंकि मेरी मां भी मुझे भगतुवा ही बुलाती थीं। उन्होंने कहा कि कान और मुंह के बीच दूरी होती है किसी ने क्या कहा उस पर ध्यान नहीं देना चाहिए। कोई कहता है कि खंडूरी तो यह कह रहे थे, बची कुछ कह रहा है। हमें इन पर ध्यान नहीं देना चाहिए, क्योंकि ऐसा होने से ही चीजें खराब होती हैं। हमें एकजुटता से पार्टी को मजबूती देनी चाहिए।
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हमें कोई रोक नहीं सकता
दूसरे मुख्यमंत्री निशंक भी पीछे नहीं रहे उन्होंने भी बड़े स्पष्ट शब्दों में कहा कि हमें दोबारा मिलकर काम करने की आवश्यकता है। एकजुट हो जाएंगे तो हमें कोई रोक नहीं सकता। उन्होंने कहा कि टांग खिंचाई की बजाय हमें अपनी सरकार के समय किए गए कार्यों की बुकलेट तैयार करानी चाहिए। उन्हें प्रत्येक कार्यकर्ता तक पहुंचाना चाहिए ताकि वे जनता को हमारी उपलब्धि बता सकें।

आम तौर पर शांत और कम बोलने वाले प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत भी फुल फॉर्म में दिखे। उन्होंने साफ-साफ हिदायत भरे शब्दों में तत्काल गुटबाजी बंद कर काम करने की नसीहत दे डाली। उन्होंने कहा कि दिल्ली के चक्कर लगाने से काम नहीं चलेगा। जमीन से जुड़े कार्यकर्ता को ही पार्टी मौका देगी।


प्रदेश प्रभारी और अनुशासन समिति के अध्यक्ष राधा मोहन सिंह के लिए इस बात की खुशी थी कि उत्तराखंड की त्रिमूर्ति एक साथ उनके अगल-बगल बैठी है, लेकिन उन्हें भी इस बात का एहसास है कि कम मार्जिंन से हारने वाली भाजपा में अगर आपसी खींचतान बंद हो जाए तो पार्टी फिर से सत्ता में काबिज हो सकती है।

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