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गंगोत्री अपर हिमालयी क्षेत्र में आई बड़ी 'आफत', लेकिन अधिकारी बेखबर

Thu, 02 Nov 2017 12:08 PM IST
सूरत सिंह रावत / अमर उजाला, गंगोत्री(उत्तरकाशी)
सूरत सिंह रावत / अमर उजाला, गंगोत्री(उत्तरकाशी) Updated Thu, 02 Nov 2017 12:08 PM IST
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big problem in gangotri himalaya area
gangotri

गोमुख ट्रैक पर कनखू बैरियर के पास से गंगोत्री नेशनल पार्क की सीमा शुरू होने के बाद कई किमी हिस्से में भोजवृक्ष किसी बीमारी की चपेट में आकर सूखने लगे हैं।

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कई तरह के पर्यावरणीय संकट से जूझ रहे गंगोत्री अपर हिमालयी क्षेत्र में आई इस आफत से अभी तक विभागीय अधिकारी अनभिज्ञ हैं। 
          
ग्लोबल वार्मिंग के कारण स्नो लाइन पीछे सरकने से अब वहां भोज के जंगल उगने लगे हैं। जानकारों की मानें तो पटागंणा गंगोत्री में कुछ वर्ष पहले कैल के पेड़ों पर आई ऐसी ही बीमारी से सैकड़ों पेड़ सूख गए थे।

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गंभीर पर्यावरणीय संकट को न्योता

big problem in gangotri himalaya area
bhojpatra
भोज के जंगल में जिस तरह से तने व टहनियों पर काले धब्बे आने से बड़ी संख्या में पेड़ सूखने लगे हैं, इसे नजरअंदाज करना गंभीर पर्यावरणीय संकट को न्योता देने जैसा है।

25 वर्षों से चीड़वासा में नर्सरी और भोजवासा में 7.5 हेक्टेयर में प्लांटेशन में भोज वृक्षों के वनीकरण में जुटी अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित डा. हर्षवंती बिष्ट कहती हैं कि उन्हें इस क्षेत्र की कठिन परिस्थितियों के बावजूद वनीकरण किए 53 प्रतिशत वृक्षों को जीवित रखने में सफलता मिली है।

इस क्षेत्र में भोज के अलावा उच्च हिमालयी वनस्पतियों को संरक्षण की जरूरत है। भोज वृक्षों की बीमारी गंभीर मामला है।
 

पर्यावरण वैज्ञानिकों को मिलकर इस समस्या पर ध्यान देने की जरूरत

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gangotri park - फोटो : amarujala
गंगोत्री हिमालय के पर्यावरण की चिंता करने वाले लोगों और पर्यावरण वैज्ञानिकों को मिलकर इस समस्या पर ध्यान देने की जरूरत है।

उधर, गंगोत्री नेशनल पार्क के उप निदेशक श्रवण कुमार कहते है कि उन्हें भोजवृक्ष पर लगी बीमारी की जानकारी नहीं मिली है। वे शीघ्र क्षेत्र में जाकर स्थिति का पता लगाएंगे।

राज्य के मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक डीबीएस खाती कहते हैं कि जांच कराने के बाद जरूरत पड़ी तो एफआरआई के वैज्ञानिकों से मौके पर जाकर बीमारी का पता लगाने का अनुरोध किया जाएगा।
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