{"_id":"582beaf24f1c1b55368ff6dd","slug":"bjp-politics-on-gairsain-assembly-session","type":"story","status":"publish","title_hn":"गैरसैंण पर सरकार के सियासी दांव के इंतजार में भाजपा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गैरसैंण पर सरकार के सियासी दांव के इंतजार में भाजपा
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 16 Nov 2016 10:43 AM IST
विज्ञापन
ajay bhatt
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गैरसैंण विधानसभा सत्र के दौरान भाजपा को राजधानी के दांव का इंतजार है। कांग्रेस सरकार राजधानी पर जो भी दांव खेलेगी भाजपा उसी हिसाब से सत्ता पक्ष पर हमलावर रुख अपनाएगी।
विज्ञापन
बहरहाल, इस मसले पर वह वेट एंड वॉच की स्थिति में है। वह सत्र से अधिक परिवर्तन यात्रा को तरजीह दे रही है। उसने सदन में अपना कुनबा छोटा कर कांग्रेस को फ्रंटफुट पर आने के लिए सियासी गुगली फेंकी है। ऐसे में गैरसैंण पर अगर सरकार कोई निर्णय लेती है तो राजधानी के मुद्दे पर वह पहाड़ और मैदान के बीच फंस सकती है। सियासी रणनीतिकारों की मानें तो अब गेंद कांग्रेस के पाले में डाल भाजपा ने अपनी फील्डिंग बाउंड्री पर लगा दी है।
विज्ञापन
गैरसैंण में आखिरी सत्र के कई सियासी मायने हैं, जिसमें सबसे अहम राजधानी का मुद्दा है। गैरसैंण में विधानसभा भवन की नींव रखकर कांग्रेस ने पहाड़ की जनभावनाओं को अपने पक्ष में करने का जो दांव खेला था अब उससे चुनाव में सियासी बढ़त लेने की चुनौती है। भराड़ीसैंण में विधानसभा भवन सहित तमाम सुविधाएं विकसित कर दी गई हैं। अब सरकार पर राजधानी के मुद्दे पर कोई न कोई निर्णय लेने का दबाव है। भाजपा ताक में है।
विज्ञापन
स्थाई राजधानी गैरसैंण को बनाने का दांव सरकार खेले इसकी गुंजाइश कम ही मानी जा रही है, भले ही विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने के सबसे बड़े पक्षधर हैं। सरकार को अंदाजा है कि इस निर्णय से उसे तीन जनपदों हरिद्वार की 11 विधानसभाओं, ऊधमसिंहनगर की 9 सीटों और देहरादून की सात मैदानी सीटों में नुकसान उठाना पड़ सकता है।
अगर कांग्रेस ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करती है तो भाजपा स्थाई राजधानी का राग छेड़ेगी। भाजपा के सियासी रणनीतिकार इस आकलन में जुटे हैं कि अगर गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन का दर्जा देने का श्रेय कांग्रेस लेती है तो स्थाई राजधानी को किस तरह से सियासी मुद्दा बनाया जाए। इसी के चलते उन्होंने विजन डाक्युमेंट से गैरसैंण को फिलहाल बाहर रखा है।
गैरसैंण अगर ग्रीष्मकालीन तो दून स्थाई
सरकार के विधानसभा सत्र से पूर्व गैरसैंण राजधानी पर बरती जा रही गोपनीयता की सियासी वजह हैं। विधानसभा चुनाव दस्तक दे रहे हैं। अगर गैरसैंण को सरकार ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करती है तो स्थाई राजधानी निश्चित तौर पर देहरादून हो जाएगी। गैरसैंण से जुड़ी क्षेत्रीय जनभावनाओं को ग्रीष्मकालीन से संतुष्ट कर ले जाने की चुनौती सबसे बड़ी है।