उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को 'महंगे' पड़े हरीश रावत के आम, पार्टी नेताओं ने दी तीखी प्रतिक्रिया
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पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को पानी पी-पी कर कोसने वाले पूर्व सीएम हरीश रावत की ‘आम पार्टी’ में सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत का जाना संगठन के कई नेताओं को नहीं सुहाया। प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट तो मीडिया कर्मियों से यहां तक कह गए कि ‘हरीश रावत हमारे प्रधानमंत्री को गाली दें, हमारी सरकार को गरियाएं और हम उनके आगे हा-हा, ही-ही करते रहें, ये हमसे तो बिल्कुल भी नहीं होता है।’
यह अलग बात है कि ‘अमर उजाला’ ने जब इस बारे में उनसे पूछा तो उन्होंने यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया कि उन्होंने मजाकिया लहजे में ऐसा कहा। उन्होंने अमर उजाला से कहा कि आम पार्टी में जाने में कोई बुराई नहीं। यह हमारे मुख्यमंत्री के शिष्टाचार की उदारता है। उनका कहने का आशय यही था कि हमारे प्रधानमंत्री को गरियाने वाले हरीश रावत के आम हमें नहीं खाने।
दरअसल, हरीश रावत की ‘आम पार्टी’ के बारे में टीवी चैनलों को दी गई अपनी प्रतिक्रिया में भट्ट ने कहा कि ‘मैं मुख्यमंत्री जी के मन की बात नहीं जान सकता। हमारा हरीश रावत जी से सैद्धांतिक मतभेद आज भी उतना ही है, जितना पहले था।
वह हमारे प्रधानमंत्री को गाली दें, हमारी सरकार को गरियाएं और हम उनके आगे हा-हा, ही-ही कहते रहें, ये हमसे तो बिल्कुल नहीं होता है। निमंत्रण आएंगे। उनमें जाएंगे भी। लेकिन सिद्धांतों पर कोई समझौता नहीं है।’ हरीश रावत को लेकर भट्ट की यह प्रतिक्रिया अनायास नहीं है। दरअसल, चार जुलाई को हरीश रावत के साथ साझे मंच से जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने नमामि गंगे पर प्रधानमंत्री और रिस्पना पर मुख्यमंत्री की आलोचना की थी। इसे रावत की सुनियोजित रणनीति का हिस्सा माना गया था।
मुझे बुलाया होता तो भी नहीं जाता: डॉ. हरक
पूर्व सीएम हरीश की आम पार्टी पर कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि यदि उन्हें बुलाया जाता तो भी वह नहीं जाते, क्योंकि उनके घर में बहुत आम हैं।
सीएम के आम पार्टी में शिरकत करने पर उन्होंने कहा कि यह उनका नितांत निजी मामला है। जहां तक उनका सवाल है तो हरीश रावत से उनके जो सैद्धांतिक मतभेद हैं, वह अपनी जगह कायम हैं।
उन्होंने कहा कि उनके जन विरोधी फैसलों के विरोध में जब हमने बगावत की, तब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के लिए जो टिप्पणियां कीं थीं, उन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता। लेकिन न तो उनकी सरकार बनी और न वह चुनाव जीत पाए। ‘बेचारा’ शब्द उन जैसे लोगों के लिए ही बना है।