संघ की ‘युद्धनीति’ पर लड़े भाजपा के ‘योद्धा’
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भाजपा की धमाकेदार जीत राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की बदौलत हुई। वर्ष 2014 के ‘महासमर’ में भाजपा के ‘योद्धा’ संघ की चुनावी ‘युद्धनीति’ के लिहाज से लड़े जिससे इतने वोटों के अंतर से विजयश्री मिली।
पल-पल की मॉनीटरिंग
संघ के पदाधिकारी पल-पल की मॉनीटरिंग करते रहे। जहां ऊंच-नीच दिखी तो नेताओं की क्लास ले ली। 1977 के बाद 2014 के चुनाव में संघ ने चुनाव में ऐसी दिलचस्पी दिखाई।
चुनाव की तैयारी के वक्त भाजपा की टीमें प्रचार में लगी हुई थीं। लेकिन संघ के घटक गोपनीय तरीके से इन पर नजर रखे हुए थे। किसी भी बूथ क्षेत्र में अगर जरा सी भी लापरवाही दिखी तो उस पर फौरन जवाब-तलब हुआ।
समन्वयकों की टीमें गठित हुईं जिसने एक-एक वोट का हिसाब रखा। मतदान के नजदीक चुनाव की बागडोर संघ के पदाधिकारियों के हाथों में थी। चुनाव की तैयारियों की ऐसी कड़ी निगरानी कोई और दल नहीं कर पाया।
वरिष्ठ भाजपा नेताओं की गोपनीय बैठकें ली
कांग्रेस के प्रत्याशियों की घोषणा के बाद भाजपाइयों में बेचैनी उभरी तो संघ ने फौरन हौसला बढ़ा दिया। प्रांत प्रचारक डा. हरीश रौतेला ने प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेताओं की गोपनीय बैठकें लीं।
नेताओं को जो लक्ष्य दिया गया था, उसमें जरा सी कमी मिलने पर क्लास ली गई। उन्हें फिर से निश्चित समय के अंदर काम पूरा करने के लिए कहा गया। बूथ स्तर के जिम्मेदारों से संघ का सीधा संपर्क रहा।
संघ ने विभिन्न विधानसभा, मंडल और बूथ क्षेत्रों के लिए अलग-अलग रणनीति तैयार की थी। जिस बूथ पर भाजपा को कम वोट मिले थे, वहां टीमों की संख्या डबल कर दी गई।
वोटरों को मतदान के लिए बाहर निकालने में स्वयं सेवकों की मशक्कत काम आई। संघ के अखिल भारतीय सह संपर्क प्रमुख राम माधव ने यहां बताया भी था कि जनता में परिवर्तन की इच्छा देख 1977 के बाद वर्ष 2014 में संघ ने यह कदम उठाया।