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राज्यसभा चुनाव: अपनी ही चाल में उलझी भाजपा
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 02 Jun 2016 02:41 AM IST
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भाजपा समर्थित राज्यसभा प्रत्याशी
- फोटो : अमरउजाला
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प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट पर होने वाले चुनाव को लेकर भाजपा ने अपने ही कार्यकर्ताओं को निर्दलीय प्रत्याशी बनाकर चुनाव मैदान में तो उतार दिया है, लेकिन उनकी राह बहुत आसान नहीं लग रही है। वजह यह है कि अगर दो निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में रहे तो जाहिर है कि भाजपा विधायकों के मतों का विभाजन होगा। ऐसे इसका सीधा फायदा कांग्रेस के प्रत्याशी को होगा।
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इसको देखते हुए भाजपा की कोशिश है कि कांग्रेस के प्रत्याशी के खिलाफ मैदान में एक प्रत्याशी ही रहे। निर्दलीय प्रत्याशी अनिल गोयल और गीता ठाकुर में से किसका नामांकन वापस कराया जाए। इस पर विचार चल रहा है।
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पहले किया मना फिर उतार दिए दो
पीडीएफ के दिनेश धनै से जब चुनाव लड़ने का एलान कर दिया था तो भाजपा ने उनके स्टैंड की सराहना करनी शुरू कर दी। जब वह बैक फुट पर आ गए तो भाजपा उन्हें कोसने लगी। संख्या बल को देखते हुए भाजपा ने राज्यसभा के चुनाव में प्रत्याशी नहीं उतारने का एलान कर दिया था।
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भाजपा का प्रत्याशी मैदान में नहीं होने की स्थिति में कांग्रेस को सीधे-सीधे वाकओवर मिलता दिखाई दे रहा था। भाजपा ने आनन फानन में अपने ही दो कार्यकर्ताओं को निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल करवा दिया।
नामांकन वापसी पर मंथन
ऐसे में अब भाजपा की कोशिश है कि दोनों में एक का नामांकन वापस कराया जाए। दोनों में से अपना नामांकन कौन वापस करेगा? इसको लेकर मंथन चल रहा है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट का कहना है कि दोनों ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया है।
हम किसी से मैदान से हटने को नहीं कह सकते हैं, लेकिन अच्छा तो यही होगा कि मैदान में एक निर्दलीय प्रत्याशी ही रहे। यदि कुछ लोग निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं तो इसमें बुराई क्या है? हम उनका समर्थन कर रहे हैं।